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"बुर्का उतारो" - अब UP के हिन्दू कॉलेज में बुर्का पहनी छात्राओं को एंट्री से मना किया

मुरादाबाद के हिन्दू कॉलेज के बाहर बना दिया गया चेंजिग रूम

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20 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 20 जनवरी 2023, 09:48 AM IST)
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मुरादाबाद के हिन्दू कॉलेज के बाहर होता प्रदर्शन (बाएं) और चेंजिंग रूम (दाएं) | फोटो: इंडियाटुडे
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कर्नाटक के बाद यूपी में भी बुर्के को लेकर विवाद शुरू हो गया है. बुधवार, 18 जनवरी को मुरादाबाद के हिन्दू कॉलेज में बुर्का पहनकर पहुंची छात्राओं को गेट पर रोक दिया गया. इन छात्राओं ने इसके बाद करीब एक घंटे तक कॉलेज गेट पर धरना दिया. लेकिन, इसके बावजूद उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया.

घटना की सूचना मिलने पर समाजवादी पार्टी छात्र सभा के कुछ नेता कॉलेज गेट पर पहुंच गए. उन्होंने इसका विरोध किया. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इसके बाद भी जब छात्राओं ने बुरका उतारा, तब ही उन्हें अंदर जाने की इजाजत दी गई.

समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद यूथ विंग के अध्यक्ष असलम चौधरी ने कहा,

‘कॉलेज का ये नया नियम हैरान करने वाला है. इसके जरिए एक विशेष समुदाय से जुड़े लोगों को परेशान किया जा रहा है. इसके पीछे छिपा हुआ राजनीतिक मकसद है. जब सिखों को कृपाण के साथ पगड़ी पहनकर किसी भी कॉलेज में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है, तो फिर ये नियम केवल मुस्लिम महिलाओं को प्रतिबंधित करने के लिए ही क्यों हैं? हम इस कदम के खिलाफ आंदोलन जारी रखेंगे.’

कॉलेज वाले बोले- सख्त नियम, बुर्के में नहीं जाने देंगे  

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मुरादाबाद के हिन्दू कॉलेज के प्रशासन का कहना है कि कॉलेज में नया ड्रेस कोड लागू हुआ है और जो इसका पालन करेगा, वही प्रवेश कर सकेगा.

चीफ प्रॉक्टर डॉ एपी सिंह ने बताया,

'हिन्दू कॉलेज ने 1 जनवरी, 2023 से एक सख्त ड्रेस कोड लागू किया है और प्रत्येक छात्र को इसके बारे में पहले ही बता दिया गया है. हमने फैसला किया है कि बिना कॉलेज यूनिफॉर्म पहने किसी भी स्टूडेंट को परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा.'

एपी सिंह ने आगे बताया,

'नए ड्रेस कोड के मुताबिक कैंपस में बुर्के की इजाजत नहीं है. हमने एक विशेष चेंजिंग रूम की व्यवस्था भी की है, जहां बुर्का पहनने वाली छात्राएं इसे उतारकर यूनिफॉर्म में कॉलेज जा सकती हैं. जब वे कॉलेज से बाहर आती हैं, तो फिर चेंजिंग रूम में जाकर अपना बुर्का पहन सकती हैं.'

कर्नाटक से शुरू हुआ विवाद

कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद की शुरुआत जनवरी 2022 में हुई थी. यहां उडुपी के एक सरकारी कॉलेज में 6 छात्राओं ने हिजाब पहनकर कॉलेज में एंट्री ली थी. कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं को हिजाब पहनने के लिए मना किया, लेकिन वे फिर भी पहनकर आ गईं. कॉलेज की ओर से कड़ा विरोध जताए जाने पर इन लड़कियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज करवाया.

इसके बाद कर्नाटक से लेकर पूरे देश में हिजाब को लेकर विवाद शुरू हो गया. स्कूलों में हिजाब के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन किए गए. इसके बाद यह मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली विभिन्न याचिकाओं को खारिज कर दिया और कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम की एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को इस मामले में खंडित फैसला सुनाया था.

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