दुनिया की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक ओरेकल (Oracle) ने अपने 30 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है. इनमें 12 हजार कर्मचारी भारत के हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छंटनी की सूचना सुबह 5-6 बजे इन कर्मचारियों के ईमेल पर दी गई. ये सब कुछ अचानक और फटाफट हुआ. कंपनी की तरफ से कर्मचारियों को किसी तरह की सूचना नहीं दी गई कि छंटनी होने वाली. लेकिन ओरेकल इकलौती कंपनी नहीं है जिसने चुपके-चुपके अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है. अब ये एक ट्रेंड बन चुका है.
कैसे पता चले नौकरी जा सकती है? कंपनी के इन 'इशारों' को समझें
अब छंटनी खुलेआम नहीं बल्कि चुपचाप हो रही है. कर्मचारी उन शुरुआती संकेतों को समझ नहीं पाते जो उनकी नौकरी जाने की आशंका दिखाते हैं. छंटनी की भूमिका तो बहुत पहले से ही बननी शुरू हो जाती है, बस इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं होती.


इंडिया टुडे की एक खबर के मुताबिक ज्यादातर कंपनियों में अब छंटनी खुलेआम नहीं बल्कि चुपचाप हो रही है. कर्मचारी उन शुरुआती संकेतों को समझ नहीं पाते जो उनकी नौकरी जाने की आशंका दिखाते हैं. रिपोर्ट बताती है कि ऐसा बेहद कम होता है कि जिस दिन किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाना हो और उसी दिन अचानक से छंटनी का ईमेल आया हो. छंटनी की भूमिका तो बहुत पहले से ही बननी शुरू हो जाती है, बस इसकी कोई औपचारिक घोषणा नहीं होती.
आइए जानते हैं कि वे कौन से संकेत हैं जिनसे पता चलता है कि नौकरी जाने वाली है. अगर कोई कंपनी नई भर्ती रोक देती है तो ये पहला संकेत है कि आने वाले वक्त में कंपनी छंटनी कर सकती है. इस तरह की कंपनी में पद खाली रहते हैं लेकिन भर्ती नहीं की जाती. टीमों को ‘उपलब्ध संसाधनों से काम चलाने’ के लिए कहा जाता है.
फिर इस तरह की कंपनियों में काम धीमा पड़ जाता है या बंद हो जाता है. मीटिंग्स कैंसिल होने लगती हैं. कंपनी की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं. जिस कंपनी में छंटनी होनी वाली होती है वहां अगर दो लोग एक जैसा काम कर रहे हैं, तो उनमें से एक की भूमिका पर पहले से ही सवाल उठाए जाते हैं. बहुत से लोग इस तरह के छोटे-छोटे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं. संभावित छंटनी वाली कंपनियों में अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की वन टू वन मीटिंग्स घट जाती हैं.
हालांकि जरूरी नहीं है कि हर बार यही बातें लागू हों. लेकिन मोटा मोटी यही संकेत दिखते हैं. ये संकेत कॉस्ट कटिंग के क्रम में अक्सर शुरुआत में ही दिखाई देने लगते हैं.
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इंडिया टुडे की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि कई कंपनियां बिना बताए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं. कांट्रैक्ट्स को रिन्यू नहीं किया जा रहा है. नई टीमें चुपचाप बनाई जा रही हैं. कर्मचारी के कामकाज का सख्त रिव्यू किया जा रहा है. कुछ कर्मचारियों को छंटनी की घोषणा किए बिना ही बाहर निकाल दिया जा रहा है.
कई लोग इसे ‘अदृश्य छंटनी’ (इनविजिबल लेऑफ) कह रहे हैं. इनविजिबल लेऑफ में कंपनियां बिना बड़ी घोषणा किए चुपचाप धीरे-धीरे कर्मचारियों की संख्या कम कर रही हैं. पिछले तीन महीनों में कई टेक और ई कॉमर्स कंपनियों, मसलन ऐमजॉन, मेटा और डेल वगैरा ने कुल मिलाकर 94 हजार से ज्यादा लोगों को ‘बाहर का रास्ता’ दिखाया है.
अदृश्य छंटनी के कुछ और संकेत हैं. इस तरह की छंटनी सुर्खियों में तो नहीं दिखतीं, लेकिन छोटे-छोटे तरीकों से जरूर दिखाई पड़ती हैं. जैसे किसी सहकर्मी का चले जाना. उसकी जगह और कोई भर्ती न करना. किसी प्रोजेक्ट को बिना किसी सफाई दिए बंद कर देना. इसके अलावा किसी टीम का महीनों में धीरे-धीरे छोटा होते जाना. यही कारण है कि आधिकारिक तौर पर छंटनी के आंकड़े अक्सर जमीनी स्तर पर लोगों द्वारा अनुभव किए जाने वाले आंकड़ों से कम प्रतीत होते हैं.
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कौन सी नौकरी सबसे सुरक्षित?इस समय सभी नौकरियों पर एक जैसा खतरा नहीं है. रेवेन्यू या मेन टेक्नोलॉजी से सीधे जुड़े पद अधिक सुरक्षित होते हैं. एआई और बुनियादी ढांचे आदि से जुड़े क्षेत्रों में अभी भी निवेश हो रहा है. इस वजह से नई नौकरियों के मौके भी बढ़ रहे हैं.
छंटनी तो हमेशा से होती रही है. लेकिन अभी दिक्कत वाली बात ये है कि कंपनियां चुपके से ये कदम उठा रही हैं. अब तक छंटनी से पहले इसके स्पष्ट संकेत मिलते थे. आमतौर पर छंटनी से पहले सबको पता चल जाता था कि छंटनी होने वाली है. लेकिन अब नौकरी से निकालने का फरमान फटाफट लिया जा रहा है. इस तरह के फैसले कंपनी के बड़े अधिकारी सीधे ले रहे हैं.
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