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'उड़ता पंजाब' छोड़िए, पाकिस्तान में सब इस शो को बैन करना चाहते हैं

सच का ओवरडोज ओहदेदारों को बर्दाश्त नहीं. चमचे और दिमागी शुतुरमुर्ग हर जगह पाए जाते हैं.

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उडारी
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कुलदीप
20 जून 2016 (अपडेटेड: 20 जून 2016, 11:34 AM IST)
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इम्तियाज ने ज़ेबो के नन्हे हाथ अपने हाथों में ले लिए हैं. ये सीन यहां तक मासूम मालूम होता है. लेकिन जी धक्क को हो जाता है जब मर्द की खराब नीयत खुलती है. नीयत, जिसमें वासना, भूख और लालच एक दूसरे में लिपटे हुए हैं. बच्ची पर उसकी सुस्त-मादक नजरें और सेक्शुअल अंडरटोन वाली उसकी भाषा एक पल में उसे सज्जन स्नेही पिता से एक वहशी में बदल देती है. आपका धीरज यहां जवाब दे जाता है. आपका भी और पेमरा का भी. आप इम्तियाज जैसे पापाओं, मामाओं और फूफाओं के लिए नफरत से भर जाते हैं. लेकिन पेमरा को उस टीवी शो पर गुस्सा आ रहा है, जिसमें ये सब दिखाया जा रहा है.

पेमरा बला क्या है?

यह पहलाज निहलानी निर्देशित भारतीय सेंसर बोर्ड का पाकिस्तानी सगा भाई है. न CBFC इकलौता है. न 'उड़ता पंजाब' अकेली शिकार है. पाकिस्तान में भी बराबर मगजमूढ़ हैं.
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पाकिस्तानी टीवी शो 'उडारी' की कहानी बच्चों के सेक्शुअल हैरेसमेंट और अब्यूज पर है. लेकिन वहां इसे बैन करने की सरकारी धमकी दी गई. इत्तेफाक देखिए, इसका शाब्दिक अर्थ होता है, 'उड़ान', जो 'उड़ता पंजाब' की यूं भी याद दिलाता है.

उनका दावा?

'पेमरा' को लगता है कि उडारी के सीन 'अनएथिकल' और 'ऑफेन्सिव' हैं. यानी 'अनैतिक और अपमानजनक.' कह रहे हैं कि हमें पेरेंट्स से काफी शिकायतें मिली हैं. लेकिन पाकिस्तान में कई टीवी शोज हैं जिनमें अकसर वयस्कों से रेप और हैरेसमेंट की घटनाएं दिखाई जाती हैं. फिर 'उडारी' ही इनके निशाने पर क्यों है? बाकी शोज में ज़ुल्म सहने वाली औरत के साथ अत्याचार दिखाया जाता है. ये किरदार वयस्क एक्टर निभाते हैं, जिन्हें देखने में न वयस्कों को दिक्कत है, न पेमरा को.
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फिर क्या पेरेंट्स से शिकायतों मिलने की बात झूठ है?

नहीं. पाकिस्तान और हिंदुस्तान की सोसाइटी में ज्यादा फर्क नहीं है. दोनों जगह सैनिटरी नैपकिन काली पन्नी में बेचे जाते हैं और घरेलू महफिलों में भी औरतें ग्लास पर टिशू पेपर लगाकर व्हिस्की पीती हैं. बहुत सारी चीजें इस तरफ भी- उस तरफ भी 'मना' हैं. इसलिए व्याभिचारी रिश्तेदारों की हरकतें दबाकर रखे जाना ही ठीक समझा जाता है.
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पेमरा बड़ी चालाकी से पेरेंट्स की शिकायत को आधार बनाकर अपना पर्दावादी एजेंडा आगे बढ़ा रहा है. क्या पता कि छेड़छाड़ करने वालों में कितने लोग खुद 'चाइल्ड अब्यूज' कर चुके हों और इसे हाईलाइट किए जाने से असहज हों. हो सकता है कि उनमें कुछ नैतिकतावादी मामा, चाचा और पड़ोसी हों जो 'उडारी' से डर गए हों. इनमें वे लोग भी हो सकते हैं जो न चाहते हों कि बच्चे/बच्चियां गलत के खिलाफ बोलने की हिम्मत और आत्मविश्वास हासिल करें. 'चाइल्ड अब्यूज' सच है. उसी तरह, जैसे पंजाब में नशे का फलता-फूलता कारोबार. लेकिन चमचे और दिमागी शुतुरमुर्ग हर जगह पाए जाते हैं. https://www.youtube.com/watch?v=kzhqedPKr-k

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