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महिला आरक्षण से नाराज उमा भारती कड़वी बात बोल गईं, PM मोदी ने उम्मीद नहीं की होगी

उमा भारती ने इस मुद्दे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है. पत्र में उन्होंने मांग की है कि महिला कोटे की आधी सीटें SC/ST और OBC के लिए आरक्षित की जाएं.

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21 सितंबर 2023 (पब्लिश्ड: 07:37 PM IST)
uma bharti says she is disappointed as there is no obc quota in women reservation bill
उमा भारती ने कहा कि पंचायती राज और स्थानीय निकायों में OBC वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान है. (फोटो- आजतक/PTI)
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महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) को लेकर बीजेपी नेता उमा भारती (Uma Bharti) का बयान सामने आया है. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो विधेयक में एक बात से निराश हैं. उमा भारती ने बताया कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने वाले विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए कोटा नहीं रखा गया है. उन्हें इस बात से काफी निराशा है.

पीएम को लिखा पत्र

उमा भारती ने इस मुद्दे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा. पत्र में उन्होंने मांग की है कि महिला कोटे की आधी सीटें SC/ST और OBC के लिए आरक्षित की जाएं. साथ ही उन्होंने मुस्लिम समुदाय की पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी इसका लाभ देने की बात कही.

उमा भारती ने समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया. लेकिन उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि अगर हम OBC महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित नहीं करते हैं, तो बीजेपी से उनका विश्वास टूट जाएगा. उन्होंने कहा कि पंचायती राज और स्थानीय निकायों में OBC वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान है.

पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में बताया है कि जब इस तरह का बिल लोकसभा में एचडी देवगौड़ा की सरकार में पेश किया गया था, तो वो तुरंत इसका विरोध करने और बदलाव की मांग करने के लिए खड़ी हो गई थीं. जिसके बाद बिल को स्थायी समिति के पास भेज दिया गया था.

उमा भारती ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा,

“जब OBC के लिए कुछ करने का समय आया तो हम पीछे हट गए… मुझे विश्वास था कि प्रधानमंत्री इसका ध्यान रखेंगे. मैंने सुबह प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और विधेयक पेश होने तक चुप्पी साधे रखी."

इतना ही नहीं, सनातन धर्म के बारे में नेताओं द्वारा दिए गए विवादास्पद बयानों पर बोलते हुए उमा भारती ने कहा कि वो उस विचारधारा से हैं जिसने दशकों पहले तमिलनाडु में "जटा काट दो और तिलक मिटा दो" आंदोलन शुरू किया था. लेकिन आंदोलन में लोगों को शिखा पहनने या तिलक लगाने या 'जनेऊ' पहनने से नहीं रोक सका, न ही इसने किसी को मंदिर जाने से रोका.

उन्होंने आगे कहा कि जब सनातन धर्म को वहां कोई नुकसान नहीं हुआ है, तो वो इस बहस को राजनीतिक मंच से क्यों उठा रहे हैं? बेहतर होगा कि सनातन धर्म के मुद्दे को देश के शंकराचार्यों पर छोड़ दिया जाए.

(ये भी पढ़ें: मोदी सरकार महिला आरक्षण लाई, लेकिन लागू कब होगा? ये ट्विस्ट जानना बहुत जरूरी)

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