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UP सरकार का दावाः पत्रकार सिद्दीक कप्पन के तार दिल्ली दंगों से भी जुड़े हैं

5 अक्टूबर को हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार हुए थे सिद्दीक कप्पन.

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पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन (दाहिने) की 5 अक्टूबर को हाथरस जाते वक़्त गिरफ़्तारी हुई थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में यूनियन की याचिका पर सुनवाई हुई.
पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन (दाहिने) को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बीमार मां को देखने के लिए 5 दिन की जमानत दे दी है.
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अमित
15 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 15 दिसंबर 2020, 10:00 AM IST)
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पत्रकार सिद्दीक कप्पन को लेकर यूपी पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा किया है. योगी सरकार ने 14 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि सिद्दीक कप्पन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्य हैं. बता दें कि यूपी पुलिस ने कप्पन को हाथरस जाते वक्त गिरफ्तार किया था.
नए हलफनामे में दी जानकारी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर यूपी सरकार ने कहा कि सिद्दीक कप्पन सोशल मीडिया और टेलीफोन के जरिए पी कोया, अब्दुल मुकीत, सलीम, मोहम्मद फैजल जैसे PFI के सदस्यों से लगातार संपर्क में थे. सरकार का यह भी दावा है कि जांच में पता चला है कि PFI के ही ज्यादातर मेंबर बैन संगठन सिमी के पूर्व अधिकारी हैं. इन सभी का कप्पन के साथ गहरा संबंध भी है. UP सरकार ने कहा कि जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों से पता चला है कि PFI और सिमी दोनों संगठनों में काफी समानता है.
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सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफनामा दाखिल करके कहा है कि सिद्दीकी अप्पन पीएफआई और सिमी से जुड़े रहे हैं .फोटो- पीटीआई

 
दिल्ली दंगों से भी जुड़े हैं तार यूपी सरकार ने दावा किया है कि कप्पन और उसके साथी दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी एमडी दानिश और शरीफ के संपर्क में थे. वे गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पहले से प्लान बना कर हाथरस की ओर जा रहे थे. उनका मकसद सामाजिक सद्भाव को खराब करना और जाति और वर्ग के बीच संघर्ष पैदा करना था. सरकार ने यह भी कहा कि कप्पन ने 2018 में बंद हुए अखबार तेजस के लिए काम किया था, जो PFI का मुखपत्र था. यूपी सरकार के मुताबिक, इस अखबार के विचार इतने उग्र थे कि इसने आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को शहीद कहा था.
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तस्वीर फरवरी-2020 में हुए दिल्ली दंगों की है. सांप्रदायिक दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी. 581 लोग घायल हुए थे. (फाइल फोटो- PTI)

सरकार ने कहा जमानत न दी जाए
राज्य सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता संगठन भी पब्लिक फंड के गबन और दुरुपयोग से जुड़े केस में जांच का सामना कर रहा है. कप्पन की जमानत का विरोध करते हुए राज्य सरकार ने दावा किया कि अगर इस स्टेज पर उसकी अर्जी को स्वीकार किया जाता है तो जांच प्रभावित होगी. चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की अर्जी पर जनवरी में विचार करने का निर्णय लिया. वहीं याचिकाकर्ता संगठन को सरकार के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.
यूपी सरकार ने यह आरोप भी लगाया है कि कप्पन और दूसरे 3 आरोपी संदिग्ध वित्तीय लेनदेन में शामिल थे. सह आरोपी मसूद को पीएफआई से फंड किया जाता है. सह अभियुक्त अतीक उर रहमान को कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया के रऊफ शरीफ द्वारा फंडिंग की जाती है. कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संदिग्ध स्रोतों से करोड़ों की धनराशि प्राप्त होती है. 12 दिसंबर को ईडी ने शरीफ को केरल के तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था.
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यूपी की योगी सरकार ने कहा है कि सिद्दीक कप्पन और उसके साथ गिरफ्तार साथियों को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है. (फाइल फोटो- PTI)

5 अक्टूबर को हुई थी सिद्दीक कप्पन की गिरफ्तारी सिद्दीकी कप्पन को 5 अक्टूबर को हाथरस जाते वक्त रास्ते में मथुरा पुलिस ने गिरफ्तार किया था. मथुरा पुलिस ने इस संबंध में दावा किया था कि उसने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबंध रखने वाले चार लोगों को मथुरा में गिरफ्तार किया है उनके नाम-मल्लापुरम निवासी सिद्दीक, मुजफ्फरनगर निवासी अतीकुर रहमान, बहराइच निवासी मसूद अहमद और रामपुर निवासी आलम हैं. बता दें कि हाथरस के एक गांव में 14 सितंबर को एक दलित युवती से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार हुआ था. इस घटना में बुरी तरह जख्मी युवती की बाद में सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी. मृतक का रात में ही उसके परिजनों की कथित तौर पर सहमति के बगैर ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था.

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