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'केदारनाथ-बद्रीनाथ बौद्ध मठ थे, तोड़कर मंदिर बने', स्वामी प्रसाद को मायावती ने क्या जवाब दिया?

स्वामी के मुताबिक सातवीं शताब्दी तक उस जगह पर बौद्ध मठ था जहां आज केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम मौजूद हैं.

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Swami Prasad Maurya speaks on Badrinath Temple
स्वामी प्रसाद मौर्या और बद्रीनाथ मंदिर.
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रणवीर सिंह
31 जुलाई 2023 (अपडेटेड: 31 जुलाई 2023, 08:39 PM IST)
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समाजवादी पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्या के एक और बयान पर विवाद हो गया है. विवाद है धर्मस्थलों को लेकर. स्वामी प्रसाद मौर्या ने दावा किया है कि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम ‘बौद्ध मठ’ थे जिन्हें आठवीं शताब्दी में तोड़ कर हिन्दू मंदिर बनाए गए. उन्होंने दावा किया कि सातवीं शताब्दी तक उस जगह पर बौद्ध मठ था जहां आज केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम मौजूद हैं.

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क्यों दिया ये बयान?

स्वामी प्रसाद मौर्य वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर में ASI सर्वे की मांग का विरोध कर रहे हैं. ऐसे में बयान जारी कर उन्होंने कहा कि अगर जांच इस बात की हो रही है कि मस्ज़िद से पहले क्या था तो फिर इसकी भी जांच होनी चाहिए कि मंदिर से पहले क्या था. सपा नेता ने आगे दावा किया कि उत्तराखंड में जिस स्थान पर केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर स्थित हैं, वहां सातवीं शताब्दी तक बौद्ध मठ हुआ करते थे. आठवीं शताब्दी में बौद्ध मठ तोड़कर वहां मंदिर बना दिए गए.

ज्ञानवापी विवाद क्या है?

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थित ज्ञानवापी परिसर में ‘शिवलिंग’ मिलने का दावा किया गया था. शुरुआत श्रंगार गौरी की पूजा की अनुमति से हुई और अदालती मामला आगे बढ़ गया. श्रंगार गौरी के इतिहास के लिए कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी परिसर में एक सर्वे कराया गया तो वहां एक आकृति मिली. इस आकृति को हिन्दू पक्ष शिवलिंग बता रहा है तो मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ये एक फव्वारा है. कोर्ट ने विवादित स्थल को सील कर दिया. उसने कहा कि वजूखाने वाली जगह को सील रखा जाएगा. 

हिन्दू पक्ष ने सील की हुई जगह को छोड़कर बाकी परिसर का सर्वे कराने की मांग वाराणसी कोर्ट में रख दी. वाराणसी कोर्ट ने इसकी मंज़ूरी भी दे दी तो मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे के काम पर अंतरिम रोक लगाते हुए मुस्लिम पक्ष को हाई कोर्ट जाने को कह दिया. हाई कोर्ट में सर्वे कराने को लेकर जिरह पूरी हो चुकी है और फ़ैसला 3 अगस्त को आ सकता है.

उत्तराखंड के सीएम ने की निंदा

लेकिन कोर्ट के फैसले से पहले स्वामी प्रसाद मौर्या का बयान आ गया. इस पर बीजेपी नेताओं की तरफ से पलटवार हुए. सबसे पहले विरोध दर्ज कराने सामने आए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी. उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्या ने भावनाओं को आहत करने का काम किया है. धामी ने कहा,

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धामी को स्वामी ने दिया जवाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस बयान के बाद स्वामी प्रसाद मौर्या ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उनकी मंशा भावनाएं आहत करने की नहीं थीं. हालांकि उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया. सिर्फ सफाई दी. फेसबुक पर लिखे एक पोस्ट में स्वामी प्रसाद ने लिखा है,

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मायावती ने भी स्वामी प्रसाद पर तंज किया

बयान पर बीजेपी के अलावा बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी स्वामी प्रसाद को घेर लिया. कभी अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बसपा से करने वाले स्वामी को मायावती से ये सुनने को मिला, 

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स्वामी का विवादों से पुराना नाता

सपा महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने कोई पहली बार विवादित बयान नहीं दिया है. इससे पहले रामचरितमानस को लेकर भी उन्होंने सवाल खड़े किए थे. ‘ढोल गंवार शुद्र पशु नारी…’ वाली चौपाई का विरोध करते हुए उन्होंने महिलाओं, दलितों और पिछड़ों का मुद्दा उठाया था. कोरोना में उन्होंने मज़दूरों को मौत का सौदागर बताया था. हिन्दू रीति रिवाज से होने वाली शादियों से लेकर कई अलग अलग मुद्दों पर स्वामी प्रसाद के बयानों पर बवाल होते रहे हैं.

वीडियो: बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र शास्त्री को सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने क्या करने का चैलेंज दिया?

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