भाई को लिपस्टिक लगाने पर छक्का कहा गया, फिर लड़की ने जो किया उसके लिए सैल्यूट बनता है बॉस!
दुनिया टूट पड़ी थी उसपर, फिर लड़की ने सोचा इनकी ऐसी तैसी...

ये कुछ ऐसे कमेंट हैं जो प्रथम दृष्टया तो सामान्य लगते हैं लेकिन हैं बहुत ही सेक्सिस्ट. हम महिलाओं को कैसे ट्रीट करते हैं, न केवल इससे हमारी मानसिकता और लिंग के प्रति हमारी पूर्वधारणाओं का पता चलता है बल्कि कई बार पुरुषों और अन्य जेंडर्स के प्रति हमारा रवैया हमारे और हमारे समाज के बारे में बहुत कुछ कह जाता है."लड़कियों की तरह रो रहे हो?"
"कैसा मर्द है बीवी को काबू में नहीं रख सकता?"
"हमने तो अपनी बेटी को भी बेटे की तरह पाला है."
ऐसे में इलाहाबाद जैसे शहर में किसी लड़के के लिपस्टिक लगाने पर घरवालों का उसे टोककर और डांटकर और पीटकर उसे ‘सही रास्ते में ले आना’ बहुत ही सामान्य बात होती. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. और जो हुआ वो क्रांति थी. बिना तलवारों के बिना मशाल के एक क्रांति.गणित की टेक्स्ट बुक में राम किसी काम को 7 दिन में और सीता उसी काम को 14 दिन में करती है.
हिंदी की एलीमेंट्री किताब में 'राम दूध पी, सीता पानी ला' जैसी सेक्सिस्ट बातें सामान्य लगती हैं.
बच्चों के स्कूल बैग, टिफन बॉक्स और वाटर बोतल तक में आप इस जेंडर बायस्डनेस को देख सकते हैं.
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इलाहाबाद के इस नौ साल के लड़के को लिपस्टिक लगाने के लिए उसके दोस्तों(?) से लेकर उसके घरवालों ने तक चिढ़ाना, डराना और धमकाना शुरू कर दिया, जिससे वो 'सही रास्ते में' आ सके.
लेकिन इसके बाद उसके भाई-बहन उसके समर्थन में कूद पड़े. क्या भाई, क्या बहन, सब ने उस बच्चे के समर्थन में अपने होठों में लाल लिपस्टिक लगा ली. इतनी लाल कि कोई इग्नोर कर ही न पाए. उसके बाद शुरू हुआ फोटो सेशन का दौर. और अंत में इन फ़ोटोज़ को उसकी एक कज़िन बहन दीक्षा बिजलानी ने ट्वीट भी कर दिया.
दीक्षा ने ट्वीट में लिखा -
मेरा कज़िन घर में सबसे ज़्यादा जनाना है. वो नेल पॉलिश लगाना, लिप कलर लगाना, होम साइंस सीखना पसंद करता है. इसके चलते अक्सर वो पितृसत्तात्मक घर में मज़ाक का पात्र बनता है. आज जब उसने लिपस्टिक लगाई तो उसे सबने छक्का कहा.
अपने होठों को कैमरे और अपनी मां से छुपाने के चक्कर में वो पर्दे के पीछे और बिस्तर में छुप गया. ज़्यादातर माएं ही इस बात पर ‘शर्मिंदगी’ महसूस करती हैं कि उनका कठोर, मर्द बेटा मेकअप कर रहा है, या कोई जनाना चीज़ कर रहा है.My cousin, 9, is the most “effeminate” in the house. Let’s call him Little Cuz. Loves to paint nails, wear lipcolour, learn home science! But in this stereotypical alpha male-centric household he’s often the pivot of jokes. Today he applied lipcolour & got called a “chakka” (1/n) pic.twitter.com/mZ2FplPNyP
— Diksha Bijlani (@BijlaniDiksha) 18 June 2018
So he hid behind the curtain & under the bed, shielding his lipcoloured face from the camera & from his mom. Somehow it is always the moms that feel most “embarassed” with their masculine, hardy sons trying makeup. Or anything feminine. (2/n) — Diksha Bijlani (@BijlaniDiksha) 18 June 2018जब मेरे कज़िन ने मेरे भाई को लिपस्टिक लगाए हुए देखा तो अपने को सशक्त महसूस किया.
दीक्षा ने एक दो ट्वीट नहीं किए, कई ट्वीट की सीरीज़ चलाई और उसमें भी जेंडर-न्यूट्रेलिटी, पितृसत्ता और मानसकिता की बात की. ये ट्वीट की पूरी ट्रेल काफी वायरल हो रही है. ट्वीट में एक इमोशनल कर देने वाला रिप्लाई ट्वीट पढ़िए -In such a house it takes constant work as elder cousins to undo the conditioned gender binary,normalise gender neutral acts which are deemed feminine. So we all wore lip color to make him comfortable & accepted. He felt a specially empowered when he saw my brother wearing it(3/n) pic.twitter.com/aixXrfMpbw
— Diksha Bijlani (@BijlaniDiksha) 18 June 2018
उसे (अपने कज़िन को) बताएं कि यूके से एक क्विर (समलैंगिक) मानता है कि वह अविश्वसनीय है. वह सुंदर है और उसे हमारा समर्थन है. इस पोस्ट ने वास्तव में मुझे भावनात्मक बना दिया. इस व्यक्ति की बहादुरी को संबल देने के लिए आप (दीक्षा) को भी शुभकामनाएं.
Tell him that a queer white kid from the UK thinks he’s incredible. He’s beautiful, seen and supported, this post genuinely made me emotional. Bless you for helping strengthen the bravery it takes for this individual to be just who they are pic.twitter.com/qYSKp22vZ6 — NicoleKayleighAmber (@ThePrettyVacant) 20 June 2018
अगर ऐसी ही छोटी छोटी क्रांतियां होती रहें तो आज नहीं तो कल ‘वर्जनाएं’ नॉर्म्स बन जाएंगी. पहले कुछ लोगों को तो हमेशा प्रताड़नाएं झेलनी ही पड़ती हैं. वो दरअसल नींव की ईंट होते हैं. लेकिन उनपर भविष्य के समाज की ऊंची इमारतें बनती हैं. ये उनकी निडरता है कि वो पहले कुछ लोग होना चुनते हैं. शाबाश लिटिल कुज़, शाबाश दीक्षा, कि तुमने ‘पहले कुछ’ होना चुना!I never Tweet but could not resist. This made me cry. Keep up the great work being the amazing example that you are.
— SylviaRose Henderson (@isylviarose) 21 June 2018
सभी चित्र और स्क्रीनशॉट दीक्षा बिजलानी के ट्विटर अकाउंट @BijlaniDiksha से लिए गए हैं.
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