अगर आप भी इलेक्ट्रिक कार चलाते हैं या चलाने का प्लान बना रहे तो जरा चार्जिंग का चक्कर जान लीजिए. AC और DC चार्जिंग का फर्क पता होना (Which charger is better for your EV) जरूरी है, ताकि आपकी कार की बैटरी ज्यादा समय तक आपका साथ दे. शायद आप कहोगे कि इसमें क्या ही जानना है. AC चार्जर माने जो गाड़ी के साथ आता है और DC माने जो बाहर पब्लिक प्लेस में लगा होता है. घरवाले से स्लो चार्जिंग होती है और बाहर वाले से सब फटाफट हो जाता है. बस पावर का फर्क ही तो है. अरे जनाब अगर इतना ही होता तो हम आपको 'बे-कार' में परेशान क्यों करते.
EV के लिए AC चार्जर बेहतर या DC, बैटरी की जिंदगी और आपका पैसा किससे बचेगा?
AC चार्जर माने जो गाड़ी के साथ आता है और DC माने जो बाहर पब्लिक प्लेस में लगा होता है. घरवाले से स्लो चार्जिंग होती है और बाहर वाले से सब फटाफट हो जाता है. इन दोनों के बारे में आज सबकुछ जान लीजिए.

एसी चार्जिंग मतलब गाड़ी के साथ आने वाला चार्जर जिसे महज घर में एक पावर पॉइंट की जरूरत होती है. यह घर के सामान्य 15-ऐम्पियर (15A) के 3-पिन सॉकेट में लग जाता है जिसका इस्तेमाल हम फ्रिज, AC चलाने के लिए भी करते हैं. अगर जो आप इसका बॉक्स वाला वर्जन लगाते हैं तो फिर आपको अलग से हैवी वायरिंग और पावर कनेक्शन की जरूरत होगी, क्योंकि इसमें 16A से 32A का सॉकेट या डायरेक्ट एमसीबी (MCB) कनेक्शन चाहिए होता है. माने आपको बिजली विभाग को बोलकर मीटर की क्षमता बढ़वानी पड़ती है.
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भारत में गाड़ियों के साथ आने वाले चार्जर 11 से 22KW चार्जिंग सपोर्ट करते हैं, मगर देश में ज्यादातर ईवी 7KW से ज्यादा सपोर्ट नहीं करती हैं. हालांकि, कुछ प्रीमियम ईवी 11 और 22KW सपोर्ट करती हैं, लेकिन जनरल नंबर 7 ही है. इसलिए गाड़ी के साथ आया एसी चार्जर आपके लिए पर्याप्त है. ये चार्जर एसी करेंट को डीसी में बदलता है क्योंकि गाड़ी में लगी बैटरी इसे डीसी (डायरेक्ट करेंट) में ही स्टोर करती है. इसलिए ये वाली चार्जिंग स्लो होती है.

DC चार्जर में, करंट को AC से DC में बदलने का काम गाड़ी के बाहर लगे बड़े चार्जिंग स्टेशन में ही हो जाता है. यह चार्जर सीधे और भारी मात्रा में DC करंट EV की बैटरी में भेज देता है, इससे गाड़ी के अंदर वाले छोटे कंवर्टर का रोल खत्म हो जाता है. इस प्रोसेस में गाड़ी 30 से 40 मिनट में ठीक-ठाक चार्ज तो होती है, मगर बैटरी के सेल भयानक तरीके से गर्म होते हैं. DC चार्जिंग के लिए आमतौर पर CCS2 या CHAdeMO जैसे विशेष प्लग और केबल का इस्तेमाल होता है. आपने गौर किया होगा कि इस वाले चार्जर की गन में दो पॉइंट होते हैं जो गाड़ी में खोंसे जाते हैं, जबकि एसी में एक पॉइंट ही होता है. डीसी चार्जर घर पर लगाने के लिए होता भी नहीं क्योंकि इसको लगाने के लिए कम से कम 5 लाख रुपये चाहिए होते हैं.

एसी घर का खाना है और डीसी बाहर का खाना. तो जैसे हम रोज बाहर का खाना नहीं खाते वैसे डीसी चार्जर से भी बचना चाहिए. डीसी चार्जर सफर और इमरजेंसी के लिए ठीक है. जैसे रोज बाहर का खाना खाने से पेट खराब होता है, वैसे ही डीसी चार्जिंग से बैटरी की सेहत बिगड़ती है. डीसी चार्जिंग मतलब एक सांस में लीटर पानी गटक जाना. प्यास तो बुझ जाएगी मगर ठसका भी लग सकता है. इसलिए Slow and steady wins the race वाला फॉर्मूला अपनाइए.
वैसे बाहर सिर्फ डीसी चार्जर होंगे, ऐसा भी नहीं है. कई कंपनियों ने बॉक्स वाले एसी चार्जर लगाए हैं. आप उनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
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