हट जा ताऊ: इस सदी का सबसे क्रांतिकारी गाना है
सपना चौधरी के गीत ‘हट जा ताऊ’ ने मेरी जिंदगी बदल दी. इसे किसी देश का राष्ट्रगान नहीं, बल्कि विश्वगान बना देना चाहिए.
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फोटो - thelallantop
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फेमस हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी ने कांग्रेस में शामिल होने की खबरों को अफवाह बताते हुए खारिज कर दिया है. इसके बारे में फर्दर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -
तो आपको भी बताते हैं इस गीत की महिमा. महिमा चौधरी नहीं भाई, क्यूं सुबह-सुबह पीजे बुलवा रहे हो. हम महिमा के बारे में बताएंगे लेकिन दूसरी. हम चौधरी के बारे में भी बताएंगे मगर – सपना चौधरी. शुरू करने से पहले एक स्पॉइलर –
एक और फ्लॉ भी था - एज लिमिट. क्यूंकि यदि किसी प्रहलाद, नचिकेता को समाधि प्राप्त करनी हो तो?
इसी वजह से ये गीत – हट जा ताऊ – ओशो की किताब से ज़्यादा मोक्ष के करीब नज़र आता है. जी भर के नाचने की बात की जा रही है और नाच-नाच के जब जी भर जाएगा तो समाधि मिलना तो तय है ही.
अब सोचिए अर्जुन को मोह-माया से मुक्त होने के लिए महाभारत लड़ना पड़ा. लेकिन यहां पर तो नाचने वाले ने कोई युद्ध नहीं किया फिर भी निर्मोही है. अपने लक्ष्य यानी नृत्य के प्रति वो इतना डेडिकेटेड है कि उसे ताऊ, चाचा जैसे दुनियावी रिश्ते नहीं डिगा पा रहे हैं. वो अपने ताऊ से तक कहने की हिम्मत रख रहा है कि – 'डांटे ते भी नहीं डटूंगा.'
गदर की वो ट्रेन याद आ गई – 'निर्मोही होना हमसे सीखो अर्जुन!'
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पढ़ें: पार्टी जॉइन करने के मामले में झूठ बोल कौन रहा है- सपना चौधरी या कांग्रेस?
तो चलिए अब कुछ ह्यूमर हो जाए.
तो दोस्तो लोगों को देखकर गुस्सा आता था जब वो कहते थे – ‘अलां मूवी ने उसकी ज़िंदगी बदल दी’, ‘फलां नॉवेल के बाद वो फिर पुराने से नहीं रहे’ या ‘वो आज जो कुछ भी हैं ढिमका गीत के चलते हैं’.
आई मीन हाउ एब्सर्ड?
लेकिन फ़िर... (रुकिए टेली शॉपिंग नेटवर्क की विधा में बताता हूं...)
‘इस गीत को सुनने से पहले मैं काफी परेशान था, मुझे सभी लोग परेशान किया करते थे. मेरी बिल्ली अमाईमा भी मेरे पास नहीं बैठती थी, लेकिन फिर एक दिन मुझे मेरे हरियाणवी दोस्त ने ये गीत सुनाया. ओह यीशु! ये वाकई अद्भुत है, मेरा मतलब – कमाल. ये वा... क... ई... काम करता है!’ये गीत ‘हट जा ताऊ’ जिसे पहले मैं उतनी ही हेय दृष्टि से देखता था, जितना मेरी बिल्ली अमाईमा मुझे. लेकिन उसी गीत पर जब मैंने देरिदा का डीकंस्ट्रक्शन, लुडविग विट्गेंस्टाइन की गेम थ्योरी और कमाल राशिद खान की ‘कम अक्ली’ लगाई तो सारी बातें यूं तरह साफ़ हो गईं गोया गुप्त मूवी का स्पॉइलर किसी ने दीवारों पर लिख दिया हो – 'काजोल ही क़ातिल है!'
तो आपको भी बताते हैं इस गीत की महिमा. महिमा चौधरी नहीं भाई, क्यूं सुबह-सुबह पीजे बुलवा रहे हो. हम महिमा के बारे में बताएंगे लेकिन दूसरी. हम चौधरी के बारे में भी बताएंगे मगर – सपना चौधरी. शुरू करने से पहले एक स्पॉइलर –
कभी कभी यूं भी हमने अपने जी को बहलाया है, जिन बातों को खुद नहीं समझे, औरों को समझाया है. (निदा फ़ाज़ली)
# बिना संभोग के समाधि:
ओशो ने उपदेश तो बहुत दिए लेकिन किताब केवल एक लिखी - संभोग से समाधि की ओर. कत्ति क्रांतिकारी! उस किताब में वो कहते हैं इतना सेक्स करो, इतना सेक्स करो, कि जी भर जाए. और फिर उसके बाद खुद ब खुद समाधि की ओर अग्रसर हो जाओगे. लेकिन उनके इस क्रांतिकारी विचार में एक फ्लॉ था. वो ये कि – हम तो कर लें लेकिन हमसे भी तो कोई करने को तैयार हो. और अगर वो ‘कोई’ राज़ी हो भी जाए तो भी दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में पार्किंग स्पेस नहीं मिलता, मेकआउट स्पेस तो फिर दूर की बात है.
एक और फ्लॉ भी था - एज लिमिट. क्यूंकि यदि किसी प्रहलाद, नचिकेता को समाधि प्राप्त करनी हो तो?
इसी वजह से ये गीत – हट जा ताऊ – ओशो की किताब से ज़्यादा मोक्ष के करीब नज़र आता है. जी भर के नाचने की बात की जा रही है और नाच-नाच के जब जी भर जाएगा तो समाधि मिलना तो तय है ही.
मतलब ‘संभोग से समाधि की ओर’ का ‘किड वर्ज़न’ है - ‘हट जा ताऊ’, ‘समाधि फॉर ऑल’ है - 'हट जा ताऊ', मोक्ष का ‘न उम्र की सीमा हो’ है - 'हट जा ताऊ'. एक सुहागिन का... (सॉरी मैं कैरिड अवे हो गया था.)ये ‘हट जा ताऊ’ ऐसा ही है कि कार्टून नेटवर्क में अनुराग कश्यप की मूवी आ रही हो. (होने को ट्रिविअल फैक्ट ये कि अनुराग कश्यप ने एक कार्टून मूवी बनाई भी है – हनुमान.)
# बिना युद्ध के सिद्धि:
अर्जुन ने जब हथियार डाल दिए थे तो कृष्ण ने उन्हें दुत्कार कर कहा – तेरे रिश्तेदार तेरे सामने हैं इसलिए आज तू हथियार नहीं उठा रहा. वरना चिड़िया की आंख तो तूने एक बार में फोड़ दी थी. ये अपनों का मोह छोड़ अर्जुन!
अब सोचिए अर्जुन को मोह-माया से मुक्त होने के लिए महाभारत लड़ना पड़ा. लेकिन यहां पर तो नाचने वाले ने कोई युद्ध नहीं किया फिर भी निर्मोही है. अपने लक्ष्य यानी नृत्य के प्रति वो इतना डेडिकेटेड है कि उसे ताऊ, चाचा जैसे दुनियावी रिश्ते नहीं डिगा पा रहे हैं. वो अपने ताऊ से तक कहने की हिम्मत रख रहा है कि – 'डांटे ते भी नहीं डटूंगा.'
गदर की वो ट्रेन याद आ गई – 'निर्मोही होना हमसे सीखो अर्जुन!'
# क्रांति से बड़ी क्रांति
चैरिटी की तरह ही क्रांति भी घर से ही शुरू होती है. बड़े लोग कह गए हैं कि दुनिया की सबसे पहली क्रांति पिताजी से ज़ुबान लड़ा के, उनसे असहमत होकर होती है. लेकिन मुझे लगता है कि ये क्रांति का ऑर्थोडॉक्स वर्ज़न है. लेकिन यहां, इस गीत में, इस ऑर्थोडॉक्स क्रांति को नकार कर पिता के भी बड़े भाई से ज़ुबान लड़ाई गई है. गीत एक सिरे से सारी पुरानी क्रांतियों के मूल पर, जड़ पर, कुठाराघात करता है. ये क्रांतियों के साथ क्रांति है. हे प्रभु! ये अविश्वसनीय है!! यदि मार्क्स, लेनिन, फ़िदेल वगैरह इस गीत को सुन लेते तो यकीन जानिए इसको चाइना, रशिया का न भी सही, तो भी क्यूबा का तो राष्ट्रीय गीत बना ही देते.
चाइना में वो टैंक के सामने सब्ज़ी का झोला लिए बंदे की फोटो पर सबसे बेस्ट कैप्शन है – 'हट जा ताऊ'! लाल सलाम का आंसर है - 'हट जा ताऊ'! चे ग्वेरा की टी शर्ट का पीछे वाला कोट है - 'हट जा ताऊ'! एक सुहागिन का... (सॉरी अगेन!)
# बिना प्यार के संस्कार:
बगल में छुरी और मुंह में राम वाले लोग तो बहुत मिल जाएंगे. लेकिन ऐसे लोगों को क्या आप अच्छा मानते हैं? वहीं दूसरी तरह के लोग होते हैं, नागा बाबा टाइप्स. जिनकी गाली में भी प्यार होता है. अब इस ‘हट जा ताऊ’ वाले बंदे की क्यूटनेस और उसके संस्कारों पर क्यूं ही न फ़िदेल (सॉरी फ़िदा) हो जाया जाए, जो अपने अंकल से कहता है कि – ताऊ आप खाना खा लो, और मुझे जी भर के नाचने दो. देखिए ‘नॉन फिक्शन’ में इसे ही ‘डीटेचमेंट’ कहा गया है. वो इतनी अच्छी बात को बिना किसी लाग-लपेट के कह रहा है - 'जा के न तू खा ल्ये खाणा.'कड़वा मगर नीम है - 'हट जा ताऊ'. फ्लिपकार्ट नहीं, इन्फिबीम है - 'हट जा ताऊ'. इंडिविजुअल नहीं, टीम है - 'हट जा ताऊ'.
# बिना बल्ले बल्ले के बुल्ले शाह
बुल्ले शाह की सूफियाना बात, गहरी बात, अघम की बात – असां नच नच यार मनाना! - कितनी आसानी से कितनी मास अपील के साथ कह दी गई है इस गीत में, सोचिए ज़रा! बुल्ले शाह तो फिर भी यार को या अपने इष्ट को मनाने के लिए नाच रहे हैं लेकिन बुल्ले और कृष्ण, नाच और निष्काम का ये वर्ज़न तो डिवाइन है भई – ‘नाचन दे जी भर के’. मतलब नाचने का कोई उद्देश्य नहीं. कर्म करना लेकिन फल की इच्छा न करना यही तो है. बस नाचन दे जी भर के! कोई उद्देश्य नहीं, कोई चिंता नहीं. पा लिया जो पाना था.भक्ति में मीरा है – हट जा ताऊ, नीरव का हीरा है - हट जा ताऊ, ऊंट के मुंह में – ओके सॉरी.खैर अब आप सुनिए इसका ओरिजिनल वर्ज़न: और ये जो आज-कल सपना चौधरी की तरह ही वायरल हो रहा है, क्यूंकि इसे सपना का आशीर्वाद प्राप्त है: ताज़ा समाचार मिलने तक विकास ऋतु ने यानी ओरिजिनल वाले ने वीरे दी वेडिंग यानी कॉपीड वाले गीत पर कॉपीराइट का दावा ठोक दिया है - पांच करोड़ रुपए का. मल्ल्ब - कौन बनेगा करोड़पति है - हट जा ताऊ!
अंततः ये लेख केवल और केवल हास्य उत्पन्न करने के लिए लिखा गया है तथा इसका किसी की भावनाएं आहत करना उद्देश्य नहीं है.
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