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पिछले साल गोल्ड खरीदा था? इस साल आपके सोने की कितनी हो गई मार्केट वैल्यू, पूरा हिसाब जान लें

इस साल जनवरी में सोने के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे. उस समय से लेकर अब तक सोने के दाम करीब 20% गिरे हैं. हालांकि, अगर आपने पिछले साल गोल्ड खरीदा था तो आज उसकी मार्के वैल्यू कितनी है, उसका भी हिसाब लगा लें.

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अक्टूबर में सोने के दाम करीब 5% गिरे हैं (Courtesy: India Today)

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  • धनतेरस के मौके पर इस साल 24 कैरेट सोने का मूल्य 1.38 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच है, जो पिछले साल के मुकाबले 5.5% से 7.6% अधिक है।
  • सोने की कीमतों में गत 11 महीनों में उतार-चढ़ाव था, महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के कारण जनवरी में उच्च मूल्य के बाद हाल के महीनों में गिरावट आई है।
  • वर्तमान स्थिति में केंद्रीय बैंक और संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से सोने की मांग बनी हुई है, लेकिन आगे की कीमतें ब्याज दर, मुद्रास्फीति और डॉलर के मूल्य पर निर्भर करेंगी।

धनतेरस वह समय है जब ज्यादातर लोग घर में खुशहाली के लिए प्रतीक के तौर पर सोना-चांदी खरीदते हैं. इस मौके पर गोल्ड खरीदना बहुत शुभ माना जाता है. अगर आपने पिछले साल सोना खरीदा था, तो इस साल उसकी कितनी कीमत है. सोने की कीमतों में पिछले 11 महीने में काफी उतार चढ़ाव आया है. जनवरी में सोने के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुचे थे. लेकिन, हाल के महीनों में सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है. 

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इस साल जनवरी की रिकॉर्ड ऊंचाई के मुकाबले सोना करीब 20% सस्ता हो चुका है. सिर्फ अक्टूबर में सोने के दाम लगभग 5% गिरे हैं. आइए जानते हैं कि पिछले धनतेरस पर आपने जो सोना खरीदा था, उसकी फिलहाल कीमत क्या है?

सोने में निवेश अभी भी फायदेमंद विकल्प

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि इस साल धनतेरस 6 नवंबर यानी आने वाले शुक्रवार को है. फिहलहाल 24 कैरेट सोने का भाव 1.38 लाख रुपये से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास है . इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव 1.27 लाख रुपये से 1.29 लाख रुपये के बीच है. इस भाव में गुड्स एवं सर्विस टैक्स (GST) और मेकिंग चार्ज शामिल नहीं है. 

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पिछले साल धनतेरस के मुकाबले इस साल सोने के दाम करीब 5.5% से 7.6% ज्यादा बढ़े हैं. उस समय 24 कैरेट सोना लगभग 1.3 लाख रुपये से 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था. इसका मतलब है कि पिछले साल हर 10 ग्राम पर लगभग 8,000 रुपये से 10,000 रुपये की बढ़ोतरी हुई है.

इस तरह से देखें तो साल 2025 के मुकाबले, इस धनतेरस पर सोने की कीमतों में हालिया गिरावट के बावजूद खरीदारों को गोल्ड खरीदने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे.

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सोना महंगा होने से सिक्कों की मांग पर असर

सोने में हाल के करेक्शन का मतलब यह नहीं है कि इन्वेस्टर्स ने निवेश विकल्प मानना छोड़ दिया है. मंगलवार (3 नवंबर) को जारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की लेटेस्ट रिपोर्ट से पता चलता है कि सेंट्रल बैंक और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स तीसरी तिमाही में बड़े खरीदार के तौर पर लौटे हैं. भले ही रिटेल डिमांड में सावधानी बनी रही.

दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने जुलाई-सितंबर तिमाही में अपने रिज़र्व में नेट 321 टन सोना खरीदा. यह पिछले साल इसी समय से 42% ज़्यादा है. 2026 के पहले नौ महीनों में उनकी खरीदारी 675 टन रही, जो एक साल पहले की तुलना में 6% ज़्यादा है. हालांकि इस दौरान गोल्ड बार और सोने की सिक्कों की वैश्विक मांग में साल-दर-साल 19% गिरी है. इससे पता चलता है कि निवेशक कीमतों में गिरावट का इंतज़ार कर रहे हैं. जुलाई-सितंबर तिमाही में ज्वेलरी की डिमांड भी दुनिया भर में साल-दर-साल 17% कम हुई है. कीमत बढ़ने से खरीदारों का रुझान घटा है.

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क्या भारत में सोने की मांग कम हो गई है?

धनतेरस से पहले यह ट्रेंड भारत के लिए खास तौर पर जरूरी है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कहा कि जुलाई-सितंबर में भारत में सोने की डिमांड पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़ी. इसे सीजनल खरीदारी और तिमाही के आखिर में कम कीमतों से मदद मिली. लेकिन डिमांड अभी भी एक साल पहले के मुकाबले 29% कम थी. ज्वेलरी की डिमांड तिमाही-दर-तिमाही 33% बढ़कर 100 टन हो गई, लेकिन साल-दर-साल 20% कम रही.

खास बात यह है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में, चीन के बाद भारत गोल्ड बार और सिक्कों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बना रहा. इसकी ग्लोबल डिमांड में लगभग 21% हिस्सेदारी थी. 

WGC की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसी तिमाही में भारत में डिजिटल सोने की खरीदारी साल-दर-साल 44% बढ़ी है. जनवरी-सितंबर की अवधि में, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में डिजिटल सोने की खरीदारी 76% ज़्यादा थी.

खास बात यह है कि मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से कहा था कि जब तक जरूरी न हो, सोना न खरीदें . उन्होंने कहा, "मैं लोगों से अपील करूंगा कि वे एक साल तक शादियों के लिए सोना न खरीदें." उन्होंने सितंबर में भी इसे दोहराया और लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी खरीदारी में कटौती करने को कहा.

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सोने की कीमतों में तेज गिरावट क्यों आई? 

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में 2026 की पहली छमाही में सोने के परफॉर्मेंस का एनालिसिस किया गया था. इसमें सोने के दाम गिरने के पीछे सबसे बड़े फैक्टर के तौर पर महंगाई और बदलते इंटरेस्ट रेट की उम्मीदों को बताया. 

मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट में बताया गया कि मार्केट कई रेट कट की उम्मीद से हटकर लंबे समय तक ज़्यादा इंटरेस्ट रेट वाले माहौल की ओर बढ़ गया. इससे US ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और रियल इंटरेस्ट रेट बढ़ गए, जिससे इंटरेस्ट वाले एसेट्स के मुकाबले सोना कम आकर्षक हो गया.

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पिछले साल की तुलना में इस साल मामूली रिटर्न

इस साल की शुरुआत में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद, पिछले धनतेरस के आसपास सोना खरीदने वाले लोगों के लिए इसमें रिटर्न 5.5% से 7.6% के बीच काफी मामूली है. इसकी तुलना फिक्स्ड डिपॉजिट और दूसरे फिक्स्ड-इनकम इन्वेस्टमेंट से मिलने वाले रिटर्न से की जा सकती है.

दूसरे शब्दों में, सोने में अभी भी पारंपरिक और लंबे समय की वैल्यू है. लेकिन, इसका हालिया परफॉर्मेंस जरूरी नहीं कि इसे एक साल के समय में सबसे ज्यादा फायदेमंद इन्वेस्टमेंट ऑप्शन बनाता हो. सेंट्रल बैंक और इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर की लगातार खरीदारी से सोने की डिमांड को सपोर्ट मिला हुआ है. हालांकि, इसका अगला कदम इंटरेस्ट रेट, महंगाई और डॉलर पर निर्भर करेगा.

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