13 सितंबर 1992 को एक घटना हुई, जिसने उत्तर प्रदेश में अपराध और राजनीति कोएक-दूसरे में घोल के रख दिया. एक विधायक की हत्या हुई. ये उस दौर की हत्या थीजिसमें ए के-47 इस्तेमाल किया जाना शुरू हुआ था. हत्या का आरोपी राजनीति कीसीढ़ियां चढ़ता गया. मरने वाला विधायक आरोपी का राजनैतिक गुरू था. ये हत्या हुई थीदादरी के विधायक महेंद्र सिंह भाटी की. हत्या का आरोप था डी पी यादव पर. जो बाद मेंमुलायम के खासमखास बने. और इन्हीं डी पी यादव को 2012 में टिकट ना देकर अखिलेश नेअपनी साफ छवि वाली इमेज बना ली. यही इमेज लेकर अखिलेश अभी तक चल रहे हैं.अस्सी-नब्बे के दशक में गुर्जर राजनीति में दो नेता उभर रहे थे. राजेश पायलट औरमहेंद्र सिंह भाटी. राजेश पायलट का नाम केंद्र की राजनीति में थे. देश में उनकोजाना जाने लगा था. महेंद्र सिंह भाट क्षेत्र के नेता थे. चौपालों पर लोग महेंद्रसिंह भाटी को राजेश पायलट से बड़ा गुर्जर नेता मानते थे. लोग क्लेम यहां तक करते थेकि राजेश पायलट भी इस बात को मानते थे कि गुर्जरों में भाटी ज्यादा लोकप्रिय थे.क्लेम तो यहां तक होता है कि राजेश पायलट ने महेंद्र सिंह भाटी को कांग्रेस में आनेका न्यौता भी दिया था. लेकिन महेंद्र विश्वनाथ प्रताप सिंह, शरद यादव, अजीत सिंह औररामविलास पासवान के बहुत करीबी थे, इसलिए उन्होंने ये न्यौता स्वीकार नहीं किया.राजेश पायलटदेश की राजनीति का सीधा असर पड़ा यहां की राजनीति परकिसानों में महेंद्र भाटी काफी लोकप्रिय नेता थे. वो तीन बार विधायक रहे थे. नोएडा,ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ उन्होंने जमीन अधिग्रहण के विरोध में बहुत सक्रियरहे थे. लोग कहते हैं कि इस क्षेत्र में लगने वाली फैक्ट्रियों में गांवों केहजारों बेरोजगार लोगों को उन्होंने नौकरी दिलवाई थी. अपने रसूख में वो नये-नयेलोगों को अपने साथ ले आते थे. उसी दौरान डी पी यादव शराब के व्यापार के साथ राजनीतिमें आने की कोशिश कर रहे थे. 90 के दशक में जहरीली शराब से लगभग 350 लोगों की मौतहो गई थी. इसमें यादव भी फंसे थे. तो राजनीति में आना जरूरी हो गया था.डी पी यादवमहेंद्र सिंह भाटी से डी पी यादव की यारी हो गई. यादव भाटी को अपना राजनैतिक गुरुमानने लगे. दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे. भाटी ने 1988 में डी पी यादव को बिसरखब्लॉक का प्रमुख बनवा दिया. 1989 में महेंद्र सिंह भाटी ने अपने करीबी नरेंद्र भाटीको सिकंदराबाद से और डी पी यादव को बुलंदशहर से विधायक का टिकट दिलवाया. भाटी खुददादरी विधानसभा से चुनाव लड़ रहे थे. तीनों जीत भी गये. पर देश में राजनीति बदल रहीथी. इसका प्रभाव इनकी यारी पर भी पड़ा. लोकसभा और यूपी विधानसभा के चुनाव आस-पास हीहुए थे. जनता दल (नेशनल फ्रंट) के नेता वी पी सिंह 2 दिसंबर 1989 को देश केप्रधानमंत्री बने. ठीक तीन दिन बाद 5 दिसंबर 1989 को मुलायम पहली बार यूपी के सीएमचुने गए. वी पी चौधरी चरण सिंह के बेटे अजित सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे,पर मुलायम ने चिमनभाई पटेल को अपने नाम पर मना लिया. बाद में जनता दल के समर्थनवापस लेने की वजह से केंद्र में वीपी सिंह की सरकार गिर गई. वी पी सिंहलेकिन यूपी में जनता दल का साथ छूटने के बावजूद मुलायम की गद्दी सुरक्षित रही.क्योंकि मुलायम ने पैंतरा बदल लिया था. चंद्रशेखर की पार्टी के साथ हो लिये थे. तोदिल्ली में समाजवादी जनता पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई और चंद्रशेखरप्रधानमंत्री बने. मुलायम कांग्रेस के समर्थन से यूपी के सीएम बने रहे.अजित सिंहमुलायम सिंह यादव और अजित सिंह में लाइन खिंच चुकी थी. और यहीं पर डी पी यादव औरमहेंद्र सिंह भाटी के रास्ते भी अलग हो गये. डी पी यादव मुलायम के साथ चले गये.महेंद्र सिंह भाटी अजित सिंह के साथ चले गए. इसी दौरान गाजियाबाद के लोनी क्षेत्रमें महेंद्र फौजी और सतवीर गुर्जर की गैंगवार चल रही थी. डीपी यादव ने महेंद्र फौजीसे करीबी रिश्ते बना लिए. वहीं सतवीर गुर्जर महेंद्र भाटी की शरण में आ गया. डी पीका रसूख बढ़ता गया. वो मुलायम के मंत्रिमंडल में मंत्री भी बन गये. पर दादरी मेंअभी भी महेंद्र सिंह भाटी की चलती थी. डी पी इस पूरे इलाके पर अपना कब्जा चाहते थे.पॉलिटिकल कब्जा.गैंगवार से हुई शुरूआत, फिर राजनैतिक गुरु की हत्या का प्लान बना1991 के विधानसभा चुनाव में महेंद्र सिंह भाटी ने बुलंदशहर से डीपी यादव के सामनेपतवाड़ी गांव के प्रकाश पहलवान को जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़वाया. चुनाव संगीन हुआथी. इस चुनाव में जमकर गोलीबारी हुई थी. इसमें दोनों तरफ से छह-सात लोग मारे गए थे.डीपी यादव चुनाव हारते-हारते बचा था. यहीं से दुश्मनी और बढ़ गई. तो कहते हैं कि डीपी ने तय कर लिया कि अपने राजनैतिक गुरु को पॉलिटिक्स से हटाये बगैर काम नहींचलेगा.अप्रैल, 1991 में महेंद्र सिंह भाटी के छोटे भाई राजवीर सिंह भाटी की दादरी रेलवेरोड पर हत्या कर दी गई. इसमें महेंद्र फौजी और डीपी यादव के साले परमानंद यादव कानाम सामने आया. इनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ. इसके बाद दोनों गुटों में जम के गैंगवारहोने लगा. डीपी यादव के कई करीबी लोगों की हत्या हुई. इसमें सतवीर गुर्जर का नामआया था.इसके बाद फरवरी 1992 को गाजियाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीण भाटी की बरौला मेंसड़क हादसे में मौत हुई. दो ट्रकों के बीच टक्कर से प्रवीण भाटी के मरने पर परिजनोंको शक था कि महेंद्र भाटी ने हादसे का रूप देकर हत्या कराई है. उसके चलते ही परिवारके लोग डीपी यादव से मिल गए. कहा जाता है कि तय हुआ कि जड़ ही काट दी जाए. रोज-रोजका टंटा कौन रखेगा. चुनाव लड़ने के लिए पब्लिक की जरूरत तो है नहीं. विरोधियों कोही निपटा दिया जाये. ये नये भारत की तस्वीर थी. 13 सितंबर, 1992 को दादरी विधानसभाके विधायक महेंद्र सिंह भाटी कुछ लोगों के संग अपने घर पर बैठे थे. शाम के करीबसाढ़े छह बजे इंस्पेक्टर तिवारी का फोन आया, जिन्होंने उन्हें भंगेल बुलाया. गंभीरबात लग रही थी. तो महेंद्र सिंह गनर कौशिक और ड्राइवर देवेंद्र के साथ कार से निकलपड़े. रास्ते में उन्होंने दोस्त उदय प्रकाश आर्य को भी साथ ले लिया. जबकि भाटी केभाई अनिल भाटी अपने दोस्त धनवीर के साथ बाइक पर कार के पीछे चल रहे थे.भंगेल रोड पर रेलवे फाटक बंद होने के कारण उनकी कार रुक गई. जब फाटक खुला तो सामनेदो कारें खड़ी थीं. दरवाजा खोले हुए. महेंद्र सिंह भाटी को अनुमान हो गया कि कुछहोने वाला है. पर संभलने का मौका नहीं मिला. क्योंकि कार वाले इरादा बनाकर आये थे.कुछ सोचना नहीं था. ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी. विधायक महेंद्र और उदय प्रकाश कीमौके पर ही मौत हो गई. गनर गोली लगने से घायल हो गया था. जबकि चालक देवेंद्र बचकरभाग निकला था.हत्या की शंका थी, महेंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में मुद्दा उठाया थामहेंद्र सिंह भाटी को अपने खिलाफ चल रही साजिश का पता चल गया था. उन्होंने जून 1992में विधान सभा सत्र में लिखित सवाल करते हुए कहा था कि राजनीतिक कारणों से उनकीहत्या हो सकती है. पुलिस, प्रशासन उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करा रहा है. सुरक्षानहीं मिली तो अगले सत्र में मेरी शोकसभा होगी. इसके बाद भी कल्याण सिंह सरकार नेउन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई थी. तीन माह बाद उनकी हत्या हो गई.फिर आरोप दाखिल हुए. आरोप लगा प्रवीण के पिता तेजपाल भाटी, उसके भाई प्रणीत भाटी,लक्कड़पाला, करण यादव और डीपी यादव पर. अगस्त, 1993 में तत्कालीन राज्य सरकार कीसिफारिश पर मामले की जांच सीबीआई को दी गई थी. सीबीआई ने इनके खिलाफ चार्जशीट फाइलकर दी. केस चलता रहा. 2000 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ये केस सीबीआई देहरादूनको ट्रांसफर कर दिया गया. क्योंकि आरोप लग रहा था कि अगर यूपी में ट्रायल होंगे तोडी पी यादव अपने रसूख का इस्तेमाल कर बच जाएगा.28 फरवरी 2015 को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही की अदालत ने डी पीयादव को उम्रकैद की सजा सुनाई. इनके साथ ही चार और को भी उम्रकैद मिली. अभियुक्तोंपर कुल तीन लाख 90 हजार रुपये का फाइन भी लगाया गया. महेंद्र सिंह भाटी के बेटेसमीर भाटी ने इस फैसले पर खुशी जताई थी. कहा कि देर से ही सही, फैसला हुआ तो.आज तक से साभारसतवीर गुर्जर और महेंद्र फौजी अलग-अलग एनकाउंटर में मारे गये थे.बेटे समीर भाटी तलाश रहे हैं जमीन, पर सपा यहां अब तक जीत नहीं पाई हैमहेंद्र सिंह भाटी की हत्या के बाद गुर्जर राजनीति पूरी तरह राजेश पायलट केइर्द-गिर्द घूमने लगी थी. हालांकि 2000 में राजेश पायलट की भी सड़क हादसे में मौत होगई थी. इसके बाद कई गुर्जर नेता निकले. महेंद्र भाटी और राजेश पायलट की मौत के बादकई गुर्जर नेताओं ने चुनाव लड़ा. सांसद, विधायक बनने के बाद मंत्री भी बने, परगुर्जर नेता का रुतबा कोई हासिल नहीं कर पाया.महेंद्र सिंह भाटी के बेटे समीर भाटी ने सबसे पहले 1993 में जनता दल के टिकट परदादरी से चुनाव लड़ा. इसमें वो जीत गये थे. फिर 1996 में सपा, 2002 में निर्दलीय और2007 में रालोद से लड़े थे. तीनों में ही हारे थे. समीर भाटी 2012 में कांग्रेस सेलड़े थे. पर तीसरे नंबर पर रहे थे. समीर भाटी निर्दलीय चुनाव लड़कर भी हर बार पच्चीससे तीस हजार वोट हासिल करते हैं. दो लाख मतदाता हैं इस विधानसभा में. एक लाख गुर्जरहैं. तो गुर्जर वोटों का भरोसा रहता है. इस बार कांग्रेस ने अभी तक क्लियर नहींकिया है. सपा के साथ गठबंधन के लिए रुकी हुई है. कुछ कहा नहीं जा सकता कि समीर कोटिकट मिलेगा कि नहीं. दादरी से वर्तमान विधायक सतबीर गुर्जर हैं. ये बसपा के टिकटपर आये थे. 2017 में भी इसे बसपा से टिकट मिल गया है. सपा दादरी से कभी नहीं जीतीहै. इस बार सपा-कांग्रेस ने समीर को ही टिकट दिया है.-------------------------------------------------------------------------------- मुख्तार अंसारी बनाम ब्रजेश सिंह: यूपी का सबसे बड़ा गैंगवारकौन है ये मोईन कुरैशी, जो भैंस का मीट बेचकर करोड़ों रुपये विदेश में रख रहा है?https://youtu.be/AJCmImuMRM8