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86 लाख की EV सिंगल चार्ज में 313 km ही चली, कोर्ट ने फिर भी कहा कंपनी की गलती नहीं

करीब 86 लाख रुपये में खरीदी गई कार के लिए दावा किया गया था कि विज्ञापन में 470 किलोमीटर की रेंज बताई गई थी, जबकि कस्टमर को अधिकतम 313 किलोमीटर की ही रेंज मिली. इसलिए कस्टमर ने नई कार, पूरी कीमत वापसी और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी.

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EV की IDC और Real-time Range

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  • दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने निर्णय दिया कि इलेक्ट्रिक वाहन की वास्तविक ड्राइविंग रेंज कंपनी के दावे से कम होना मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं माना जाएगा।
  • यह निर्णय ऐसे विवाद के संदर्भ में आया जिसमें ग्राहक ने मर्सिडीज EQC 400 की विज्ञापित रेंज के कम होने पर पूरी कीमत वापसी और मुआवजे की मांग की थी।
  • आयोग ने स्पष्ट किया कि ड्राइविंग रेंज पर्यावरण, ड्राइविंग स्टाइल और वाहन के उपयोग के तरीके से प्रभावित होती है, इसलिए उपभोक्ताओं को कंपनी के दावे से कम रेंज मिलने पर अदालत में शिकायत करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।

आपने खरीदा इलेक्ट्रिक स्कूटर या इलेक्ट्रिक कार. कंपनी ने कहा भाई साब आपको 100 या 200 किलोमीटर की रेंज मिलेगी. मगर जब आप सड़क पर निकले तो मामला मुश्किल से 80 या 160 से ऊपर नहीं गया. आपको लगा कि कंपनी ने झूठ बोला. ये तो मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है. खिसियाए हुए आप पहुंच गए कंज्यूमर कोर्ट. क्या लगा कोर्ट शाबासी देगा. ईवी कंपनी पर जुर्माना लगाएगा. अगर आपको ऐसा लगता है (ev driving range is not a manufacturing defect) तो अपने इरादे और ईवी, दोनों पर ब्रेक लगाइए. हम आपका पईसा, टेम, रेंज तीनों बचा देते हैं.

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ड्राइविंग रेंज मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं

इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) को लेकर उपभोक्ताओं की बढ़ती उम्मीदों के बीच दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसला सुनाया है. राज्य आयोग ने साफ किया कि किसी EV की वास्तविक ड्राइविंग रेंज का कंपनी के दावे से कम होना अपने आप में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माण दोष) नहीं माना जा सकता. आयोग ने कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ी की रेंज कोई स्थिर या तय आंकड़ा नहीं होती, बल्कि यह कई वास्तविक परिस्थितियों पर निर्भर करती है.

जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की अध्यक्षता वाले आयोग ने कहा कि EV की रेंज ड्राइविंग स्टाइल, सड़क और ट्रैफिक की स्थिति, मौसम, इलाके की प्रकृति, एयर कंडीशनर जैसी अतिरिक्त सुविधाओं के इस्तेमाल, बैटरी की स्थिति और चार्जिंग के तरीके जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है. इसलिए हर यूजर को हर बार कंपनी द्वारा बताई गई अधिकतम रेंज मिले, यह जरूरी नहीं है.

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राज्य आयोग ने यह टिप्पणी मर्सिडीज EQC 400 से जुड़े एक विवाद पर 22 जून को सुनाए गए फैसले में की. शिकायतकर्ता ने करीब 86 लाख रुपये में खरीदी गई कार के लिए दावा किया था कि विज्ञापन में 470 किलोमीटर की रेंज बताई गई थी, जबकि उन्हें अधिकतम 313 किलोमीटर की ही रेंज मिली. उन्होंने नई कार, पूरी कीमत वापसी और 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की थी.

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रेंज का असली खेल जानिए

ये एकदम वैसे ही जैसे पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में माइलेज का होता है. कंपनी क्लेम करती है 20 मगर रोड पर 15 मिल जाए तो बड़ी बात. माने 30 फीसदी की गिरावट तो आम बात है. दरअसल माइलेज या रेंज का दावा 'आदर्श परिस्थिति' नाम के शब्द के पीछे छिपा होता है. सारा खेल IDC (Indian Driving Cycle) और Real-time Range का है. कंपनी ने एकदम खाली रोड पर सिंगल आदमी बिठाकर, 60 की स्पीड में बिना ब्रेक लगाए ईवी चलाई तो रेंज मिली 200 किलोमीटर. मगर आपने गाड़ी में चार लोग बिठाए, 100 के नीचे भगाई नहीं, AC भी फुल पर चलाया तो फिर 150-160 से ज्यादा की उम्मीद मत रखना. सिटी में हर 10 मीटर पर ब्रेक लगाया तो फिर रेंज गिरनी ही है. गर्मी-सर्दी, बरसात का असर भी रेंज पर पड़ता है.

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इसलिए ईवी कंपनी जितनी रेंज बोले उसका 20 फीसदी तो शोरूम से निकलने से पहले ही घटा देना. माने 100 का 80 पकड़ लो. अगर 70 पकड़कर अपनी यात्रा और चार्जिंग प्लान करोगे तो सफर उर्दू वाला ही रहेगा. अंग्रेजी का suffer नहीं बनेगा.

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