सरफ़राज जैसे 'अनफ़िट' क्रिकेटर्स के साथ क्या समस्या है?
टीम इंडिया को क्रिकेटर चाहिए या मॉडल?
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सरफ़राज खान. लगातार चर्चा में हैं. चर्चा की वजह- लगातार रन बनाकर भी उनका टीम इंडिया से दूर होना. सरफ़राज के टीम में ना होने की कई वजहें गिनाई जा रही हैं. कोई कहता है कि टीम में जगह नहीं है. तो कोई कहता है कि सरफ़राज की फिटनेस उनके खेल के आड़े आ रही है.
फिटनेस के चलते सरफ़राज को मौका नहीं मिल पा रहा. और इस फिटनेस की बहस में पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी कॉमेंट किया है. गावस्कर के कॉमेंट्स के बाद हमने सोचा कि आज इसी मसले पर चर्चा कर ली जाए. क्रिकेट खेलने के लिए किसी खास शारीरिक संरचना की कितनी जरूरत है. तो चलिए, शुरू करते हैं. सनी गावस्कर के क़ोट से.
'सरफ़राज खान क्रिकेट खेलने के लिए फिट हैं. अगर सेलेक्टर्स को स्लिम लोग चाहिए, वो फैशन शो में जाएं और कुछ मॉडल्स को सेलेक्ट कर लें. सेलेक्शन रन्स पर आधारित होना चाहिए, साइज़ पर नहीं.'
गावस्कर के नाम टेस्ट क्रिकेट में हजारों रन और दर्जनों शतक हैं. यानी उनकी बात में वजन होना चाहिए. लेकिन क्या ये पूरी तरह से सही है? क्या सच में साइज़ मैटर नहीं करता. इस मामले पर ज्यादा जानकारी हमें मिली क्रिकेट मंथली में छपे फिरदौस मूंडा के एक आर्टिकल में. मूंडा से बात करते हुए पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट फिटनेस ट्रेनर ग्रेग किंग ने कहा था,
'शरीर में मौजूद एक्स्ट्रा फैट सिर्फ लंबी दूरी की तैराकी में मदद कर सकता है. क्योंकि यह उछाल और इंसुलेशन में मदद करता है. इससे आप गेंद को बहुत दूर नहीं मार सकते, या ना ही आप इससे गेंद को तेजी से फेंक सकते हैं. ना ही यह आपको फील्ड में तेज रहने में मदद करेगा, यह आपको विकेट्स के बीच तेज दौड़ने में भी मदद नहीं करेगा. यह आपको स्लो ही करेगा. और आपके जॉइंट्स पर ज्यादा स्ट्रेस डालेगा. इसलिए, इसमें ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है कि एक हद तक पतला होना, अच्छी बात है.'
यानी जाहिर तौर पर क्रिकेट में साइज मैटर करता है. लेकिन कितना? और इसके लिए क्या कोई लिखित नियम है? बकौल किंग,
'हम एक खास स्पोर्ट खेल रहे लोगों को लेते हैं. कुछ वक्त तक उनका आंकलन करते हैं और फिर देखते हैं कि ऐवरेज स्कोर क्या है. इससे हम एक स्टैंडर्ड तय करते हैं और उम्मीद करते हैं कि उस खेल के ज्यादातर एथलीट्स उस लेवल के आसपास रहें.'
यानी इस खेल में फिटनेस का अहम रोल है. स्किल्स के साथ फिटनेस भी मायने रखती हैं. और सरफ़राज की स्किल्स पर तो किसी को शक़ है नहीं. बात फिटनेस की करें, तो कहीं ना कहीं बाहर से देखने में वह गड़बड़ लगते हैं. इस स्किल और फिटनेस पर ऐसे ही एक ओवरवेट करार दिए गए प्लेयर ने भी कुछ कहा था. पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मोईन खान के बेटे आज़म खान ने ऐसी बहस पर कहा था,
'अगर एक सुपर-फिट इंसान सीजन के 400 रन बना रहा है. और दूसरा, जो सुपर-फिट नहीं है लेकिन 800 रन बना रहा है, तो मैं 800 वाले को ही अपनी टीम में रखूंगा.'
इस बहस पर किंग का मत अलग है. वह कहते हैं,
'ऐसा नहीं है कि स्किलफुल क्रिकेटर सफल नहीं होगा. लेकिन अगर आप उस स्किल के साथ फिटनेस को मिला देते हैं, तो आप उन स्किल्स को ज्यादा देर तक दिखा पाएंगे. और आप उन स्किल्स को और बेहतर इंटेंसिटी के साथ दिखाते हुए कम चोटिल होंगे. हमने सालों तक ऐसे लोगों को देखा है जो पूरी तरह फिट ना होते हुए भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं.
लेकिन सवाल ये है कि बेहतर फिटनेस के साथ कोई बंदा और कितना बेहतर हो सकता है? क्योंकि क्रिकेट में स्किल्स बहुत जरूरी हैं, इसमें आप बहुत अच्छी फिटनेस ना होते हुए भी सफल हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप फिटनेस के मामले में जैसे हैं उससे बेहतर नहीं हो सकते.'
इन तमाम चर्चाओं के बाद एक चीज तो समझ आती है कि फिटनेस बहुत जरूरी है. और इसके नियम लगभग सभी के लिए एक समान हैं. ऐसे में सरफ़राज के शरीर की आड़ लेकर उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए. और सरफ़राज तो दावा भी करते हैं कि उन्होंने यो-यो टेस्ट क्लियर कर रखा है. ऐसे में यहां फिटनेस का इशू तो दिखता नहीं.
भले ही वह मॉडल जैसे नहीं दिखते, लेकिन वह मैच फिट हैं. और अगर वह इन फॉर्म और मैच फिट हैं, तो उन्हें मौका मिलना ही चाहिए. लेकिन किंग की बातों को ध्यान में रखते हुए सरफ़राज को भी सोचना चाहिए. और अपने शरीर पर काम करना चाहिए. हमारे सामने केशव महाराज और आज़म जैसे कई उदाहरण हैं. केशव ने तो अपना पूरा शरीर ही बदल लिया. और आज़म ने भी एक दफ़ा साल भर में 30 किलो वजन कम किया था. अगर सरफ़राज ऐसा करेंगे, तो उनका ही फायदा होगा.
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