फेसबुक पर एक फोटो घूम रही है. कहां की है श्योर नहीं है लेकिन लोग कह रहे हैंभीलवाड़ा की है. ये नेकी की दीवार है. इसका कांसेप्ट ये है कि अगर किसी के पास जरूरतसे ज्यादा कपड़े-लत्ते, जूते-चप्पल या देने के लिए कोई भी सामान है. तो वो उस दीवारपर टंगाकर चला जाए. फिर जिनको जरूरत हो वो लेते जाएं.एक जानने वाले सईद अयूब फेसबुक पर बताते हैं. इस तरह की दीवारें ईरान की देन हैं.वैसी ही एक दीवार के बारे में जब भीलवाड़ा के एक बीमाकर्मी को पता लगा तो वो बड़ेइंस्पायर हुए. उनका नाम शायद प्रकाश नवहाल है. आरसी व्यास कॉलोनी में रहते हैं.उनने भीलवाड़ा नगर विकास न्यास के अधिकारियों से इस बारे में बात की. उनको भीआईडिया क्लिक हुआ. और भीलवाड़ा नगर विकास न्यास के सौजन्य और देख-रेख में देश मेंपहली ऐसी दीवार बनी.इस दीवार की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ी है और अब कई राज्यों में ऐसी दीवारें या तोबन चुकी हैं या बनाई जा रही हैं.facebookइलाहाबाद और बनारस में भी ऐसी दीवारें बनाई जा रही हैं. बनारस में पीएम मोदी केसंसदीय कार्यालय से थोड़ी ही दूर पर लोहे की जालियों से ऐसी ही नेकी की दीवार बनीहै. ऐसी ही दीवारें पाकिस्तान में भी बनी हैं.