अगर आने वाले दिनों में आपकी पसंदीदा स्कॉच व्हिस्की पहले से सस्ती मिले, लंदन की लग्जरी कार खरीदना थोड़ा आसान हो जाए या बच्चों के चॉकलेट और बिस्किट की कीमतों में राहत दिखने लगे, तो हैरान मत होइएगा. इसकी वजह है भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लागू हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA), जिसे 15 जुलाई 2026 से अमल में लाया गया है.
स्कॉच सस्ती, डेयरी पर तलवार! भारत-UK FTA के बाद मार्केट में दिखेगा ये बड़ा बदलाव, पूरी लिस्ट देखें
India-UK Free Trade Agreement लागू होने के बाद आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? क्या स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारें और ब्रिटिश सामान सस्ते होंगे, छात्रों और नौकरीपेशा लोगों को क्या फायदा मिलेगा, और किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता? पढ़िए पूरी रिपोर्ट.


पिछले महीने G 7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर ने जिस ऐतिहासिक व्यापार समझौते का ऐलान किया था, अब वह जमीन पर उतर चुका है. यह सिर्फ दो देशों के बीच कारोबार बढ़ाने वाली डील नहीं है, बल्कि आपकी जेब, आपकी खरीदारी और यहां तक कि नौकरी के नए अवसरों पर भी असर डाल सकती है.
अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर India-UK Free Trade Agreement से क्या क्या सस्ता होगा? किन भारतीय कारोबारों को फायदा मिलेगा? क्या इससे नई नौकरियां पैदा होंगी? और सबसे अहम, आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में इसका असर आखिर कितना दिखाई देगा?
India UK FTA: क्या होगा सस्ता, क्या बढ़ेगी चुनौती?
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे बड़ा असर आयात शुल्क यानी टैरिफ पर पड़ने वाला है. वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने सैकड़ों उत्पादों पर टैक्स घटाने या खत्म करने पर सहमति बनाई है. इसका सीधा मतलब है कि ब्रिटेन से भारत आने वाले कई सामान पहले के मुकाबले कम कीमत पर मिल सकते हैं. हालांकि, हर कहानी का दूसरा पहलू भी होता है. कुछ भारतीय उद्योगों के लिए यही समझौता मुश्किलें भी बढ़ा सकता है.
क्या होगा सस्ता?अगर आप स्कॉच व्हिस्की या प्रीमियम वाइन के शौकीन हैं तो आने वाले समय में राहत मिल सकती है. इन उत्पादों पर आयात शुल्क कम होने से उनकी कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है. यही नहीं, ब्रिटेन में बनने वाली कई लग्जरी कारें, प्रीमियम चॉकलेट, बिस्किट और दूसरे चुनिंदा फूड प्रोडक्ट भी भारतीय बाजार में पहले से सस्ते हो सकते हैं. यानी जो विदेशी ब्रांड अब तक जेब पर भारी पड़ते थे, वे अब अपेक्षाकृत आसान कीमत पर मिल सकते हैं.
किसके लिए बढ़ेगी चुनौती?हर व्यापार समझौते की तरह इस डील के भी कुछ विजेता होंगे तो कुछ सेक्टरों की परीक्षा भी होगी. सबसे ज्यादा चिंता डेयरी उद्योग को लेकर जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन से आने वाले डेयरी उत्पादों पर शुल्क घटने से भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. इसका दबाव खास तौर पर छोटे डेयरी कारोबारियों और कुछ कृषि उत्पादों से जुड़े व्यवसायों पर पड़ने की आशंका है, जिन्हें विदेशी उत्पादों के मुकाबले अपनी कीमत और गुणवत्ता दोनों पर अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है.
व्यापारियों की जमीनी हकीकत: कपड़ा और आईटी सेक्टर
नोएडा और मुंबई के एक्सपोर्ट हब्स में इस डील को लेकर उत्साह और सावधानी का मिला-जुला माहौल है. भारतीय कपड़ा निर्यातकों को अब यूके के बाजार में बिना किसी भारी शुल्क के अपना माल बेचने का मौका मिलेगा. मुंबई के गारमेंट एक्सपोर्टर विपिन रघुवंशी ने लल्लनटॉप को बताया कि
"यूके में भारतीय कपड़ों की मांग पहले से थी, लेकिन भारी टैक्स के कारण हमारा माल वहां महंगा हो जाता था. अब हमें वहां के रिटेलर्स से बेहतर दाम मिल सकेंगे."
दूसरी ओर, आईटी सेक्टर के लिए ये डील एक बड़ा बूस्ट है. यूके की कंपनियां अब भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और डेटा एनालिस्ट्स को हायर करना आसान महसूस करेंगी. नैसकॉम के डेटा बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में यूके की डिजिटल इकॉनमी में भारतीय टैलेंट की मांग 20% तक बढ़ी है, जो इस एग्रीमेंट के बाद और तेज होगी.
UK वीजा और वर्क परमिट: भारतीयों के लिए क्या बदलेगा?
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का असर सिर्फ सामान की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा. अगर आप यूके में पढ़ाई करने का सपना देखते हैं, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हैं या नौकरी के लिए ब्रिटेन जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह समझौता आपके लिए भी अच्छी खबर लेकर आया है.
यूके होम ऑफिस की इमिग्रेशन अपडेट के मुताबिक, इस एफटीए के तहत प्रोफेशनल्स की आवाजाही से जुड़े नियमों को पहले के मुकाबले ज्यादा आसान बनाया गया है. खास तौर पर 'इंटर कंपनी ट्रांसफर' रूट से ब्रिटेन जाने वाले भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और दूसरे विशेषज्ञ कर्मचारियों के लिए प्रक्रिया अब अधिक तेज और सरल होने की उम्मीद है.
वहीं, भारतीय छात्रों के लिए भी राहत की खबर है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पोस्ट स्टडी वर्क वीजा से जुड़े कुछ प्रावधानों को अधिक अनुकूल बनाया गया है, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें ब्रिटेन में नौकरी तलाशने और वहां की वर्कफोर्स का हिस्सा बनने का बेहतर मौका मिल सके. यानी यह समझौता सिर्फ व्यापार नहीं बढ़ाएगा, बल्कि पढ़ाई और करियर के नए रास्ते भी खोल सकता है.
डेयरी और किसानों की चिंता: क्या वाकई खतरा इतना बड़ा है?
भारत और ब्रिटेन के बीच हुई इस महाडील का सबसे ज्यादा असर जिस सेक्टर पर नजर रखी जा रही है, वह है डेयरी. आशंका है कि अगर ब्रिटेन से आने वाले हाई क्वालिटी डेयरी उत्पाद कम शुल्क पर भारतीय बाजार में पहुंचने लगे, तो छोटे डेयरी कारोबारियों और कुछ किसान उत्पादक समूहों के सामने कड़ी प्रतिस्पर्धा खड़ी हो सकती है. सवाल सिर्फ कीमत का नहीं होगा, बल्कि गुणवत्ता और बाजार हिस्सेदारी की लड़ाई का भी होगा.
हालांकि, सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है. भारत ने कई संवेदनशील डेयरी उत्पादों को 'सेंसिटिव लिस्ट' में रखा है, यानी उन पर शुल्क में बड़ी छूट नहीं दी गई है. सरकार का दावा है कि इससे घरेलू डेयरी उद्योग के हित सुरक्षित रहेंगे.
अब असली परीक्षा बाजार में होगी. आने वाले कुछ महीनों में यह साफ होगा कि यह समझौता भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सस्ते सामान की सौगात बनता है या फिर कुछ घरेलू उद्योगों के लिए नई चुनौती लेकर आता है. फिलहाल इतना तय है कि भारत और ब्रिटेन की यह ट्रेड डील सिर्फ दो देशों के कारोबार की कहानी नहीं है, बल्कि इसका असर आपकी जेब, बाजार और रोजगार तक महसूस किया जाएगा.
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