बजट का दिन. सबकी निगाहें टीवी पर. वित्त मंत्री बोलना शुरू करें और 6 मिनट में स्पीच पूरी कर बैठ जाएं. तो सबको अचरज होगा. मगर ऐसा हुआ है. और ऐसा भी कि वित्त मंत्री बोलते ही जाएं. लगभग पौने तीन घंटे तक. आज हम आपको इन्हीं दो बजट भाषणों की कहानी सुनाएंगे. सबसे छोटे और सबसे लंबे बजट भाषण की कहानी.
‘खिचड़ी सरकार’ में सबको खुश करना था तो बजट सिर्फ़ 800 शब्दों का कर दिया!
बजट किस्से: कभी 6 मिनट में ही खत्म हो गया था बजट भाषण तो कभी लग गए 160 मिनट.
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लेफ़्ट वाली तस्वीर हीरूभाई एम. पटेल. और राईट वाली मनमोहन सिंह की, नरसिम्हा राव के साथ. एक के नाम सबसे छोटा बजट भाषण रहा, दूसरे के नाम सबसे बड़ा. (तस्वीर: PTI)
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सबसे छोटा बजट 1977 में इमरजेंसी के बाद लोकसभा चुनाव हुए. कांग्रेस पार्टी ने पहली बार सत्ता गंवाई. प्रधानमंत्री बने जनता पार्टी के मोरार जी देसाई. देसाई सरकार ने 23 मार्च 1977 को कामकाज शुरू किया. और पहली चुनौती थी बजट. 9 दिन बाद देश का नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होने वाला था. उसके पहले 28 मार्च को बजट पेश करने की तारीख तय हुई.
ये बजट पेश करना था बनासकांठा के सांसद और मोरार जी सरकार के वित्त मंत्री हीरूभाई एम पटेल को. पटले का लंबा प्रशासनिक करियर रहा था. उन्होंने देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ काम किया था. वित्त विभाग की बात करें तो वो इसके सचिव रहे थे. लेकिन हरिदास मूंधड़ा स्कैंडल में नाम आने पर उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा. अब ये मूंधड़ा स्कैंडल फिलहाल शॉर्ट में समझ लीजिए. हरिदास मूंधड़ा कलकत्ता का कारोबारी था. उसने दिवालिया होने की कगार पर खड़ी अपनी कंपनियों में एलआईसी (LIC) का पैसा लगवाया. इसके लिए सरकारी रसूख का इस्तेमाल किया गया.
ये बात नेहरू के दामाद और रायबरेली के सांसद फिरोज गांधी को पता चली. संसद में बवाल हुआ. जस्टिस छागला ने जांच की तो वित्त मंत्री टीटी कृष्णामचारी और वित्त सचिव एचएम पटेल पर उंगली उठाई. कृष्णामचारी को इस्तीफा देना पड़ा. मूंधड़ा गिरफ्तार हुआ. नेहरू की भद्द पिटी. इसे आजाद भारत का पहला आर्थिक घोटाला माना जाता है. एचएम पटेल खेमे का तर्क था कि दूसरी जांच में उन्हें बरी किया गया. फिर भी पॉलिटिकल इस्टैब्लिशमेंट ने उनकी बलि ले ली. बाद के दिनों में वो राजनीति में आ गए. और अब बजट पेश कर रहे थे.
पटेल का बजट सिर्फ 6 मिनट में खत्म हो गया. उन्होंने महज 800 शब्द में साल भऱ के आय और व्यय का लेखा जोखा पेश कर दिया. इसकी एक वजह तो यह बताई गई कि उन्हें बजट तैयार करने के लिए बेहद कम समय मिला था.
और दूसरी वजह, राजनीतिक थी. जनता पार्टी कई राजनीतिक विचारधाराओं वाले दलों के विलय से बनी थी. जिसमें स्वतंत्र पार्टी जैसे धड़े खुले बाजार के पोषक थे, तो वहीं समाजवादी धड़े संरक्षणवाद के. सब जनता पार्टी के पहले बजट पर अपनी छाप देखना चाहते थे. ऐसे में देसाई ने आसान रास्ता निकाला. आदम खर्च का ब्यौरा. कोई नई स्कीम या ऐलान नहीं. यानी किसी की छाप नहीं.

एच एम पटेल ने देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार का पहला बजट पेश किया था.
दो सबसे बड़े बजट वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया था मोदी सरकार में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने. इस बजट भाषण को पढ़ने में उन्होंने 2 घंटे और 41 मिनट का समय लिया. भाषण की ड्यूरेशन के लिहाज से अब तक का सबसे लंबा बजट रहा. इसी बजट में दो तरह के इनकम टैक्स स्लैब प्रपोज किए गए थे.

निर्मला सीतारमण का 2020-21 के वित्तीय वर्ष का बजट भाषण 160 मिनट तक चला था.
समय के आधार पर ये रेकॉर्ड निर्मला के नाम है तो शब्दों के आधार पर मापें तो रेकॉर्ड मनमोहन सिंह का अटूट है.
पीवी नरसिम्हा राव की सरकार का पहला बजट डॉ. मनमोहन सिंह ने पेश किया. 24 जुलाई 1991 को. देश का बाजार पहली बार दुनिया के लिए खोला गया. ये एलपीजी बजट था यानि लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाईजेशन. इस बजट डॉक्यूमेंट में 18 हजार 650 शब्द थे.

नरसिंह राव सरकार के दौर में वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आर्थिक सुधारों की नींव रखी थी.
मनमोहन सिंह ने राव सरकार के पांचो बजट पेश किए. मगर रेकॉर्ड पहले का ही कायम रहा.
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