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TV खरीदनी है? पहले LCD, LED, QLED, SLED, OLED में फ़र्क जान लीजिए

कितने टाइप की TV स्क्रीन होती है, समझ लीजिए!

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TV में लगने वाली स्क्रीन की टेक्नॉलजी के बारे में जान लीजिए. (फ़ोटो: रियलमी SLED TV)
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अभय शर्मा
18 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 18 दिसंबर 2020, 01:40 PM IST)
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चाइनीज कंपनी शाओमी ने इस हफ्ते एक नई QLED TV लॉन्च की है. 4K रेज़ॉल्यूशन वाली ये 55-इंच की TV 54,999 रुपए की है और ये 21 दिसंबर से बिकनी शुरू होगी. ये एक फ्लैगशिप टेलिविज़न है, मतलब कि सारे प्रीमियम फीचर से लैस है. मगर हम यहां Mi QLED TV की बात नहीं करेंगे, बल्कि आज-कल मार्केट में मौजूद टेलिविज़न की डिस्प्ले टेक्नॉलजी के बारे में बात करेंगे.
इससे पहले कि हम LED, QLED, SLED और OLED के बारे में बात करें, पहले थोड़ा गायब हो चुकी टेक्नॉलजी के बारे में बात कर लेते हैं. अगर आप जल्दी में हैं तो थोड़ा नीचे स्क्रॉल करके डायरेक्ट LED पर पहुंच जाइए.
एक थी CRT मार्केट में इस वक़्त मौजूद TV टेक्नॉलजी की बात करने से पहले CRT TV का ज़िक्र करना तो बनता ही है. ये हमारे दादा-परदादा की तरह है, जिन्होंने बड़ा पुराना टाइम देखा है. ये TV बड़ी भारी-भरकम हुआ करती थीं. इनकी स्क्रीन थोड़ी उभरी हुई होती थी और पीछे एक चोंच बनी होती थी. ये ब्लैक ऐंड वाइट तस्वीर ही दिखाती थी. चैनल बदलने के लिए और आवाज़ कम-ज़्यादा करने के लिए TV में ही नॉब लगी होती थी.
वक़्त-दर-वक़्त इसमें सुधार होते रहे. ऐन्टेना TV से निकालकर छत पर पहुंच गया, रिमोट कंट्रोल आ गया और स्क्रीन में कलर भी आ गए. इनके अलावा भी कई सारे बदलाव आए और ये CRT TV बड़े-बड़े फर्नीचर सेट से निकलकर फ्रिज के ऊपर या टेबल पर पहुंच गई. CRT या Cathode Ray Television (कैथोड रे टेलिविज़न) की एलेक्ट्रॉन प्रजेक्शन वाली डिस्प्ले टेक्नॉलजी के बारे में स्कूल की साइंस की किताब में एक चैप्टर भी हुआ करता था.
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CRT TV की स्क्रीन आगे की तरफ़ उभरी हुई सी बनी होती है.

आगे चलकर इनकी जगह फ्लैट TV ने ले ली. पश्चिमी देशों के मुकाबले इंडिया में ये शिफ्ट काफ़ी देर में आया. अपने यहां 2012 तक CRT की अच्छी खासी सेल थी. स्टाइलिश डिजाइन और कम दामों में फ्लैट TV दस्तक दे चुकीं थी मगर फ़िर भी इस साल जहां 45 लाख लोगों ने फ्लैट TV खरीदे, 60 लाख लोगों ने CRT TV लिए. मगर 2013 में ही ये आंकड़ा उलटा हो गया. इस साल 40 लाख लोगों ने CRT खरीदा और फ्लैट TV खरीदने वालों की गिनती 60 लाख पहुंच गई. कंपनियों ने पुरानी टेक्नॉलजी वाली CRT TV बनानी बंद कर दी और अगले दो सालों में ये सिर्फ़ उन्हीं घरों तक सिमट कर रह गई, जहां ये पहले से रखी थी.
CRT टेक्नॉलजी को समझने के लिए काफ़ी सारी चीज़ें क्लियर करनी पड़ेंगी. इसलिए इसे बस शॉर्ट में बता देते हैं- स्क्रीन के अंदर के हिस्से में फ़ॉस्फोरस की एक कोटिंग हुआ करती थी जिस पर ग्लास ट्यूब के रास्ते एलेक्ट्रॉन की बारिश कराई जाती थी. यही बारिश स्क्रीन के दूसरी तरफ़ पिक्चर बनाती थी और इसी बारिश को कैथोड रे कहते थे.
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अब तो कहीं CRT वाली TV दिखती ही नहीं और न ही इनको रिपेयर करने के पुर्जे जल्दी मिलते हैं.

CRT के टाइम पर जो फ्लैट TV मार्केट में थी, वो प्लाज़्मा और LCD (liquid crystal display | लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले) थीं. प्लाज़्मा पैनल सिर्फ़ बड़े साइज़ की TV में ही लगे होते थे, मगर ये 2015 में बनने बंद हो गए. और LCD स्क्रीन के अंदर की टेक्नॉलजी में बदलाव हो गए और ये हो गई LED (light emitting diode | लाइट इमिटिंग डाइओड)
LED स्क्रीन TV: सस्ती और टिकाऊ आज अगर आप TV खरीदने निकलेंगे, तो सबसे ज़्यादा ऑप्शन आपको LED TV के ही मिलेंगे. पहली बात तो LED TV काफ़ी सस्ती हैं और दूसरी बात ये कि ये हर साइज़ में मौजूद हैं. यही बेस लेवल की TV है, जो हर घर में पाई जाती है. 32-इंच की स्मार्ट LED TV 12,000 रुपए से शुरू हो जाती हैं और सेल वग़ैरह पर कुछ ब्रैंड 10,000-11,000 तक में बेच देते हैं.
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ये है शाओमी की 32-इंच की Mi TV 4A LED TV.

LED TV में कलर ठीक-ठाक होते हैं और व्यूइंग ऐंगल भी बढ़िया होते हैं. मतलब कि अगर आप ठीक TV के सामने न भी बैठें और साइड में बैठकर TV देखें तब भी पिक्चर और कलर वैसे के वैसे ही नज़र आएंगे. ब्राइटनेस लेवल और साउन्ड आउटपुट तो अलग-अलग TV मॉडल के लिए अलग-अलग होते हैं. मगर LED TV का कॉनट्रास्ट इतना बढ़िया नहीं होता. वो इसलिए क्योंकि इसमें हमेशा एक बैकलाइट जलती रहती है, जिसकी वजह से काला कलर भी थोड़ी सफेदी मारता है. ऐसा क्यों है, वो भी बताते हैं.
LED TV असल में टेक्निकली एक LCD TV ही है, जिसके अंदर अब CCFL की जगह LED लाइट इस्तेमाल होती है. सही मायनों में इसे LED-LCD कहना चाहिए. इन TV में जो पिक्सल होते हैं, वो लिक्विड क्रिस्टल के पैकेट से बनते हैं. अब चूंकि ये क्रिस्टल खुद अपनी लाइट बनाते नहीं है, इसलिए पिक्चर बनाने के लिए इस पर अलग से लाइट मारनी पड़ती है. पहले ये लाइट मारने का काम CCFL करता था और अब ये काम LED के सुपुर्द हो गया है.
OLED स्क्रीन TV: सबसे बढ़िया TV में इस वक़्त की सबसे बढ़िया डिस्प्ले टेक्नॉलजी OLED है. OLED का मतलब है Organic Light-Emitting Diode (ऑर्गैनिक लाइट इमिटिंग डाइओड). LED-LCD डिस्प्ले के उलट इस डिस्प्ले में हर एक पिक्सल के पास अपनी खुद की लाइट होती है. और हर एक पिक्सल ज़रूरत के हिसाब से बंद भी हो सकता है. इसलिए OLED स्क्रीन में डीप ब्लैक मिलता है और बहुत ही गज़ब का कॉनट्रास्ट मिलता है.
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ये है LG की OLED TV. इसकी क़ीमत 1,49,000 रुपए है.

OLED पैनल के ऊपर अंदर से लाइट मारने की ज़रूरत नहीं होती, इसलिए इनके कलर भी एकदम धांसू होते हैं. और इसी वजह से OLED TV बहुत पतली स्क्रीन के साथ आती हैं. व्यूइंग ऐंगल और पिक्चर क्वॉलिटी में ये बाक़ी स्क्रीन टेक्नॉलजी में बहुत आगे हैं मगर LCD-LED TV की तरह इनका ब्राइट्नेस लेवल इतना ज़्यादा नहीं होता. मगर चूंकि TV ज़्यादातर कमरे में ही रखी जाती हैं, इसलिए ब्राइट्नेस इतना मैटर नहीं करती.
अब चूंकि OLED स्क्रीन इतनी जबरदस्त होती हैं, तो इनका दाम भी बहुत ज़्यादा होता है. OLED TV ज़्यादातर 55-इंच या उससे भी बड़े साइज़ में आती हैं और इनको खरीदने के लिए कमज़ कम एक लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे. महंगे वाले मॉडल का दाम 5 लाख रुपए तक जाता है.
क़ीमत के अलावा भी OLED स्क्रीन की एक दिक्कत है. वो ये है कि बहुत लंबे टाइम के बाद इसके कलर और वाइब्रन्सी घटने लगती है. इसका रीज़न स्क्रीन में लगा हुआ ऑर्गैनिक मटीरियल है, जो टाइम के साथ बर्न-आउट होने लगता है. यानी कि इस्तेमाल के कुछ सालों के बाद कलर उतने अच्छे नहीं रह जाएंगे, खास तौर पर नीला कलर. वैसे नए TV मॉडल में इसमें सुधार किया गया है और स्क्रीन-टाइम को 1 लाख घंटे तक खींच दिया गया है. यानी कि अगर आप आज एक OLED TV को चलाकर छोड़ दें तो ये 11 साल तक चलेगी.
QLED स्क्रीन TV: LED से बेहतर, OLED से सस्ता
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ये है शाओमी की नई वाली QLED TV.

LED TV वो मज़ा नहीं देती और OLED बहुत महंगी होती हैं. तो ऐसे में QLED मिडल ग्राउन्ड की तरह आई है. ये LED से बेहतर है और दाम में OLED से सस्ती है. QLED TV छोटे साइज़ में नहीं आती. इनका साइज़ 43-इंच से शुरू होता है और दाम 50,000 रुपए के आस-पास होता है. अलग-अलग ब्रैंड के TV मॉडल अलग-अलग फीचर के साथ आते हैं, जिनकी वजह से इनकी कीमत के साथ-साथ इनकी पिक्चर क्वॉलिटी में भी फ़र्क होता है.
QLED का मतलब है Quantum dot (क्वांटम डॉट) LED. ये LED स्क्रीन की ही तरह हैं बस इनमें एक चीज़ एक्स्ट्रा है. पीछे लगी हुई LED बैकलाइट और आगे लगी हुए LCD पैनल के बीच में नैनो पार्टिकल की एक लेयर लगाई जाती है, जिसे क्वांटम डॉट फ़िल्टर कहते हैं. इसकी वजह से स्क्रीन में ज्यादा अच्छे कलर और ज़्यादा अच्छा कॉनट्रास्ट मिलता है. बहरहाल OLED की तरह QLED स्क्रीन एक-एक पिक्सल बंद नहीं कर सकती इसलिए इन पर इतने डीप ब्लैक तो नहीं मिलते मगर इनका ब्राइटनेस लेवल तगड़ा होता है.
SLED स्क्रीन TV: नई टेक्नॉलजी?
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QLED और SLED में फ़र्क.

SLED टेक्नॉलजी आपको इस वक़्त सिर्फ़ रियलमी की SLED TV में देखने को मिलेगी. वो इसलिए क्योंकि इस टेक्नॉलजी के पीछे SPD टेक्नॉलजी के चीफ़ साइंटिस्ट के साथ खुद रियलमी है. एक LED TV में जहां लाइट सोर्स के तौर पर LCD पैनल पर नीली लाइट मारी जाती है, SLED TV में RGB लाइट मारकर इसे सेफ लाइट में बदला जाता है. रियलमी का कहना है कि SLED स्क्रीन नीली लाइट को कट करके आंखों को नुकसान से बचाती है और साथ में एक नॉर्मल LED TV से कहीं ज़्यादा कलर भी दिखाती है. रियलमी की 55-इंच की SLED TV 40,000 रुपए की है.
फ्यूचर की TV स्क्रीन टेक्नॉलजी LED, QLED और OLED स्क्रीन की अपनी-अपनी खासियत हैं और अपनी-अपनी कमियां. इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए माइक्रो-LED और मिनी-LED बनाई जा रही हैं. आइडिया ये है कि TV स्क्रीन में OLED जैसी खूबी हो मगर LED जितनी सस्ती हो. खैर इनको आने में तो अभी काफ़ी सारा टाइम है. वो जब आएंगी, तब देखेंगे.

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