हर दौर में अभिनेता-अभिनेत्री किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े रहे हैं. और ये दौर भी अछूता नहीं है. 17वीं लोकसभा के चुनाव ने लिए तारिखों का एलान हो चुका है. पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर रही हैं. कई जगहों से एक्टर-एक्ट्रेस को मैदान में उतार रही हैं. 26 मार्च को जया प्रदा ने बीजेपी का दामन थामा. उन्हें तुरंत रामपुर से टिकट भी मिल गया. उनका मुकाबला सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार आजम खां से है. बुधवार को बॉलिवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर कांग्रेस में शामिल हो गईं. नॉर्थ मुंबई से उन्हें कांग्रेस की ओर से टिकट मिल सकता है. 21 मार्च को सलमान खान के राजनीति में आने की अफवाह उड़ी थी, लेकिन सलमान ने ट्वीट कर उन अफवाहों पर लगाम लगाया. इसके बाद डांसर और सिंगर सपना चौधरी के कांग्रेस में शामिल होने की खबर आई. बाद में सपना ने इनकार कर दिया. अब उनके बीजेपी जॉइन करने की चर्चा है.
स्टारडम ने दिलाई बड़ी जीत
बॉलिवुड हो या रिजिनल सिनेमा. फिल्म स्टार की बहुत बड़ी फैन फोलोइंग होती है. चुने जाने के बाद क्या ये एक्टर-एक्ट्रेस अच्छे राजनीतिज्ञ साबित होते हैं? इलेक्शन कमीशन और पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के पास उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग करते हुए इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि हिंदी और क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के कम से कम 10 अभिनेता हैं जो 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए थे. उनके स्टारडम ने उन्हें बड़ी जीत दिलाई. लेकिन सांसद चुने जाने के बाद संसद में उनका परफॉर्मेंस ब्लॉकबस्टर नहीं रहा. अभिनेता से नेता बने ज्यादातर सांसदों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. उनका अटेंडेंस बहुत कम रहा. उन्होंने बहुत कम सवाल पूछे. और डिबेट में भी हिस्सा नहीं लिया.
बीजेपी से जीते सबसे ज्यादा एक्टर-एक्ट्रेस
2014 के लोकसभा चुनाव में 20 से 21 एक्टर्स ने चुनाव लड़ा था. लेकिन इनमें से 10 अभिनेता ही संसद पहुंचे. इनमें से 6 भारतीय जनता पार्टी से थे. दो टीएमसी, एक लोक जनशक्ति पार्टी और एक आम आदमी पार्टी से थे. अभिनेता से नेता बने 10 सांसदों में से 8 पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. विनोद खन्ना ( जो अब इस दुनिया में नहीं हैं) चौथी बार सांसद बने थे. इसके अलावा बीजेपी के शत्रुघ्न सिन्हा दूसरी बार सांसद बने थे.
बड़े अंतर से जीते थे चुनाव
2014 के लोकसभा चुनाव में सभी एक्टर भारी अंतर से जीते थे. 10 में से 6 नेताओं के जीत का अंतर एक लाख वोट से भी ज्यादा था. उत्तर प्रदेश के मथुरा से हेमा मालिनी ने सबसे ज्यादा 330,743 वोटों से जीत हासिल की थी. वहीं बीजेपी की टिकट पर चंडीगढ़ से चुनाव लड़ने वाली किरण खेर ने सबसे कम 69642 वोटों से जीत हासिल की थी. नेताओं के वोट शेयर भी ज्यादा थे. परेश रावल को 66.22, शत्रुघ्न सिन्हा को 55.04, हेमा मालिनी को 53.3 और अधिकारी दीपक देव को 50.1 प्रतिशत वोट मिले थे. वहीं मुनमुन सेन को 30 प्रतिशत के आसपास वोट मिले थे.
कैसी रही अटेंडेंस
पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, लोकसभा में सांसदों की औसत उपस्थिति 81 प्रतिशत थी. 10 में से केवल दो अभिनेता-राजनेताओं ने इससे अच्छा प्रदर्शन किया. लोजपा के चिराग पासवान और भाजपा की किरन खेर ने क्रमशः 88 प्रतिशत और 84 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराई. घटल सांसद और बंगाली सुपरस्टार देव की उपस्थिति सबसे कम थी. पांच वर्षों में देव की उपस्थिति केवल 11 प्रतिशत थी. इस कम उपस्थिति के साथ, देव 16वीं लोकसभा में सबसे कम उपस्थिति दर्ज कराने वाले सांसद भी हैं. दूसरी सबसे कम उपस्थिति हेमा मालिनी की 39 प्रतिशत थी.
किसने कितनी डिबेट में भाग लिया
16वीं लोकसभा में एक सांसद के बहस में भाग लेने की औसत संख्या 69 थी. पंजाब के संगरूर से AAP सांसद भगवंत मान ने 10 हस्तियों के बीच सबसे ज्यादा सवाल पूछे. 107 बहसों में भाग लेने के बाद, मान एकमात्र अभिनेता-राजनीतिज्ञ भी थे, जिन्होंने 69 का राष्ट्रीय औसत पार किया. शेष सभी सांसदों की संसदीय बहस में भागीदारी औसत संख्या से कम थी. भाजपा के शत्रुघ्न सिन्हा और बाबुल सुप्रियो ने किसी भी बहस में हिस्सा नहीं लिया. मुनमुन सेन ने केवल एक बहस में भाग लिया जबकि देव ने सिर्फ दो बहसों में भाग लिया. हेमा मालिनी कम उपस्थिति के मामले में दूसरे नंबर पर रहीं फिर भी वह 17 बहसों में भाग लेने में सफल रही. किरन खेर ने 38 बहस में भाग लिया, 17 में चिराग पासवान, आठ में परेश रावल और सात बहसों में स्वर्गीय विनोद खन्ना ने भाग लिया.
किसने कितने सवाल पूछे
सेलिब्रिटी टीवी और ट्विटर पर कई सवाल पूछते हैं, लेकिन संसद में ऐसा नहीं था. पूर्णकालिक सांसद द्वारा पूछे गए सवालों की राष्ट्रीय औसत संख्या 293 थी. केवल किरन खेर ने ही इससे अधिक सवाल पूछे. चंडीगढ़ के सांसद ने कुल 337 सवाल पूछे. सवाल पूछने के मामले में हेमा मालिनी दूसरे नंबर पर रहीं. उन्होंने 210 सवाल पूछे. शत्रुघ्न सिन्हा, बाबुल सुप्रियो, विनोद खन्ना और मुनमुन सेन ने एक भी सवाल नहीं पूछे. अधिकारी दीपक देव ने केवल तीन सवाल पूछे.
बाबुल सुप्रियो को नवंबर 2014 में भारी उद्योग राज्य मंत्री बना दिया गया. पीआरएस मंत्रियों की भागीदारी को रिकॉर्ड नहीं करता है. इस प्रकार, डेटा केवल 1 जून 2014 से 1 अगस्त 2014 तक का है. विनोद खन्ना पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा सीट से चुने गए थे. 27 अप्रैल, 2017 को अभिनेता का निधन हो गया था. सांसद का डेटा 1 जून, 2014 से 27 अप्रैल, 2017 तक का है.
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