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पहले से अप्रूव्ड लोन लेने जा रहे हैं? ये काम की जानकारी मुसीबत से बचा लेगी

आजकल बैंक और कई फिनटेक कंपनियां प्री-अप्रूव्ड लोन के नाम पर मिनटों में पैसे (लोन) देने का दावा करती हैं, लेकिन यह सुविधा कई बार कर्ज का जाल साबित हो सकती है.

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10 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 09:01 PM IST)
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कई बार कर्ज का जाल महंगा साबित हो जाता है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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क्या आपको भी 'प्री-अप्रूव्ड लोन' का कॉल या मैसेज आया है? कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये का लोन ऑफर, वह भी बिना किसी कागजी कार्रवाई के. लेकिन इस आसान दिखने वाले ऑफर के पीछे एक बड़ा खतरा छिपा हो सकता है. आजकल बैंक और कई फिनटेक कंपनियां प्री-अप्रूव्ड लोन के नाम पर मिनटों में पैसे (लोन) देने का दावा करती हैं, लेकिन यह सुविधा कई बार कर्ज का जाल साबित हो सकती है.

प्री अप्रूव्ड लोन क्या है?

प्री-अप्रूव्ड लोन वह लोन होता है जिसे बैंक बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के आपको लोन मंजूर कर देते हैं. ये लोन आपके क्रेडिट स्कोर (CIBIL), आय और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखकर मंजूर हो जाता है. आमतौर पर बैंक आपको ई मेल या फोन के जरिये बताते हैं कि आप इतने-इतने लाख रुपये के लोन पात्र हैं. इसके लिए आपको बहुत कागज-पत्तर जमा कराने की जरूरत नहीं हैं. आपके खाते में जल्दी ही पैसा आ जाएगा. जैसे ही आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, पैसा आपके खाते में आ जाता है.

प्री-अप्रूव्ड लोन हमेशा अच्छा विकल्प क्यों नहीं?

हो सकता है प्री-अप्रूव्ड शब्द सुनते आपको लगता होगा कि बैंक आपको कोई खास और सस्ता ऑफर दे रहा है. लेकिन हमेशा ये सच नहीं होता है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट बताती है कि प्री-अप्रूव्ड लोन का मतलब सिर्फ इतना होता है कि आप बैंक के उधार देने की शर्तों में फिट बैठते हैं. इसका मतलब हुआ कि आपका क्रेडिट स्कोर, इनकम और ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड ठीक है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर आप थोड़ा सा समय निकालकर तुलना करेंगे तो आपको दूसरे बैंकों से इससे कम ब्याज दरों पर लोन मिल सकता है.

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बिना जरूरत के लोन तो नहीं ले रहे?

बैंकिंग एक्सपर्ट अश्विनी राणा लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं, "प्री-अप्रूव्ड होने की वजह से कई लोग जरूरत न होने या जरूरत से ज्यादा उधार लेने के लिए प्रेरित कर सकती है. जब पैसे आसानी से मिल रहे होते हैं, तो अक्सर लोग अपनी वास्तविक क्षमता का सही आकलन नहीं कर पाते और ज्यादा लोन ले लेते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि बाद में हर महीने जाने वाली लोन की किस्त (EMI) का बोझ बढ़ जाता है. धीरे-धीरे यह आपके लिए आर्थिक बोझ का कारण बन सकती है."

हिडेन चार्जेज और शर्तें

मिंट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि कई बैंकों के प्री अप्रूव्ड लोन में वास्तविक नियम और शर्तें आपको फोन कॉल या ईमेल में बताई गई शर्तों से अलग होती हैं. कई बार बैंक अपने मार्केटिंग विज्ञापनों में दरें कम बताते हैं. उदाहरण के लिए किसी विज्ञापन में दावा किया जा सकता है कि उनके पर्सनल लोन की ब्याज दरें 10% से शुरू होती हैं, लेकिन जब आप लोन के लिए आवेदन करते हैं और लोन अप्रूव्ड हो जाता है तो ब्याज दरें बढ़ जाती हैं.

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प्रोसेसिंग फीस के नाम पर मनमानी चार्ज

प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य चार्जेज़ को समझना भी बेहद जरूरी है. मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक कई बार ऐसे लोन में प्रोसेसिंग फीस, प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज यानी समय से पहले लोन बंद करना जैसे चार्ज शामिल होते हैं, जिन पर लोग ध्यान नहीं देते. उदाहरण के तौर पर, लोन लेते ही एक तय परसेंट प्रोसेसिंग फीस के रूप में काट लिया जाता है. अगर आप लोन को समय से पहले चुकाना चाहते हैं, तो बैंक आपसे प्री-पेमेंट पेनल्टी भी ले सकता है.

इसके अलावा, कुछ मामलों में लेट पेमेंट फीस, जीएसटी और अन्य चार्ज भी जुड़ जाते हैं. इसलिए, किसी भी प्री-अप्रूव्ड लोन को फाइनल करने से पहले उसके सभी नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है. वर्ना बाद में इस तरह का लोन महंगा सौदा साबित हो सकता है.

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