सरकारी बैंक IDBI बैंक के शेयर सोमवार 16 मार्च को करीब 15% तक लुढ़क कर 78.42 रुपये पर पर आ गए. यह 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर के आसपास है. पिछले साल मार्च में IDBI बैंक का शेयर 71.90 रुपये तक लुढ़क गया था.
सरकार के एक फैसले ने इस बैंक के शेयर 'धड़ाम' कर दिए
मई 2021 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने आईडीबीआई बैंक में हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया था
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केंद्र सरकार ने इस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए वित्तीय बोलियां मंगाई थीं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी के चलते बैंक के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है. लेकिन संस्थानों की तरफ से बैंक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए जो बोलियां लगाई गई हैं वे सरकार की तरफ से तय किए गए न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) से कम हैं. सूत्रों ने ईटी से कहा कि अगर केंद्र सरकार इस बिक्री को आगे बढ़ाने का फैसला करती है, तो उसे बोली लगाने की पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ सकती है.
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रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार की तरफ प्रेम वात्सा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल और एमिरेट्स एनबीडी ने कथित तौर पर इसके लिए वित्तीय बोलियां जमा की थीं. फरवरी में, कोटक महिंद्रा बैंक ने जानकारी दी थी कि उसने IDBI बैंक में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बोली नहीं लगाई है.
सरकार बेच रही कितनी हिस्सेदारी?मई 2021 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स ने IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया था. बाद में, सरकार और जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने IDBI बैंक में 30% से अधिक हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया था.
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि शुक्रवार (13 मार्च) को बैंक शेयर के बंद भाव के हिसाब से IDBI बैंक में 30.48% हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को लगभग 30,215 करोड़ रुपये मिल सकते थे. IDBI बैंक की तरफ से वित्तीय बोलियां फिलहाल रद्द होने से सरकार को चालू वित्त वर्ष ( वित्त वर्ष 2026-2027) में अपने विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने में मुश्किलें आ सकती है. केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के जरिये 80 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है.
उधर, सरकार द्वारा IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने का लंबे समय से विरोध कर रही ऑल-इंडिया IDBI ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIIDBIOA) के प्रेसीडेंट सौरव कुमार ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा, “सरकार की तरफ से वित्तीय बोलियां रद्द करने का फैसला स्वागतयोग्य कदम है. यह ट्रेड यूनियनों की एकता की एक महत्वपूर्ण जीत है. हालांकि, उन्होंने आगे कि हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक भारत सरकार संसद में किए गए अपने वादे के मुताबिक IDBI Bank में खुद की (एलआईसी के अलावा) 51% हिस्सेदारी फिर से बहाल नहीं कर देती." केंद्र सरकार और एलआईसी की IDBI बैंक में 94% से अधिक हिस्सेदारी है. केंद्र सरकार के पास IDBI बैंक की 45.48% और एलआईसी के पास 49.24% हिस्सेदारी है. बैंक यूनियनों की मांग है कि सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी कंट्रोलिंग हिस्सेदारी (51 परसेंट) फिर से बहाल करे.
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