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UP इलेक्शन लाइवः वो 24 बेटे जिनकी जीत पर टिकी है बाप-दादा की इज्जत

उत्तर प्रदेश में सब नेताओं के बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट तय होता दिख रहा है. लेकिन जिन नेता पिताओं और परिवारों के बेटे चुनावी अखाड़े में हैं उनके माथे पर भी शिकन है. उनकी न सिर्फ राजनीतिक विरासत दांव पर है, बल्कि भविष्य में पार्टी और वोटर्स उनके साथ कैसा सलूक करेंगे, ये भी ये चुनावी परिणाम तय करने वाला है.बात एेसे ही 24 नेता पुत्रों की जिनके वोटों की काउंटिंग जारी हैः

#1. पंकज सिंह – 1,04,016 वोटों से सपा के सुनील चौधरी को हराया.

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नोएडा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पंकज सिंह केंद्रीय गृहमंत्री और यूपी के पूर्व सीएम राजनाथ सिंह के बेटे हैं. पंकज के टिकट पर लंबी खींचतान हुई. पहले कहा गया कि पार्टी उन्हें टिकट देना नहीं चाहती है. फिर ये बाद सामने आई कि केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा इस सीट से मौजूदा विधायक विमला बाथम को ही टिकट दिलवाना चाहते हैं. आखिरकार उनका टिकट फाइनल हुआ. इस बीच न तो राजनाथ ने कोई बयान दिया और न पंकज ने. हालांकि, वो 10 साल से ज्यादा वक्त से पार्टी से जुड़े हैं और पार्टी में प्रदेश महामंत्री हैं.

#2. अमनमणि त्रिपाठी – 32,256 वोटों से सपा के मुन्ना सिंह को हराया.

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महाराजगंज की नौतनवा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़े अमनमणि त्रिपाठी बाहुबली नेता अमरमणि त्रिपाठी के बेटे हैं. मधुमिता हत्याकांड में दोषी ठहराए जा चुके अमर अभी अपनी पत्नी के साथ सजा काट रहे हैं. उधर अमन भी अपनी पत्नी सारा की हत्या के आरोप में जेल में हैं. वह निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी बहनें उनके लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं. पहले सपा ने अमन को टिकट दिया था, लेकिन बाद में छवि ज्यादा बिगड़ती देख उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, जिसके बाद उन्होंने कोर्ट से परोल लेकर निर्दलीय पर्चा भरा.

#3. नितिन अग्रवाल – 5,109 वोटों से भाजपा के राजा बक्स सिंह को हराया.

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हरदोई सदर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले नितिन अग्रवाल पूर्व विधायक और अभी राज्यसभा सांसद नरेश अग्रवाल के बेटे हैं. नरेश हरदोई में सात बार विधायकी जीत चुके हैं. नितिन ने 2007 का चुनाव बीएसपी और 2012 का चुनाव सपा के टिकट पर जीता था. वो फिर सपा के टिकट से मैदान में थे. हरदोई नरेश का गढ़ मानी जाती है, जहां कोई कैंडिडेट उनके खिलाफ दोबारा नहीं लड़ा. यादव कुनबे के विवाद के समय पिता-पुत्र, दोनों अखिलेश खेमे में थे.

#4. इमरान कुरैशी – भाजपा के संगीत सोम से 40,682 वोटों से हारकर तीसरे नंबर पर रहे.

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मेरठ की सरधना सीट पर बीएसपी ने इमरान कुरैशी को उतारा था. इमरान बीएसपी सरकार में मंत्री रह चुके हाजी मोहम्मद याकूब के बेटे हैं. याकूब खुद मेरठ साउथ सीट से कैंडिडेट थे. 2006 में याकूब ने बीएसपी छोड़ दी थी, लेकिन बाद में वापसी की, तो माया ने इन्हें मंत्री भी बनाया था. इमरान का यह पहला चुनाव था.

#5. अब्दुल्ला आजम – 49,976 वोटों से आगे चल रहे हैं..

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रामपुर की स्वार सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अब्दुल्ला आजम सपा के सबसे बड़े मुस्लिम नेता आजम खान के बेटे हैं. रामपुर की सदर सीट से विधायक आजम ने अपने बेटे को रामपुर के नवाब के बेटे के खिलाफ उतारा था. नवाब परिवार के साथ उनकी पुरानी राजनीतिक लड़ाई चलती आ रही है. यह अब्दुल्ला का पहला चुनाव था.

#6. संदीप सिंह – 50,967 वोटों से सपा के वीरेश यादव को हराया.

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अलीगढ़ की अतरौली सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े संदीप सिंह सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पोते हैं. 26 साल के संदीप का ये पहला चुनाव था, जिनके लिए कल्याण ने सबसे सुरक्षित सीट चुनी थी. कल्याण अभी राजस्थान के गवर्नर हैं और उनके पोते की हार-जीत से तय होना था कि यूपी की सियासत में वो कितने प्रासंगिक रहेंगे.

#7. विनय शंकर तिवारी –  3,359 वोटों से भाजपा के राजेश त्रिपाठी से चुनाव जीते.

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गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़े विनय शंकर तिवारी इलाके के बाहुबली नेता हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं. हरिशंकर खुद चिल्लूपार से लगातार 6 बार 23 साल तक विधायक रह चुके हैं. 2007 के चुनाव में राजेश त्रिपाठी ने बीएसपी के टिकट पर हरिशंकर को हरा दिया था. 2012 में भी हरिशंकर नहीं जीते और अब इस बार बीएसपी ने उसी परिवार के विनय शंकर को टिकट दे दिया, जिनके पिता को उन्हीं की पार्टी के कैंडिडेट ने 2007 में हराया था. इस चुनाव में वो 3359 वोटों से जीत गए.

#8. यासर शाह – 1,595 वोटों से भाजपा के अरुण वीर सिंह को हराकर जीत गए हैं.

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बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर दावेदारी करने वाले यासर शाह वकार अहमद शाह के बेटे हैं. डॉ. वकार अहमद शाह बहराइच सीट पर सपा से लड़ते हुए लगातार पांच बार विधायकी जीत चुके हैं. 2012 का चुनाव जीतने के बाद उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी, जिसके बाद अखिलेश ने उन्हें मंत्री पद से हटा दिया था और उनके बेटे यासर को राज्यमंत्री बना दिया था. यासर की मां रुबाब सईदा को भी सपा ने बहराइच सदर सीट से उतारा. यासर 2012 का अपना चुनाव मटेरा सीट से सपा के टिकट पर जीत चुके हैं. 

#9. आशुतोष टंडन ‘गोपाल’ – 79,230 वोटों से कांग्रेस के अनुराग सिंह को हराया.

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लखनऊ पूर्व की सीट पर बीजेपी ने आशुतोष टंडन उर्फ गोपाल को टिकट दिया था. ये बीजेपी के अटल काल में अटल के दाहिने हाथ रहे लालजी टंडन किसी तरह अपने बेटे हैं. लालजी टंडन का राजनीति से अघोषित संन्यास हो चुका है.

#10. संजीव गोंड – 44,269 वोटों से सपा के रवि गोंड को हराकर जीत गए हैं.

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सोनभद्र की ओबरा सीट से बीजेपी का टिकट हासिल करने वाले संजीव, गोंड विजय सिंह गोंड के बेटे हैं. ओबरा सीट को एससी से एसटी करवाने की लड़ाई लड़ने वाले विजय सात बार विधायक रह चुके हैं और पार्टी में शामिल हो चुके हैं. सिर्फ बीएसपी ही बची थी, जिसे उन्होंने इस चुनाव से पहले जॉइन कर ली. बीएसपी ने उन्हें सोनभद्र की ही दुद्धी से उतारा था और उनके बेटे संजीव को बीजेपी ने ओबरा से टिकट दिया था. संजीव को टिकट मिलने के पीछे उनके पिता ही थे.

#11. उत्कृष्ट मौर्य – 1,934 वोटों से सपा के मनोज कुमार पांडेय से हार गए हैं.

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रायबरेली की ऊंचाहार सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े उत्कृष्ट मौर्य बीएसपी के दिग्गज नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे हैं. चार बार विधायकी जीत चुके स्वामी पिछले साल ही बीएसपी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. बीजेपी में उन्होंने अपने, अपनी बेटी और बेटे के लिए टिकट मांगा था. पार्टी ने उनकी बेटी संघमित्रा को तो टिकट नहीं दिया, लेकिन बेटे को ऊंचाहार और खुद स्वामी को कुशीनगर की पडरौना सीट से टिकट दिया. ये उत्कृष्ट का दूसरा चुनाव था. इससे पहले 2012 में वो ऊंचाहार में ही सपा के मनोज पांडेय से हार गए थे.

#12. अब्बास अंसारी – 7003 वोटों से भाजपा के फागु चौहान से हार गए.

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मऊ की घोसी सीट से बीएसपी के टिकट पर लड़ने वाले अब्बास बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी के बेटे हैं. मुख्तार चार बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन उनके बेटे अब्बास की छवि उनसे अलग है. अब्बास युवा निशानेबाज हैं और सात देशों में भारत की तरफ से शूटिंग में दावेदारी कर चुके हैं. अब्बास अंसारी परिवार की चौथी पीढ़ी के शख्स हैं, जो सियासत में कदम रख रहे हैं. ये उनका पहला चुनाव था. मुख्तार लंबे समय तक सपा में घुसने की कोशिश करते रहे, लेकिन अखिलेश की वजह से ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया. बाद में मायावती ने अंसारी परिवार के लिए दरवाजे खोले और मुख्तार, उनके भाई सिगबतुल्लाह और बेटे अब्बास को टिकट दिया.

#13. शिवन सैनी – 57,391 वोटों से हारकर तीसरे नंबर पर रहे. भाजपा के विक्रम सिंह ने जीत दर्ज की.

मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट से बीएसपी ने शिवन सिंह सैनी को उतारा था. 2017 में अपना पहला चुनाव लड़ने वाले शिवन पूर्व राज्यसभा सांसद राजपाल सिंह सैनी के बेटे हैं. राजपाल 2002 में विधायक बने थे और 2010 में मायावती ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया था. राजपाल मोबाइल की वजह से लड़कियों के घर से भागने जैसे बयान दे चुके हैं.

#14. विवेक सिंह – 29,585 वोटों हारकर तीसरे नंबर पर रहे. भाजपा के ओम कुमार ने जीत दर्ज की.

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बिजनौर की नेहतौर सीट से मायावती ने विवेक सिंह को टिकट दिया था. विवेक बीएसपी के महासचिव वीर सिंह के बेटे हैं. पश्चिमी यूपी में वीर सिंह बड़े दलित नेता माने जाते हैं.

#15. सुनील दत्त द्विवेदी – 45,4 27 वोटों से बसपा के उमर खान को हराया.

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फर्रूखाबाद सदर सीट पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े सुनील दत्त द्विवेदी 1996 में विधायकी जीतने वाले ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे हैं, जिनकी चुनाव जीतने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. राजनीतिक वर्चस्व के लिहाज से ये बेहद महत्वपूर्ण सीट है. सुनील भारतीय सेना में मेजर थे और पिता की हत्या के बाद नौकरी छोड़ आए थे. राजनीति में आए, लेकिन जीत नसीब नहीं हुई. 2012 का चुनाव तो महज 147 वोटों से हारे थे.

#16. फतेह बहादुर सिंह – 32,854 वोटों से कांग्रेस के चिंता यादव को हरा दिया है.

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गोरखपुर की कैंपियरगंज सीट से बीजेपी के टिकट पर ताल ठोंकने वाले फतेह बहादुर दिग्गज कांग्रेसी नेता वीर बहादुर सिंह के बेटे हैं. वीर बहादुर यूपी में कांग्रेस से मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. फतेह ने 2007 का चुनाव बीएसपी से जीता था, जिसके बाद इन्हें मंत्री भी बनाया गया. 2012 में बीएसपी ने टिकट नहीं दिया, तो निर्दलीय खड़े होकर जीते और फिर एनसीपी जॉइन कर ली.

#17. ललितेश त्रिपाठी – 46,598 वोटों से भाजपा के रमा शंकर सिंह ने हरा दिया है.

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मिर्जापुर की मड़िहान सीट से सपा-कांग्रेस गठबंधन ने ललितेश त्रिपाठी को टिकट दिया था. ललितेश उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के पोते हैं. ललितेश के पिता राजेशपति त्रिपाठी भी एमएलसी रह चुके हैं. इनकी सीट पर इनकी छवि अच्छी थी और 2012 का विधानसभा चुनाव ललितेश ने कांग्रेस के टिकट पर ही जीता था.

#18. रीतेश पांडेय – 13,030 वोटों से भाजपा के राजेश सिंह को हराया.

अंबेडकर नगर की जलालपुर सीट से बीएसपी के टिकट पर लड़ने वाले युवा नेता रीतेश पांडेय, राकेश पांडेय के बेटे हैं. राकेश बीएसपी से सांसद रह चुके हैं और अपने इलाके के प्रमुख व्यापारियों में गिने जाते हैं. ये राकेश का पहला चुनाव था.

19. डॉ. राजेश सिंह – 13,030 वोटों से बसपा के रीतेश पांडेय से हार गए.

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अंबेडकर नगर की ही जलालपुर सीट से बीजेपी के टिकट पर दावेदारी ठोंकने वाले डॉ. राजेश सिंह इलाके के दिग्गज नेता शेर बहादुर सिंह के बेटे हैं. शेर बहादुर की उम्र 80 से ज्यादा की हो चुकी है और इसी वजह से उन्होंने इस बार खुद चुनाव न लड़ते हुए अपने बेटे को टिकट दिलाया. अपने 50 साल के राजनीतिक करियर में शेर बहादुर कांग्रेस से लेकर, सपा, बसपा, यहां तक कि निर्दलीय भी विधायक बन चुके हैं. इस बार उन्होंने भाजपा का दामन थामा और बेटे को टिकट दिला दिया.

#20. यशपाल यादव –  16,837 वोटों से भाजपा के राजीव सिंह से हार गए हैं.

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झांसी की बबीना सीट पर अखिलेश यादव ने सपा के कद्दावर नेता डॉ. चंद्रपाल यादव के बेटे यशपाल यादव को टिकट दिया था. चंद्रपाल सपा से राज्यसभा सांसद हैं और उनके बेटे यशपाल लंदन से पढ़कर आए हैं. स्थानीय स्तर पर उनका बहुत जनाधार नहीं था और इसके लिए वो पिता पर आश्रित थे. यशपाल ने अपने पिता के पिछले चुनाव में उनके लिए प्रचार किया था.

#21. अनुराग सिंह – 62,228 वोटों से सपा के जगतम्बा सिंह को हराया.

मिर्जापुर की चुनार सीट से बीजेपी-अपना दल की तरफ से अनुराग सिंह को उतारा गया. अनुराग बीजेपी के दिग्गज कुर्मी नेताओं में से एक ओमप्रकाश सिंह के बेटे हैं. ओमप्रकाश के राजनाथ के साथ अच्छे रिश्ते नहीं बताए जाते हैं. जैसे-जैसे राजनाथ का कद बढ़ा, ओमप्रकाश का कम होता गया. ये 2012 का चुनाव भी हार गए थे, लेकिन इस चुनाव में वो अपने बेटे को टिकट दिलाने में कामयाब हो गए.

#22. सौरभ श्रीवास्तव –  61,326 वोटों से कांग्रेस के अनिल श्रीवास्तव को हराया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस की 8 विधानसभा सीटों में एक बनारस कैंट से बीजेपी ने सौरभ श्रीवास्तव को उतारा था. उनके पिता दो बार और मां ज्योत्सना श्रीवास्तव चार बार यहां से जीतकर विधायक रहीं. इलाके में सौरभ की छवि बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन नरेंद्र मोदी के रोड शो के बाद उनका चुनाव मजबूत माना जाने लगा था.

#23. प्रतीक भूषण सिंह – 11,698 वोटों से बसपा के ज़लील खान को हराया.

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गोंडा की विधानसभा सीट से बीजेपी ने प्रतीक भूषण को कैंडिडेट बनाया, जो कैसरगंज से बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बेटे हैं. बृजभूषण भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं और पार्टी बदल-बदलकर यूपी की सियासत में बने हुए हैं. प्रतीक की उम्मीदवारी को लेकर लंबी खींचतान हुई थी, लेकिन आखिरकार उन्हें टिकट मिल गया.

#24. सुरेश राही –  44,995 वोटों से सपा के रहमत भारती को हराया.

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सीतापुर की हरगांव सीट से बीजेपी का टिकट पाने वाले सुरेश राही पूर्व गृहराज्य मंत्री रामलाल राही के बेटे हैं. रामलाल लंबे समय तक कांग्रेस सदस्य रहे. सुरेश के चुनावी परिणाम पर उनका और उनके पिता का राजनीतिक भविष्य निर्भर था .

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