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चांदी के आयात पर लगी रोक, कारोबारियों के छूटेंगे पसीने और आपकी जेब पर भी होगा असर!

Silver Import Curbs: चांदी के आयात पर रोक का असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है. आपकी जरूरत की कौन सी चीजें महंगी हो सकती है? इसमें से कुछ तो आपके रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़ी हैं.

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भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा कंज्यूमर है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

सरकार ने 16 मई को चांदी के आयात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी थी. सरकारी आदेश के मुताबिक देश में चांदी आयात करने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना होगा. इससे पहले सिल्वर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% किया गया था. जानकारों का कहना है कि सरकार ने रुपये में गिरावट को थामने और विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए यह कदम उठाया है.

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लेकिन सरकार के इस फैसले से देश में चांदी की सप्लाई में कमी आएगी . इससे आने वाले समय में चांदी के दाम उछल सकते हैं. विदेश से चांदी आयात करने वाली भारत की प्रमुख कंपनी आम्रपाली ग्रुप गुजरात (Amrapali Group Gujarat) के सीईओ चिराग ठक्कर ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि चांदी के आयात पर पाबंदी की वजह से देश में चांदी की सप्लाई घट सकती है. इस फैसले के बाद अभी चांदी का भाव गिरा है लेकिन आने वाले समय में इस धातु के दाम बढ़ सकते हैं.

जानकारों का कहना है कि चांदी ही नहीं इससे बनने वाली चीजों के दाम भी बढ़ने की आशंका है. आपकी जरूरत की कौन सी चीजें महंगी हो सकती है . इस बारे में आगे एक्सपर्ट की मदद से विस्तार से समझेंगे. पहले ये जानते हैं कि भारत में चांदी का कितना व्यापार होता है?

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विदेशों से कितनी चांदी खरीदता है भारत ?

 - न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया में चांदी का सबसे बड़ा कंज्यूमर है. भारत अपनी जरूरत की 80%से ज्यादा चांदी विदेशों से खरीदता है.  

- वित्त वर्ष 2025-2026 में भारत ने चांदी आयात का रिकॉर्ड बनाया. इस दौरान भारत में विदेशों से 12 अरब डॉलर (1 लाख 15 हजार 650 करोड़ रुपये) कीमत की चांदी खरीदी गई. 

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- मात्रा के हिसाब से इस दौरान करीब 7,335 टन चांदी विदेशों से भारत आई. वित्त वर्ष 2024-2025 में भारत ने 4.8 अरब डॉलर कीमत की चांदी विदेशों से खरीदी. रुपये में यह रकम 46 हजार 262 करोड़ रुपये के करीब बैठती है.

भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में चांदी का आयात दोगुने से अधिक बढ़कर करीब 4000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. आमतौर पर भारत हर साल करीब 5,000-7,000 टन चांदी आयात करता है.

किन चीजों में इस्तेमाल होती है चांदी?

भारत मुख्य रूप से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन और चीन जैसे देशों से बड़े पैमाने पर चांदी आयात करता है. घरेलू उत्पादन देश की कुल मांग के मुकाबले काफी कम है. यह चांदी सिर्फ निवेश, सिक्कों, बार या गहनों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका इस्तेमाल कई उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है. चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है. मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी, सेमीकंडक्टर, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB), स्विच, कॉन्टैक्ट्स और 5G नेटवर्क उपकरणों तक में सिल्वर का इस्तेमाल होता है.

इसके अलावा सोलर पैनलों के फोटोवोल्टिक सेल्स में सिल्वर एक अहम घटक है. साथ ही, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) में  में भी चांदी का काफी इस्तेमाल होता है. एंटी-बैक्टीरियल खूबियों के कारण चांदी का इस्तेमाल मेडिकल डिवाइसेज, सर्जिकल उपकरण वगैरा में भी किया जाता है.

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Silver Import Curbs: एक्सपर्ट्स ने बताया, कैसा रहेगा असर 

दिल्ली यूनिवर्सिटी के मातासुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ राठौर लल्लनटॉप से कहते हैं कि अगर भारत में चांदी के आयात पर सख्ती से सप्लाई घटती है और चांदी के दाम बढ़ते हैं, तो इसका असर सिर्फ सर्राफा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा. इसका असर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स, सोलर प्रोजेक्ट्स, EV, मेडिकल उपकरण और कई उत्पादों की लागत बढ़ेगी. इसका बोझ आम लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है.

इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी केजीवी हाइब्रिड ग्रीन मोबिलिटी के एमडी उत्तम सिंघल ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि चांदी के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती से इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंडस्ट्री की लागत बढ़ सकती है. चूंकि सिल्वर का इस्तेमाल EVs के इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट्स, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और कई हाई-परफॉर्मेंस कंपोनेंट्स में होता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर सीधा दबाव पड़ सकता है. 

ऐसे में वाहन निर्माताओं को बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए ईवी की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है, सिल्वर सप्लाई पर असर और कीमतों में तेजी इंडस्ट्री के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है.

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