आज एक कविता रोज़ में 'ग़ज़ल के रंग में' मुमकिन हुई चर्चित कवयित्री अजंता देव की एककविता... रात अंधेरी तारे गुम इस पल सबसे प्यारे तुमजितना हमसे दूर हुए उतने हुए हमारे तुमघास फूल चिड़िया आकाश सबमें नदी किनारे तुम अनजाने में जीत गए जान-बूझकर हारे तुम मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा मेरे पंज पियारे तुम