जिस पेस बॉलर के लिए इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने नियम बदल दिए
पेस बॉलर के नाम पर बने स्टीरियोटाइप को ठेंगा दिखाने वाला बॉलर.

साल 2013. 18 साल की उम्र का एड्रेनलिन से भरा एक लड़का अपना फ़ोन उठाता है और ट्वीट करता है - मेरी टाइमलाइन में मौजूद सभी क्रिकेटर्स दो-दो हेलमेट ख़रीद लें क्यूंकि इस साल मैं यूं ही नहीं खेल रहा हूं. 6 साल बाद वो वर्ल्ड कप टीम में शामिल हो चुका है. अपना पहला वर्ल्ड कप मैच खेलने के लिए उस मैदान में उतरा जिसमें क्रिकेट के जनक इंग्लैंड ने पहला स्वदेशी मैच खेला. वही मैदान जिसपर इंग्लैंड को इतनी बुरी हार मिली कि अगली सुबह द स्पोर्टिंग टाइम्स ने इंग्लिश क्रिकेट की मौत का शोक सन्देश छापा. ऐशेज़ का जनक - केनिंग्टन ओवल. धीमे क़दमों से क्रीज़ पर आकर गेंद में अपनी सारी ताक़त झोंक दी. ऐन आख़िरी मौके पर. ऐसे, जैसे झांसा देने की फ़िराक में हो. झांसा दे भी दिया. दायें हाथ के सबसे शांतचित बल्लेबाज़ों में से एक हाशिम आमला को फांस लिया. इससे पहले फ़ेंकी गई गेंद धीमी थी. भद्रलोक की भाषा में स्लोवर वन. इधर-उधर घूमती हुई सीम वाली गेंद को सम्मान के साथ हाशिम ने वहीं निष्क्रिय कर दिया था. लेकिन अगली गेंद पड़ते ही खड़ी हो गई. दोनों गेंदों की रफ़्तार में कुछ 30 किलोमीटर प्रति घंटा का अंतर. बल्लेबाज़ी का एक बेहद शातिर दिमाग गच्चा खा गया. जब तक आमला गेंद को बल्ले से मिलाते, उनका सर कांप चुका था. गेंद हेल्मेट पर करारी चोट कर चुकी थी. विश्व कप में 'स्मेल द फ्रिगिंग लेदर' की शुरुआत हो चुकी थी. साउथ अफ़्रीका का फिज़ियो मैदान पर दौड़ कर आया और तुरंत ही हाशिम के लिए दूसरा हेलमेट मंगवाया गया. 18 साल का लड़का अब 24 का हो चुका था. उसने एक दफ़ा फिर से सभी बल्लेबाज़ों को दो-दो हेल्मेट ख़रीद लेने का फ़रमान जारी कर दिया था.
जोफ़रा आर्चर. पेस बॉलर के नाम पर बने स्टीरियोटाइप को ठेंगा दिखाने वाला बॉलर. पेस बॉलर यानी खार खाने वाली प्रजाति. अपने ही फ़ील्डर को गालियां से तौल देने वाला इंसान. गेंद को पसीने से चमका कर बल्लेबाज़ की चमड़ी को भेद देने वाला जल्लाद. जब वो क्रीज़ की ओर दौड़े तो उसके क़दमों की थाप बल्ला पकड़े नासमझ की कान में सीटी बजा दें. लेकिन जोफ़रा आर्चर जिस तरह से रिलीज़ पॉइंट पर पहुंचते हैं, उनका रन-अप एक ट्रेडीशनल पेस बॉलर के रन-अप के मुक़ाबले मून-वॉक ही कहा जाएगा. लेकिन गेंद जिस तेज़ी से 22 गज का सफ़र तय करती है, वही आर्चर को उस काबिल बनाता है कि वर्ल्ड कप की शुरुआत से पहले ही शहर में उनके नाम के पर्चे बंट चुके हैं.

वर्ल्ड कप 2019 के पहले मैच में साउथ अफ्रीका के कप्तान फफ डु प्लेसी को आउट करने के बाद जोफ़रा आर्चर.
बारबेडस में पैदा हुए जोफ़रा के लिए 2022 से पहले इंग्लैंड की जर्सी पहन कर खेलना नामुमकिन था. उनके पिता इंग्लिश थे और उनके पास इंग्लिश पासपोर्ट भी था. लेकिन चूंकि वो 2015 तक इंग्लैंड में नहीं रह रहे थे, और इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड के नियमों के मुताबिक़ 18 साल की उम्र और उसके बाद खिलाड़ी को इंग्लैंड में ही रहना होता है, इसलिए उन्हें 7 सालों तक इंग्लैंड के लिए खेलने का मौका नहीं मिलने वाला था. इसके बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने अपने नियम बदले और 7 साल के पीरियड को 3 साल कर दिया गया. काम भी बन गया और आईसीसी के नियमों की अनदेखी भी नहीं हुई. आर्चर को इंग्लैंड के लिए पहली बार 3 मई 2019 को आयरलैंड के ख़िलाफ़ खेलते हुए देखा गया. इससे पहले ससेक्स, हॉबार्ट हरीकेंस और राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए आर्चर ने हर किसी को इम्प्रेस कर रखा था.
जोफ़रा आर्चर इस वर्ल्ड कप में वो औलाद साबित हो सकते हैं जिस पर मां को सबसे ज़्यादा गुमान होता है और वो उसकी रोटी में तिनका भर ही सही, एक्स्ट्रा घी चुपड़ देती है. और आर्चर इस दुलार के सबसे सही हक़दार भी लग रहे हैं. वो एक्स-फैक्टर साबित हो सकते हैं. डेथ ओवर्स में उनकी स्पीड और साथ ही स्पीड में वेरिएशन सामने वालों को छका सकती है. गेम में उनका नया होना उनके हक़ में जा सकता है. वो अपने तरीके से गेंदें फेकेंगे. वो तरीके जो अभी तक उनके दिमाग में ही हैं. या शायद वहां भी नहीं. सचिन तेंदुलकर हमेशा कहते थे कि बल्लेबाज़ी में आधा काम तो बॉलर के दिमाग को पढ़ना ही होता है. आर्चर का दिमाग इस वक़्त क्रिकेट के मैदान में सबसे नई चीज़ है. अवन फ्रेश. उसे अभी तक किसी ने नहीं पढ़ा है. किसी भी ड्रेसिंग रूम में कोई भी ब्लू-प्रिंट नहीं है जो ये दावा करता हो कि उसके पास आर्चर का तोड़ है. इंडियन टीम आर्चर को कायदे से देख रही होगी. एक वक़्त पर तेज़, छोटी गेंदों से दूर भागने वाली इंडियन टीम अभी उस जर्जर हालत में नहीं है लेकिन आर्चर की चौंका देने वाली पेस कोहली और टोली से खूब सवाल पूछेगी. आबादी के उस बहुत बड़े हिस्से को, जो कि 14 जुलाई को लॉर्ड्स के मैदान में इंग्लैंड और इंडिया के मैच का सपना देख चुका है, सपने में ही आर्चर नाम के सवाल का जवाब भी ढूंढ लेना चाहिए और उसे कोहली के कानों में फुसफुसा देना चाहिए.
इतिश्री जोफ़रा आर्चर कथा.
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