कल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और नेता सुदीप बंदोपाध्याय को CBI ने अरेस्टकिया. इनका रोज़ वैली चिट फंड घोटाले में नाम आया है. इससे पहले उन्हें CBI के दफ्तरमें पूछताछ के लिए बुलाया गया था. उन्होंने पूछताछ के लिए जाते हुए कहा था, ''मैंयहां अपनी पोजीशन साफ़ करने आया हूं.''सुदीप बंदोपाध्यायगिरफ्तारी पर ममता बनर्जी ने कहा, ''बीजेपी और अकाली दल के नेता भी पर्ल चिट फंडस्कैम में शामिल थे. बंदोपाध्याय सीनियर नेता हैं. उन्हें इस तरह गिरफ्तार नहींकरना चाहिए.''उन्होंने ट्विटर पर अपना गुस्सा निकाला. उन्होंने कहा कि ये सब नोटबंदी का विरोधकरने की वजह से हो रहा है.ममता बनर्जी का ट्वीटसाथ ही ममता बनर्जी ने चेतावनी भी दी कि 9 जनवरी को कोलकाता में नोटबंदी के खिलाफRBI ऑफिस के सामने प्रदर्शन होगा.उन्होंने आगे कहा कि हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. वकीलों को धमकाया जा रहा है और जजों कोप्रभावित किया जा रहा है.अब तक क्या हुआ?ये टीएमसी के दूसरे सांसद हैं जिन्हें रोज़ वैली स्कैम के चलते गिरफ्तार किया गयाहै. 30 दिसंबर को एक्टर से नेता बने सांसद तापस पाल को CBI ने अरेस्ट किया था.उन्होंने गायक से बीजेपी के सांसद बने बाबुल सुप्रियो को भी घसीट लिया. कहा, ''मैंनिर्दोष हूं. मैं इस घोटाले में शामिल नहीं हूं. सच जल्द ही सामने आ जाएगा. मैंनेCBI के सामने बाबुल सुप्रियो सहित कुछ और लोगों का नाम लिया है.''तापस पालCBI ने कहा है कि रोज वैली ने निवेशकों को लगभग 17,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया है.इसमें 450 करोड़ रुपए सिर्फ उड़ीसा से हैं. इस कंपनी की उड़ीसा में 28 शाखाएं थीं.CBI ने रोज़ वैली के खिलाफ 2016 की जनवरी में चार्जशीट फाइल की थी. कहा गया था किरोज वैली ने पश्चिम बंगाल के अलावा उड़ीसा, असम, झारखण्ड, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान,त्रिपुरा, आन्ध्र प्रदेश में जमकर पैसे लूटे हैं.CBI ने कहा कि रोज वैली के 21 रीजनल ऑफिस थे और 880 ब्रांच थीं. इसने लगभग 20 लाखएजेंट भी बना रखे थे. क्या है रोज वैली चिट फंड घोटाला? पहले पश्चिम बंगाल में कईसारी बचत योजनाएं इंडियन पोस्टल सर्विस चलाती थी. 1980-90 के दौरान इनमें गिरावटआने लगी. इंटरेस्ट रेट गिर गए. इसी दौरान बहुत ही पोंजी स्कीम आईं. संचयिताइन्वेस्टमेंट, ओवरलैंड इन्वेस्टमेंट कंपनी, वेरोना क्रेडिट एंड कमर्शियलइन्वेस्टमेंट कंपनी, इन सबका बोलबाला था. इन लोगों ने इन्वेस्ट करने वालों केतकरीबन 10 बिलियन रुपयों की हेर-फेर की.सारधा, पर्ल की ही तरह रोज वैली भी एक पोंजी स्कीम वाली चिट फंड कंपनी है. इसमेंअलग-अलग स्कीम में पैसे लगाने के बदले भारी रकम वापसी का वादा किया जाता था. यानीलुभावने ऑफर देकर इन्वेस्टमेंट करवाना और सारा माल हड़प लेना.इसके घोटालों की जांच ED (Enforcement Directorate) ने भी की थी. उसके हिसाब सेइसने 15,000 करोड़ से ज्यादा पैसे बनाए.मार्च 2015 में ED ने इस ग्रुप के चेयरमैन गौतम कुंडू को गिरफ्तार किया गया.गौतम कुंडूसारधा चिट फंड घोटाले से ये घोटाला सात गुना ज्यादा बड़ा है. इसके पूरे देश मेंछोटे-छोटे कई इन्वेस्टमेंट थे, जिनका अमाउंट लगभग 40,000 करोड़ है.ED को लगता है कि नेताओं को ये कंपनी चलाने के लिए बहुत बड़ी घूस दी गई. कागज़ पर रोजवैली बैनर की 30 कंपनियां थीं. रोज़ वैली एयरलाइंस, रोज वैली माइक्रोफाइनेंस, रोजवैली फैशन, रोज वैली कंसल्टेंसी, रोज वैली बेवरेजेज, रोज वैली इंफोटेक, रोज वैलीहाउसिंग फाइनेंस वगैरह. रोज वैली होटल एंड एंटरटेनमेंट की पूरे देश में 23प्रॉपर्टी हैं.SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने जनवरी 2011 में रोज वैली के रियलस्टेट बिजनेस को बंद कर दिया था.इस कंपनी के 2,600 बैंक अकाउंट थे, जिनमें लगभग 800-1000 करोड़ रुपए थे. इन अकाउंटको सरकार ने बंद करवा दिया था. किसने शुरू की थी रोज वैली? 18 सालों में गौतम कुंडूके बड़े भाई काजल कुंडू ने रोज वैली कम्पनी खड़ी की.रोज वैली होटल एंड एंटरटेनमेंट, रोज वैली रियल स्टेट एंड कंस्ट्रक्शन, रोज वैली चेनमार्केटिंग की शुरुआत काजल ने की. बाद में 2002 में रोज वैली LIC की कॉर्पोरेटएजेंट बन गई थी.2003 में काजल कुंडू की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. अपनी वाइफ और बेटे के साथ.बाद में छोटे भाई गौतम कुंडू ने रोज वैली को संभाल लिया.रोज वैली 2012 तक बड़े आराम से चल रही थी जब तक IRDAI ( Insurance Regulatory andDevelopment Authority of India) ने इस पर सवाल नहीं खड़े किए.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी निशांत ने की है.