The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • what are lab grown diamonds how are they better from natural ones

लैब में बन रहा है सस्ता हीरा, खदान वाले हीरे से इतनी सस्ती कीमत में मिलेगा!

ये हीरा देखकर कोई कुछ बोल ही नहीं पाएगा!

Advertisement
what are lab grown diamonds how are they better from natural ones
क्या है लैब ग्रोन डायमंड (सांकेतिक फोटो)
pic
ज्योति जोशी
2 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 3 फ़रवरी 2023, 02:09 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

मार्केट में बेशकीमती हीरे का कम दाम वाला सब्सटिट्यूट आया है. नाम है लैब ग्रोन डायमंड (Lab Grown Diamond) यानी प्रयोगशाला में पैदा हुए हीरे. ऐसा दिखता है कि कोई फरक ना कर पाए. चाहे जितना रगड़ लो, घिसट लो. चमक नहीं जाएगी. जो डिजाइन मांगोगे वो मिलेगा. अब सरकार भी इस बिजनेस को सपोर्ट कर रही है. बजट वाले भाषण में इसकी तारीफ भी की थी. निर्मला सीतारमण ने कहा कि लैब ग्रोन डायमंड टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रोजगार को बढ़ावा देने वाला सेक्टर है.

क्या है लैब ग्रोन डायमंड? 

लैब ग्रोन हीरे (LGD) वो हीरे हैं जो खदान से नहीं निकाले जाते बल्कि लैब में तैयार किए जाते हैं. ये देखने में असली हीरे जैसे ही होते हैं. दोनों का केमिकल कंपोजिशन भी सेम होता है. लैब ग्रोन डायमंड बेचने वाली एक कंपनी एस्ट्रेला के को-फाउंडर समय महेंद्रू बताते हैं, 

Embed

कीमत के बारे में बात करते हुए समय बताते हैं,

Embed

लैब ग्रोन डायमंड की क्या जरूरत?

समय महेंद्रू बताते हैं,

Embed

लैब में हीरे बनते कैसे हैं?

पहले ये जान लें कि असली हीरा कार्बन से बना होता है. यानी अगर हीरे को ओवन में 763 डिग्री सेल्सियस पर गरम किया जाए, तो यह जलकर कार्बन डाई-ऑक्साइड बन जाता है. उसमें कोई राख तक नहीं बचती.

उसी तरह कार्बन को जमा करके लैब में हाई प्रेशर और हाई टेंप्रेचर के साथ ट्रीट किया जाए तो तो आर्टिफिशियल हीरा बन सकता है. इसके लिए कार्बन सीड यानि कार्बन से बने एक बीज की जरूरत होती है. उसे एक माइक्रोवेव चैंबर में रखकर डेवलप किया जाता है. तेज तापमान में गरम करके एक चमकने वाली प्लाज़्मा बॉल बनाई जाती है. इस प्रोसेस में ऐसे कण बनते हैं जो कुछ हफ्तों बाद डायमंड में बदल जाते हैं. फिर उसकी कटिंग और पॉलिशिंग होती है.

इसे बनाने के दो तरीके हैं-

-High Pressure High Temperature (HPHT)
कार्बन सीड को शुद्ध ग्रेफाइट कार्बन के साथ लगभग 1,500 डिग्री सेल्सियस तापमान और हाई प्रेशर में मिलाया जाता है.

-Chemical Vapour Deposition (CVD) 
कार्बन के सीड को कार्बन युक्त गैस से भरे सीलबंद चैंबर में करीब 800 डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है. गैस बीज से चिपक जाती है और धीरे-धीरे हीरा बन जाता है.

क्या कोई भी बना सकता है?

इस बारे में जानकारी देते हुए समय बताते हैं,

Embed

बता दें, गुजरात के सूरत को डायमंड हब माना जाता है. TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी सूरत में 25-30 फीसदी डायमंड पॉलिशिंग यूनिट लैब ग्रोन डायमंड की कटिंग-पॉलिशिंग का काम करती है. इनमें से 15 फीसदी यूनिट्स लैब ग्रोन डायमंड तैयार करती है. समय कहते हैं,

Embed

असली और लैब वाले में क्या अंतर? 
नैचुरल हीरे लैब ग्रोन हीरे
बनने में लाखों साल लगते हैंकुछ हफ्तों में ही बन जाता है
कीमत काफी ज्यादाअफोर्डेबल कीमत (75 फीसदी सस्ता)
खनन से वातावरण को नुकसानइको फ्रेंडली
रीसेल वैल्यू ज्यादा होती हैरीसेल वैल्यू कम 
सरकार भी साथ दे रही है

1 फरवरी को सरकार ने बजट पेश करते हुए बताया कि देश में लैब ग्रोन हीरों के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए किसी एक IIT को पांच साल तक रिसर्च ग्रांट दिया जाएगा. सरकार का प्रस्ताव है कि लैब ग्रोन हीरे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कार्बन सीड पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को खत्म कर देना चाहिए. फिलहाल ये 5 फीसदी है. 

वीडियो: हीरा बनते देखिए, बनाते आदिवासी किसे टक्कर देने की बात बोल रहे?

Advertisement

Advertisement

()