भारत के पास कितना तेल बचा है, आज इंपोर्ट बंद हो जाए तो कितने दिन चलेगा?
इंडिया टुडे ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से एक आरटीआई के जरिये यह जानकारी मांगी थी. वहीं, पश्चिम एशिया में जारी यु्द्ध के बीच मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है

आयात में किसी भी तरह की रुकावट आने पर भारत का रणनीतिक कच्चे तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) सिर्फ करीब 9.5 दिनों की जरूरत को ही पूरा कर सकता है. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इंडिया टुडे ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से एक आरटीआई के जरिये यह जानकारी मांगी थी. उसी आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी गई है.
स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व क्या है?स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व में भविष्य में किसी भी आपात स्थितियों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक रखा जाता है. एक तरह से यह देश का इमरजेंसी ऑयल बैंक होता है. मान लीजिए भारत की किसी दूसरे देश के साथ या तेल सप्लाई में किसी तरह की दिक्कत आ जाये तो इस तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है. RTI के जवाब में कहा गया कि रणनीतिक पेट्रोलियम कार्यक्रम को पहली बार 7 जनवरी, 2004 को मंजूरी दी गई थी और इसे लागू करने के लिए 16 जून, 2004 को इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPR) की स्थापना की गई थी.
फिलहाल भारत में तीन स्थानों जैसे कि विशाखापत्तनम (13 लाख 30 हजार टन), मंगलुरु (15 लाख टन) और पडूर (25 लाख टन ) को मिलाकर कुल 53 लाख 30 हजार मीट्रिक टन की रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण की कैपेसिटी है. राज्यसभा में 23 मार्च 2026 को दिए गए एक जवाब में सरकार ने कहा, ‘इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड के पास करीब 33 लाख 72 हजार टन कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है. यह भारत की कुल तेल भंडारण क्षमता का लगभग 64% है.’
इसमें आगे कहा गया कि तेल भंडार के आंकड़े ऊपर नीचे होते रहते हैं. यह तेल भंडार और खपत पर निर्भर करता है. आरटीआई के जवाब से यह भी साफ किया गया है कि जुलाई 2021 में सरकार ने देश के रणनीतिक तेल भंडार नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दी थी. इसके तहत दो अतिरिक्त तेल भंडार से जुड़ी योजनाएं बनाई गई हैं. पहला चंडीखोल (ओडिशा) में 40 लाख टन क्षमता वाला संयंत्र और पडूर (कर्नाटक) में 25 लाख टन क्षमता वाला संयंत्र तैयार हो रहा है.
इस तरह कुल प्रस्तावित विस्तार 65 लाख टन का होगा. इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा.
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रिलायंस ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदापश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है. इस मामले से परिचित तीन सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रायटर्स को 24 मार्च को यह जानकारी दी. अमेरिकी प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटाने के कुछ दिनों बाद यह तेल खरीद हुई है. इनमें से दो सूत्रों ने बताया कि रिलायंस ने नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से तेल खरीदा है. हालांकि रिलायंस ने इस बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है और न ही न्यूज एजेंसी से खबर की पुष्टि की है.
एक सूत्र ने बताया कि कच्चे तेल की कीमत आईईसी ब्रेंट वायदा की तुलना में लगभग 7 डॉलर प्रति बैरल अधिक थी. तेल की डिलीवरी कब होगी, यह अभी साफ नहीं है. हाल के दिनों में ईरान के तेल सबसे बड़ा खरीदार चीन रहा है. वहां की तेल कंपनियां ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रही हैं. ट्रंप प्रशासन ने बीते शुक्रवार को ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी. यह छूट 20 मार्च या उससे पहले किसी भी जहाज पर लोड किए गए और 19 अप्रैल तक उतारे गए तेल पर लागू होती है.
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