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नौकरी से निकाले जा रहे मिडिल मैनेजर करते क्या हैं? क्या उनके जाने से काम चल जाएगा?

कंपनियां कॉस्ट कटिंग और फटाफट फैसले लेने के मकसद से लीडरशिप रोल यानी कंपनी के बड़े स्तर के अधिकारियों और एग्जीक्यूशन टीम (ऐसे लोग जो किसी भी काम को जमीनी स्तर पर पूरा करते हैं) के बीच की परत को कम कर रही हैं.

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मिडिल मैनेजमेंट कई जरूरी कामों को पूरा कराने में अहम रोल निभाते हैं. (फोटो क्रेडिट: Unsplash.com)

हाल ही में दुनियाभर में आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है. इस छंटनी के शिकार होने वालों में ज्यादातर मझोले स्तर (मिडिल मैनेजमेंट) के कर्मचारी हैं. छंटनी की गाज इन्हीं पर गिरी है.  

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि कंपनियां कॉस्ट कटिंग और फटाफट फैसले लेने के मकसद से लीडरशिप रोल यानी कंपनी के बड़े स्तर के अधिकारियों और एग्जीक्यूशन टीम (ऐसे लोग जो किसी भी काम को जमीनी स्तर पर पूरा करते हैं) के बीच की परत को कम कर रही हैं. 

इन दिनों टेक इंडस्ट्री में 'मैनेजमेंट ब्लोट' (यानी जरूरत से ज्यादा मैनेजर) और तेजी से काम करने की क्षमता को लेकर बहस और तेज हो गई है. जैक डोर्सी जैसे बड़े टेक लीडर्स भी अब कम लेयर वाली कंपनियों की वकालत कर रहे हैं, ताकि फैसले जल्दी लिए जा सकें और काम में फुर्ती आए.

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हालांकि, एचआर (ह्यूमन रिसोर्स) एक्सपर्ट्स का कहना है कि मुद्दा मध्य स्तर के मैनेजर्स को हटाने से कहीं ज्यादा उनके महत्व को 'रीस्ट्रक्चर’ करने का है. रणनीति बनाने और उसे एग्जिक्यूशन के बीच स्थित यह स्तर रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान ज्यादा अहम हो जाता है. 

इंटेलॉजर के एचआर डायरेक्टर भरत चंदर उप्राती ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि मिडिल मैनेजर कंपनी में विज़न और काम के बीच की कड़ी होते हैं. लेकिन जब खर्च कम करने का दबाव बढ़ता है, तो सबसे पहले यही पद कम किए जा सकते हैं, क्योंकि ये 'कम जरूरी' लगने लगते हैं. जैसे-जैसे कामकाज के नए मॉडल विकसित हो रहे हैं और कंपनियों के काम करने का तरीका बदल रहा है, वैसे-वैसे वे सिर्फ मिडिल मैनेजमेंट की संख्या ही नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाले असली योगदान (वैल्यू) को भी दोबारा परख रही हैं.

मिडिल मैनेजमेंट हकीकत में क्या है?

मिडिल मैनेजमेंट में कंपनी के शीर्ष नेतृत्व, जैसे कि कंपनी के चीफ एक्सपीरियंस ऑफिसर (CXO), वाइस प्रेसीडेंट (VP) और डायरेक्टर्स और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के बीच वाले कर्मचारियों को रखा जाता है. इस समूह में आमतौर पर डिलीवरी मैनेजर, टीम लीड, प्रोजेक्ट मैनेजर और एग्जीक्यूशन मैनेजर शामिल होते हैं. 

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ये मिडिल मैनेजर किसी भी संगठन में 'जोड़ने वाली कड़ी' की तरह काम करते हैं. जहां सीनियर लीडर्स लंबी अवधि की रणनीति तय करते हैं और जमीनी कर्मचारी अपने-अपने काम पर फोकस करते हैं. वहीं मिडिल मैनेजर इन कामों को जमीनी स्तर पर उतारने और उन्हें सही तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी निभाते हैं.

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मिडिल मैनजमेंट्स छंटनी का शिकार सबसे पहले क्यों बनता है?

भरत चंदर उप्राती का कहना है, “जब कंपनियां लागत कम करती हैं, तो आमतौर पर सबसे पहले इसी स्तर के कर्मचारियों की छंटनी की जाती है. नेतृत्व का मानना ​​है कि बड़े स्तर के अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों की बीच गैप कम होगा तो अतिरिक्त खर्च भी कम होगा. काम को डिलीवर करने में तेजी आएगी.”

कंपनियां कॉस्ट कटिंग के लिए सबसे पहले इन्हें ही चुनती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि मिडिल मैनेजमेंट अक्सर कंपनी के कुल सैलरी बजट का एक बड़ा हिस्सा होते हैं. हालांकि कंपनी की कमाई कैसे होगी ये सोचना इनकी जिम्मेदारी नहीं होती है. कंपनियां उन भूमिकाओं को तरजीह देती हैं जिनका उत्पाद, इंजीनियरिंग या बिक्री उत्पादन पर सीधा प्रभाव पड़ता है. 

हालांकि, जानकार चेताते हैं कि मिडिल मैनेजमेंट को निकालने से फैसले लेने में दिक्कतें आ सकती हैं. कर्मचारियों काम-चोरी कर सकते हैं और जवाबदेही की कमी हो सकती है.

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मिडिल मैनेजमेंट क्या भूमिका निभाता है?

मिडिल मैनेजमेंट कई जरूरी कामों को पूरा कराने में अहम रोल निभाते हैं. भरत चंदर कहते हैं कि इस स्तर के कर्मचारी कंपनी के बड़े अधिकारियों की तरफ बनाई रणनीति को धरातल पर लागू कराने में काफी जिम्मेदार होते हैं. वे टीमों और उनके परफॉर्मेंस की देखरेख भी रखते हैं. टारगेट देने से लेकर कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने और विवादों को सुलझाने तक इनका काफी खास रोल रहता है.

शायद सबसे खास बात यह है कि मिडिल मैनेजमेंट कर्मचारियों के बीच पुल की तरह काम करते हैं. वे रणनीति को निचले स्तर तक पहुंचाते हैं और चुनौतियों को आला अफसरों तक ले जाते हैं. इससे कंपनी के भीतर सामंजस्य बनाए रखने में मदद मिलती है.

क्या यह भूमिका खत्म होने के बजाय विकसित हो रही है?

उद्योग जगत के जानकारों का मानना ​​है कि मिडिल मैनेडमेंट सिस्टम खत्म नहीं हो रहा है, बल्कि विकसित हो रहा है. कंपनियां इस स्तर के मैनेजर्स से अधिक सक्रिय, डेटा-आधारित और परिणाम-केंद्रित होने की अपेक्षा कर रही हैं.

आईटी सेक्टर में छंटनी जारी रहने से मध्य प्रबंधन पर कड़ी नजर बनी रहेगी. हालांकि, बहस अब “क्या हमें मिडिल स्तर के कर्मचारियों की जरूरत है?” से हटकर "हमें किस प्रकार के मिडिल मैनेजर की जरूरत है?" पर आ गई है.

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