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GDP में RBI के अनुमान से भी बड़ा उछाल, सरकार का GST कार्ड काम कर गया

28 नवंबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP, यानी ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट, बढ़कर 8.2% पर पहुंच गई.

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जीडीपी प्रतीकात्मक इमेज (फोटो क्रेडिट: Business Today)

भारत की आर्थिक विकास दर में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है. शुक्रवार, 28 नवंबर को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में GDP बढ़कर 8.2% पर पहुंच गई. पिछले साल की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2024) में आर्थिक विकास दर 5.6% रही थी. मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के आंकड़े पिछली 6 तिमाहियों में सबसे ज्यादा है.

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GDP में उछाल की वजहें

इतना ही नहीं, ताजा GDP दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से भी ज्यादा है. आरबीआई ने दूसरी तिमाही में आर्थिक विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. वहीं चालू वित्त (1 अप्रैल 2025) से 30 जून की पहली तिमाही के दौरान आर्थिक विकास दर 7.8% रही थी.

अब आर्थिक ग्रोथ बढ़ने के कारण जान लेते हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों के हवाले से बताया गया है कि GST रेट्स में बदलाव की वजह से खपत (Consumption) बढ़ी है. इसी के चलते आर्थिक विकास दर बढ़ी है. आप जानते ही हैं कि केन्द्र सरकार ने GST के स्लैब्स घटाकर सिर्फ दो कर दिये हैं. अब 5%और 18% दो ही GST स्लैब्स हैं. इसके चलते कई खाने-पीने की चीजों के दाम घटे हैं. 

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GST की दरें 22 सितंबर से लागू हो चुकी हैं. जरूरत की चीजों के दाम काम होने की वजह से लोगों ने रोजमर्रा खरीद बढ़ाई है. निजी खपत का GDP में करीब 60% योगदान है.

इकोनॉमिक टाइम्स ने रिसर्च फर्म Numerator के हवाले से जानकारी दी थी कि दूसरी तिमाही में GST दरों में कटौती से पहले से ही खाने-पीने और किराने के सामान की मांग बढ़ गई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि देश की सभी प्रमुख फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों की बिक्री बढ़ी है. इस तरह से देखें तो GDP में तेजी का सबसे बड़ा कारण खपत रही है.

लल्लनटॉप ने दिल्ली विश्वविद्यालय के माता सुंदरी कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर सिद्धार्थ राठौर से विकास दर में उछाल को बात की. उन्होंने कहा, "मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के शानदार प्रदर्शन के चलते दूसरी तिमाही में आर्थिक ग्रोथ में उछाल देखने को मिली है. सरकार ने पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाया है. इसके अलावा सर्विस सेक्टर, जैसे कि ट्रेड, ट्रांसपोर्ट, फाइनेंस और रियल एस्टेट ने बढ़िया प्रदर्शन किया है. त्योहारों के दौरान शहरी और ग्रामीण इलाकों में निजी खपत बढ़ने से आर्थिक विकास दर में तेजी आई है." 

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बता दें कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुमान जताया था कि GST में बदलाव से आम लोगों के हाथों में 2 लाख करोड़ रुपये आएंगे. इससे विवेकाधीन खर्च बढ़ने की संभावना है. विवेकाधीन वह खर्च होता है जिसे कोई आदमी अपनी इच्छा के मुताबिक करता है, न कि जरूरत पड़ने पर. इसका मतलब ये हुआ कि रोजमर्रा की ज़रूरी, जरूरतों जैसे किराया, राशन, बिजली-पानी या दवाइयों वगैरा की जगह, मोबाइल, टीवी , फ्रिज खरीद लेना. फैमिली के साथ किसी रेस्टोरेंट में डिनर करना या किसी जगह घूमने फिरने चले जाना.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. प्रोफेसर सिद्धार्थ राठौर का कहना है कि लोग खाने-पीने की चीजों पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च कर रहे हैं. सरकार ने भी खर्चा बढ़ाया है. इन वजहों से GDP ग्रोथ में इजाफा हुआ है.

अगर सेक्टरवाइज प्रदर्शन की बात की जाए तो प्राइमरी सेक्टर, जिसमें कृषि और खनन शामिल हैं, ने कुल मिलाकर 3.1% की वृद्धि दर्ज की. ये पिछले वित्त वर्ष (2024-25) की इसी तिमाही के 3.5% से थोड़ा कम है. लेकिन सिर्फ कृषि क्षेत्र की बात करें तो इसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा और यह 3.5% बढ़ा. हालांकि वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.1% थी. 

सेकंडरी सेक्टर, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और बिजली उद्योग शामिल हैं, ने मजबूत प्रदर्शन किया है. यहां दूसरी तिमाही में 8.1% की वृद्धि दर्ज की गई है. जबकि पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में सेकंडरी सेक्टर की ग्रोथ 4% रही थी. आज जारी दूसरी तिमाही के शानदार GDP आंकड़ों में सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा है. इस सेक्टर ने 9.1% की जोरदार ग्रोथ हासिल की है. पिछले वित्त वर्ष में इसी दौरान मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की ग्रोथ केवल 2.2% थी.

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