The Lallantop

थलापति विजय के सभी विरोधियों को आम आदमी पार्टी वाला 'डर' तो नहीं?

तमिलनाडु की सत्ता से दशकों से गायब कांग्रेस पार्टी TVK के कंधे पर सवार होकर एक बार फिर सरकार में वापसी करना चाहती है, भले ही मुख्यमंत्री उसका नहीं होगा. पार्टी टीवीके सरकार को शर्तों के साथ समर्थन देने के लिए राजी है. लेकिन लाइन में और भी दुश्मन अब दोस्त बनने को तैयार खड़े हैं.

Advertisement
post-main-image
तमिलनाडु में विजय की TVK पार्टी को समर्थन देने की होड़ मची है. (फोटो- इंडिया टुडे)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने 108 सीटें जीतकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन बहुमत के लिए अभी भी 10 सीटों की जरूरत है।
  • चुनाव में TVK की सफलता के बावजूद, पार्टी को बहुमत हेतु अन्य दलों जैसे कांग्रेस, AIADMK और DMK से समर्थन की आवश्यकता है क्योंकि अकेले सीटें पर्याप्त नहीं हैं।
  • यदि TVK को आवश्यक 10 सीटें मिलती हैं तो सरकार बनेगी, नहीं तो पुनः चुनाव हो सकते हैं, जिससे कांग्रेस और अन्य पुराने दलों को अपनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम(TVK) पार्टी ने 108 सीटें जीतकर तहलका मचा दिया. पार्टी ने पहले ही चुनाव में तमिलनाडु की सियासत का गणित बदल कर रख दिया है. कहां तो राजनीतिक विरोधी थलापति को करूर रैली हादसे के लिए लगातार घेर रहे थे, और कहां अब उनके साथ आने के लिए कथित तौर पर जुगाड़ लगा रहे हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

तमिलनाडु की सत्ता से दशकों से गायब कांग्रेस पार्टी TVK के कंधे पर सवार होकर एक बार फिर सरकार में वापसी करना चाहती है, भले ही मुख्यमंत्री उसका नहीं होगा. पार्टी टीवीके सरकार को शर्तों के साथ समर्थन देने के लिए राजी है. लेकिन लाइन में और भी दुश्मन अब दोस्त बनने को तैयार खड़े हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने वाली AIADMK और सत्ता से बाहर हुई DMK भी थलापति को गले लगाना चाहती हैं. हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जल्दी ही टीवीके के आगे पेशकश की जा सकती है.

Actor Vijay
थलापति विजय.

अब सवाल उठता है कि चुनाव में थलापति विजय को कोस रहे ये दल अपनी 'चिल्लर' विधायक संख्या के साथ टीवीके में शामिल होने के लिए इतने उतावले क्यों हो रहे हैं? 

Advertisement

इंडिया टुडे के लिए अविनाश कतील लिखते हैं कि इन पुराने दलों को अपना अस्तित्व खोने का डर है. चुनाव में TVK को सबसे ज्यादा 108 सीटें मिलीं. लेकिन ये बहुमत हासिल करने के लिए काफी नहीं है. अभी भी टीवीके को 10 सीटों की जरूरत है. सारा खेल इसी से जुड़ा है.

टीवीके को इन 10 सीटों का इंतजाम दूसरे दलों से ही करना है. लेकिन अगर किसी वजह से ऐसा नहीं हो पाता तो थलापति मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे. नई सरकार का गठन ही नहीं होगा तो राज्यपाल दोबारा चुनाव कराने का आदेश दे देंगे.

अविनाश बताते हैं कि कांग्रेस और अन्य दलों को इस बात का खटका है कि फिर से चुनाव की हालत में हो सकता है वे अपने बचेखुचे विधायक भी खो दें. उन्हें डर है कि पहले चुनाव की लहर दूसरे चुनाव में सुनामी बन सकती है. टीवीके को इतनी ज्यादा सीटें मिलेंगी कि सरकार बनाने के लिए उन्हें पूछने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. इससे दो खतरे हैं. एक, हो सकता है दूसरे चुनाव में जनता उन्हें एक भी विधायकी न बख्शे. दो, सरकार में शामिल होने का मौजूदा मौका भी हाथ से निकल जाए. 

Advertisement

ये डर यूं ही नहीं है. साल 2013 और 2015 में दिल्ली में ऐसा हो चुका है. 70 विधानसभाओं वाली दिल्ली में आम आदमी पार्टी अपने पहले ही चुनाव में 28 सीटें जीतकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. तब कांग्रेस के सपोर्ट से उसने सरकार बनाई थी जो कुछ ही हफ्तों बाद गिर गई. इसके बाद कई महीने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन रहा. फिर 2015 में फिर चुनाव हुआ तो AAP की सुनामी में सब बह गए. 70 में से 67 सीटें जीतकर केजरीवाल की पार्टी ने सियासी गणितज्ञों को भिन्नाट कर दिया. बीजेपी के पल्ले सिर्फ 3 सीटें आई. कांग्रेस को एक भी नसीब न हुई.

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस, एआईएडीएमके जैसे पुराने दलों को यही डर खाए जा रहा है. इसीलिए वे बहुमत के लिए जरूरी 10 सीटों के अंतर में संभावनाएं तलाश रहे हैं. देखना बस ये है कि कांग्रेस के अलावा थलापति विजय और किसके साथ जाते हैं. 

वीडियो: पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा Voter Deletion वाली सीटों पर TMC का क्या हुआ?

Advertisement