EV खरीदने जा रहे, पहले 'लाइफटाइम' वॉरंटी का सच जान लीजिए
EV की लाइफटाइम वॉरंटी (EV Lifetime Battery Warranty) से मतलब 15 साल से है वो भी रजिस्ट्रेशन की तारीख से. 15 साल का वादा भी गाड़ी के पहले मालिक के लिए है. सर्विस रिकॉर्ड भी एकदम चकाचक होना चाहिए. यहां भी बैटरी बदली नहीं जाएगी बल्कि उसके सेल रिपेयर किए जाएंगे. ऐसा भी होगा या नहीं वो कंपनी के ऊपर निर्भर करेगा.

इलेक्ट्रिकल व्हीकल बैटरी की लंबी वॉरंटी के साथ आते हैं. कारों पर तो कंपनियां लाइफटाइम वॉरंटी ऑफर कर रही हैं. आप भी मजे से गाड़ी चलाए जा रहे हो क्योंकि जब बैटरी खराब होगी तो वॉरंटी काम आ जाएगी. है कि नहीं. लेकिन आपको जानकर जोर का झटका जोर से लगेगा कि लाइफटाइम वॉरंटी की लाइफ बड़ी शॉर्ट है. एकदम लाइफटाइम इनकमिंग फ्री वाले मोबाइल कनेक्शन की तरह. नियम और शर्तों के इतने तार बिछे हैं इसमें कि सुलझाते-सुलझाते आपकी बैटरी डिस्चार्ज हो जाएगी. इसलिए अपने ईवी को चार्ज पर लगाइए और वॉरंटी का गेम समझ लीजिए.
लाइफटाइम के 15 सालसबसे पहले तो ये जान लीजिए कि लाइफटाइम जैसा कुछ है नहीं. यहां लाइफटाइम से मतलब 15 साल से है वो भी रजिस्ट्रेशन की तारीख से. माने जो गाड़ी 3 महीने या 6 महीने पुरानी है तो उतना टाइम पीरियड भी गया. 15 साल का वादा भी गाड़ी के पहले मालिक के लिए है. सर्विस रिकॉर्ड भी एकदम चकाचक होना चाहिए. चलो कोई ना. साढ़े 14 साल तो फिर भी मिलेंगे.
मिलेंगे, कागजों पर. सड़क पर नहीं. रीसेल वाली गाड़ी पर वॉरंटी 8 साल तक सीमित है.

15 साल की वॉरंटी से मतलब बैटरी में कोई मैन्युफैक्चरर प्रॉबलम आने से है. माने 2-3 साल में गाड़ी चलाते-चलाते अगर बैटरी बोलने लगी, रेंज एकदम कम हो गई तो फिर बैटरी पर वॉरंटी मिलेगी. यहां भी बैटरी बदली नहीं जाएगी बल्कि उसके सेल रिपेयर किए जाएंगे. ऐसा भी होगा या नहीं वो कंपनी के ऊपर निर्भर करेगा.
अगर नेचुरल तरीके से बैटरी की रेंज कम हुई, जो होनी ही है, तो फिर धप्पा. देखिए जनाब, गाड़ी में जो बैटरी लगी है वो Lithium-Ion बैटरी है जिसकी एक उम्र है. समय के साथ इसकी क्षमता कम होती जाती है. एकदम आपके स्मार्टफोन के जैसे, जिसकी बैटरी 3 साल में 80 फीसदी से नीचे आ जाती है. 5 साल होते-होते बैटरी का दम निकल जाता है. तो अगर इस प्रकार से आपकी ईवी की बैटरी की रेंज कम हुई तो फिर वॉरंटी भूल जाइए.

इतना ही नहीं, अगर बैटरी के केस मतलब बॉडी के नीचे अगर कोई स्क्रैच (Damage Clause) आया तो भी वॉरंटी मिलने से रही. प्रीमियम कारों में तो ये केस बड़ा मजबूत होता है, मगर एंट्री लेवल कारों में इसकी क्वालिटी औसत ही होती है.
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ऐसे में अगर आप ये सोचकर बैठे हैं कि जिस दिन रेंज कम होगी उसी दिन नई बैटरी फिट करवा लेंगे तो गलतफहमी मत पालिए. इसकी जगह चार्जिंग की अच्छी आदतें पाल लीजिए. बैटरी को 20 से 80 के बीच चार्ज कीजिए. सही चार्जर का इस्तेमाल कीजिए. 5 की जगह 7 साल आराम से मिलेंगे.
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