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IDFC First Bank में सब 'दुरुस्त' था तो 590 करोड़ का 'फ्रॉड' कैसे हो गया?

IDFC First Bank ने बताया है कि मूलधन और ब्याज सहित 583 करोड़ रुपये बन रहे थे. बैंक से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी बता चुके हैं कि धोखाधड़ी कर सरकारी खातों से निकाली गई पूरी राशि 24 घंटे के भीतर वसूल कर ली गई है. लेकिन सवाल ये है कि इस पूरे फ्रॉड को अंजाम कैसे दिया गया?

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हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी भी बता चुके हैं कि फ्रॉड वाली पूरी राशि 24 घंटे के भीतर वसूल कर ली गई थी (फोटो क्रेडिट: India Today)

IDFC First Bank ने चंडीगढ़ ब्रांच में हुए फ्रॉड केस में हरियाणा सरकार को पूरी राशि वापस कर दी है. 24 फरवरी को यह जानकारी खुद बैंक ने दी. IDFC बैंक का कहना है कि अपने वादे के मुताबिक उसने हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को पूरी रकम लौटा दी है.

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इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक बैंक ने बताया है कि मूलधन और ब्याज सहित 583 करोड़ रुपये बन रहे थे. बैंक से पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी बता चुके हैं कि धोखाधड़ी कर सरकारी खातों से निकाली गई पूरी राशि 24 घंटे के भीतर वसूल कर ली गई है. लेकिन सवाल ये है कि इस पूरे फ्रॉड को अंजाम कैसे दिया गया?

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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि IDFC फर्स्ट बैंक में हुई इस धोखाधड़ी की शुरुआत एक सरकारी विभाग की तरफ से अपना खाता बंद करने के अनुरोध से हुई. इसमें विभाग ने बैंक की चंडीगढ़ शाखा में अपना खाता बंद करने और उसमें जमा रकम ट्रांसफर करने को कहा था. दोनों पक्षों के खातों में दर्ज रकम मेल नहीं खा रही थी. इस अंतर से ही इस धोखाधड़ी का पर्दाफाश हुआ.

जैसे ही इस धोखाधड़ी के बारे में हरियाणा सरकार को मालूम हुआ उसने तत्काल प्रभाव से बैंक को अपने लिस्टेड बैंकरों की सूची से हटा दिया. ब्रोकरेज फर्म एक्सिस सिक्योरिटीज ने इस मामले का विश्लेषण किया है. इसमें बताया गया है कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ शाखा के सरकारी खातों से जुड़ी प्रतीत होती है. कंपनी ने इस मामले को साइबर हमले या सिस्टम में सेंधमारी के बजाय ‘चेक से जुड़ी कामकाजी चूक’ बताया है.

सब दुरुस्त था फिर भी 'खेल' हो गया

एक्सिस सिक्योरिटीज का कहना है, "यह समस्या सिर्फ कुछ खास खातों तक ही सीमित है. हरियाणा सरकार के अलावा किसी दूसरे ग्राहक या बैंक की ब्रांच तक नहीं फैली है. बैंक की ये गलती पहली बार 18 फरवरी को पता चली.” बैंक ने शुरू में इस धोखाधड़ी की लागत 490 करोड़ रुपये आंकी. लेकिन खातों की जांच के बाद करीब और 100 करोड़ रुपये के फ्रॉड का पता चला. 

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हालांकि, IDFC फर्स्ट बैंक का दावा है कि उसकी सब तरह की व्यवस्था दुरुस्त थी, जैसे रेगुलर कंट्रोल सिस्टम, मेकर-चेकर अप्रूवल्स. बैंक बैलेंस के बारे में सरकार को नियमित मैसेज भेजे जा रहे थे. मेकर-चेकर अप्रूवल्स बैकिंग से जुड़ी एक प्रक्रिया है. यह बैंकों में गड़बड़ी या किसी तरह की धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाई जाती है. यहां मेकर वह कर्मचारी है जो किसी लेन-देन की एंट्री करता है, जबकि चेकर दूसरा कर्मचारी जो उस लेनदेन को जांचता है और मंजूरी देता है. इसके बावजूद, इस धोखाधड़ी के बारे में किसी का ध्यान नहीं गया.

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के हवाले से बताया गया है कि उसकी चंडीगढ़ शाखा के कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में अनधिकृत लेनदेन किए. इस वजह से लगभग 590 करोड़ रुपये की जमा राशि में गड़बड़ी हुई.

रिपोर्ट में बताया गया है कि बैंक की तरफ से हुई शुरुआती जांच से पता चला कि ये गड़बड़ियां सिर्फ हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों तक सीमित थीं.

इस बारे में लल्लनटॉप से बातचीत में बैकिंग एक्सपर्ट अश्विनी राणा ने कहा कि अभी तक जो बातें निकलकर आ रही हैं उससे पता चलता है कि हरियाणा सरकार के विभागों का जो पैसा इस बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में जमा था, उस पैसे को वहां के कर्मचारियों ने डायवर्ट किया. हालांकि यह जांच में साफ पता चलेगा कि ये पैसा कहां गया . ये भी पता चलेगा कि इसमें सिर्फ बैंक के कर्मचारी शामिल थे या अन्य लोगों की भी मिलीभगत थी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट बताती है कि इस घटना के बाद, बैंक ने इस पूरे 'खेल' में शामिल कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है. चार से पांच हफ्ते तक चलने वाले फोरेंसिक ऑडिट करने के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. इसके अलावा IDFC बैंक ने उन बैंकों से भी संपर्क किया है जिनके संदिग्ध खातों में फ्रॉड की राशि भेजी गई थी, ताकि उसे फ्रीज किया जा सके.

बैंक अब AI की मदद लेगा

इस प्रकरण के बाद बैंक अब चेक प्रोसेसिंग और बड़ी रकम के लेन-देन पर और सख्त निगरानी रखने की तैयारी कर रहा है. बैंक की योजना एआई-आधारित जांच प्रणाली को लागू करने की है ताकि चेक और ब्रांच से शुरू होने वाले दूसरे लेन-देन पहले सिस्टम से जांचे जाएं और उसके बाद ही मैन्युअल सिग्नेचर की जांच हो. साथ ही बैंक कुछ बड़ी रकम की निकासी पर ग्राहक से जरूरी पुष्टि लेने की व्यवस्था भी बना रहा है. अब लेन-देन तभी पूरा होगा, जब ग्राहक ऑटोमैटिक अलर्ट का जवाब देगा.

कितना बड़ा आर्थिक नुकसान है?

आर्थिक नजरिये से देखें तो 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड काफी बड़ा है. लेकिन बैंक ने इसकी भरपाई कर दी है. और ये बैंक की आर्थिक स्थिति को हिलाने वाला नहीं है. हरियाणा से आने वाली जमा राशि बैंक की कुल जमा का करीब आधा पर्सेंट ही है. कुल जमा में अब भी राज्य सरकारों, केंद्र सरकार और पीएसयू (सरकारी उपक्रम) की जमा राशि मिलाकर लगभग 8-10% हिस्सा है. 

हरियाणा सरकार के अलावा अभी तक किसी अन्य राज्य ने इस तरह के किसी भी धोखाधड़ी की शिकायत नहीं दर्ज कराई है और न ही चिंता जताई है. बैंक के पास 35 करोड़ रुपये का बीमा कवर भी है. 

सबसे बड़ा असर मुनाफे पर पड़ेगा. अगर बैंक मार्च तिमाही में पूरे 590 करोड़ रुपये के नुकसान को दर्ज करने का विकल्प चुनता है, तो इससे वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए उसकी कमाई में करीब 28% की कमी आ सकती है.

एक्सिस सिक्योरिटीज ने वित्त वर्ष 2025-2026 के लिए IDFC बैंक के प्रॉफिट अनुमान में 23% की कटौती की है. इसके बावजूद, वित्त वर्ष 2026-2027 और वित्त वर्ष 2027-2028 के लिए बैंक की कमाई से जुड़े अनुमानों में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया है. इसकी वजह ये है कि बैंक के मेन बिजनेस में लगातार सुधार हो रहा है. बैंक के प्रमुख कामकाज के प्रदर्शन में मजबूती आई है. ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि यह आगे भी जारी रहेगी.

IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरों का क्या हाल है?

एक्सिस ने अपनी बाय रेटिंग (कंपनी के शेयरों की खरीदने की सलाह) बरकरार रखी है. लेकिन टारगेट प्राइस 101 रुपये से घटाकर 87 रुपये कर दिया है. इसका मतलब ये कि पहले ब्रोकरेज फर्म का अनुमान था कि कंपनी के शेयर का भाव 101 रुपये तक चढ़ सकता है, जबकि अब 87 रुपये तक जाने का अनुमान है.

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