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कभी वजन कम करने पहुंचा लड़का, जिसने भाला फेंक पूरी दुनिया हिला दी!

क्या नीरज चोपड़ा बचपन से ही एक जैवलिन थ्रोअर बनना चाहते थे? और उनके यहां तक पहुंचने का सफर कैसा रहा?

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सूरज पांडेय
| रविराज भारद्वाज
28 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 28 अगस्त 2023, 01:54 PM IST)
Neeraj chopra, World atheletics championship, Gold medal in World championship
Tokyo2020 Olympics और वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा से लोगों को काफी उम्मीदेें हैं (AP)
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शब्द खत्म हो गए हैं.  नीरज चोपड़ा ( Neeraj Chopra) वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में  गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं. नीरज ने ये उपलब्धि 27 अगस्त को देर रात खेले गए फाइनल मुकाबले 88.17 मीटर तक भाला फेंक कर हासिल की. इससे पहले नीरज ने टोक्यो ओलंपिक्स (Tokyo Olympics) में गोल्ड जीत इतिहास रच दिया था. वो ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय खिलाड़ी बने थे. 

नीरज ने इससे पहले पिछले साल आयोजित हुए वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी सिल्वर मेडल हासिल किया था. जबकि डायमंड लीग में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता था. मौजूदा समय में नीरज दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी भी हैं. लेकिन क्या नीरज चोपड़ा बचपन से ही एक जैवलिन थ्रोअर बनना चाहते थे? और उनके यहां तक पहुंचने के सफर कैसा रहा? पूरी कहानी जानते हैं.

कौन हैं नीरज चोपड़ा?

नीरज चोपड़ा न सिर्फ इंडिया बल्कि पूरी दुनिया में टॉप के प्लेयर हैं. वर्ल्ड रैंकिंग देखेंगे तो नीरज टॉप पर हैं. लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. नीरज ने बचपन में जो सपने देखे थे, उनमें भाला फेंकना दूर-दूर तक नहीं था. नीरज क्या उनका परिवार भी नहीं जानता था कि भाला फेंकने जैसा भी कोई खेल होता है. लेकिन कहते हैं ना, कई बार अनजान लोग ही बड़ा काम कर जाते हैं. पानीपत के रहने वाले नीरज के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. बचपन में नीरज का वजन काफी ज्यादा था. 

आज से लगभग 12 साल पहले की बात की. नीरज के बढ़ते वजन से परेशान घरवालों ने उन्हें जिम भेजना शुरू किया. लेकिन कुछ ही दिन बाद मामला गड़बड़ाया और किन्हीं कारणों के चलते नीरज का जिम जाना बंद हो गया. अब घरवाले परेशान. ऐसे में उन्होंने अपने लाडले को फिट रखने के लिए उसे स्टेडियम भेजने का फैसला किया. यहां नीरज वॉक करने लगे. ऐसे ही एक दिन यहां उनकी मुलाकात कुछ एथलीट्स से हुई. और जैसा कि सब जानते हैं, 'हरियाणा में सिपाही और एथलीट सबसे ज्यादा मिले हैं.' और इनके साथ का प्रभाव तो पत्थर को भी बदल देता है. बस इनसे प्रेरित होकर नीरज ने भी एथलीट बनने का फैसला कर लिया.

नीरज ने जीता गोल्ड मेडल (AP)



अब फैसला तो कर लिया, लेकिन खेल कौन सा खेलें? इन्होंने तो मैदान को कभी उस नज़र से देखा ही नहीं था. ऐसे में प्लान बना कि सब ट्राई करके फिर बेस्ट चुनेंगे. तमाम ट्रायल्स के बाद नंबर आया भाला फेंक का. नीरज के लिए ये खेल अद्भुत ही था. 12-13 साल के नीरज ने इससे पहले पत्थर और डंडे तो खूब फेंके थे, लेकिन भाला फेंकना उनके लिए एकदम नई चीज थी. ये कुछ ऐसा ही था जैसे थॉर ने कैप्टन अमेरिका के हाथ में पहली बार अपना हथौड़ा दे दिया हो. और अब कैप्टन अमेरिका ने हथौड़ा उठा लिया है तो-

कहइ रीछपति सुनु हनुमाना। का चुप साधि रहेहु बलवाना?

अर्थात- रीछपति (जामवंत) ने कहा कि सुनो हनुमान, हे बलवान तुम चुपचाप क्यों खड़े हो? बस, नीरज ने ये उठाया भाला और फेंका सागर पार. अरे मतलब एकदम से सागर पार ही नहीं फेंक दिया, लेकिन इतनी दूर जरूर फेंका कि वहां मौजूद सारे लोग दंग रह गए. बस, नीरज का करियर तय करने के लिए इतना काफी था. अगले ही साल नीरज ने स्टेट लेवल जूनियर चैंपियनशिप और फिर जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल्स जीत लिए. 

    गोल्ड मेडल के साथ नीरज चोपड़ा (AP)
खास क्यों हैं नीरज?

साल 2013-14 तक भारतभूमि पर नीरज का भौकाल सेट हो चुका था. लेकिन विश्व जीतना अभी बाकी ही था. फिर आया साल 2016. जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप पोलैंड में होनी थी. नीरज वहां के लिए निकले. और उनके इस निकलने में परिवार और जानने वालों का बड़ा मासूम सा भाव था- नया अनुभव मिलेगा. लेकिन नीरज के इरादे कुछ और ही थे. अंग्रेजी में कहते हैं ना- He is built Different. बस वही वाला. नीरज ने यहां 86.48 मीटर तक भाला फेंक दिया. और इसी के साथ बन गया नेशनल नहीं, वर्ल्ड रिकॉर्ड. नायब सूबेदार नीरज से पहले जूनियर लेवल पर इतनी दूर तक कोई भाला नहीं फेंक पाया था. जी हां, 2016 की वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद ही सेना ने नीरज को जूनियर कमीशंड ऑफिसर बनाते हुए नायब सूबेदार की पदवी दे दी थी. हालांकि इस वर्ल्ड रिकॉर्ड के बाद भी नीरज 2016 रियो ओलंपिक्स में नहीं खेल पाए. दरअसल रियो के लिए क्वालीफाई करने की कट ऑफ डेट 11 जुलाई थी और नीरज ने यह कारनामा 23 जुलाई को किया था. 

जूनियर लेवल पर धमाल करने के बाद नीरज ने सीनियर लेवल पर खेलना शुरू किया. यहां उन्होंने साउथ एशियन गेम्स, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के गोल्ड मेडल जीत लिए. फिर बारी आई टोक्यो ओलंपिक 2020 की. जहां नीरज ने 7 अगस्त 2021 को 87.58 मीटर दूर भाला फेंक इतिहास रच दिया. वो इस खेल में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय बन गए. साथ ही Olympics में व्यक्तिगत गोल्ड जीतने वाले सिर्फ दूसरे भारतीय बन गए. यहां से नीरज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अमेरिका के यूजीन में आयोजित हुई 18वीं वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 88.13 मीटर भाला फेंक कर सिल्वर मेडल जीता. वहीं  5 मई 2023 को दोहा में वांडा डायमंड लीग (Doha Diamond League ) का खिताब अपने नाम किया. अब अगले साल पेरिस ओलिंपिक्स का आयोजन होना है. जिसके लिए नीरज क्वालीफाई कर चुके हैं. ऐसे में उनके फॉर्म को देखते हुए एक बात तो तय है- एथलेटिक्स में नीरज हमारी सबसे बड़ी उम्मीद रहने वाले हैं.

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