ये फोटुवा देखो. पूरा बिहार देख रहा है. हचक के वायरल हो रखा है. इस फोटू में है एकसांप. सांप का नाम नहीं पता. जिसके हाथ में है वो बिहार के शिक्षा और आईटी मंत्रीहैं. अशोक कुमार चौधरी. दो फोटो हैं. एक में अशोक कुमार चौधरी सांप को पकड़े हैं.दूसरी में प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुबोध कुमार. आशीर्वाद में वही सांपप्राप्त करते हुए. मिनिस्टर साहब की खूब खिंचाई हो रही है. विपक्षी दल तो निशानाबना ही रहे हैं. महागठबंधन वाले भी बत्ती दिए पड़े हैं. मामला नाजुक है. JDU स्पीकरकेसी त्यागी ने कहा कि एक तो वो शिक्षामंत्री हैं. फैला रहे हैं अंधविश्वास. जबकिपब्लिक लाइफ में एंट्री के बाद आदमी को साइंटिफिक नजरिया रखना चाहिए. मंत्री ने कहाकि मैं इस सबके खिलाफ हूं. अंधविश्वास से कोसों दूर. ये पुरानी फोटो है. जब सपेरेघर आए थे. खेल खेल में डाल दिया गले में. बस जरा सा एंटरटेनमेंट था. ये तस्वीर संजयपासवान की है. बीजेपी नेता और अटल सरकार में मंत्री रहे हैं. आजकल साइड लाइन हैं.उसके पहले बीजेपी की राष्ट्रीय एससीएसटी सेट के हेड थे. वह सापों को गले में टांगकरएक मार्च पर निकले थे मंत्री रहने के दौरान. मकसद था सांप पालने वालों की दुर्दशाकी तरफ ध्यान दिलाना. वो बताते हैं कि दिक्कत सांप से नहीं उसे टांगने के मकसद सेहै. संजय पासवान अटल सरकार में राज्यमंत्री थे. तब उन्होंने बिहार में खेल तमाशादिखाने वाले संपेरा और नट जैसे दलित समाज के लोगों का सम्मेलन किया था. उस दौरान वहगले में सांप टांगकर एक मार्च पर भी निकले थे. इस कदम की खासी चर्चा हुई थी. मगरबीजेपी नेता पासवान आज भी अपने स्टैंड पर कायम हैं. उनके मुताबिक मेरा मकसद तब भीयही था कि सरकार इस तबके की तरफ ध्यान दे. और मैं आज भी इसके लिए संघर्षरत हूं.दलितों में सपेरा जाति है. इनका काम मुश्किल है. सांप पकड़ना. या फिर उसका तमाशादिखाना. इनके पुनर्वास के लिए सरकार को कोशिश करनी चाहिए. क्योंकि वन्य जीव के नियमतो सब लागू कर दिए गए हैं, मगर इन जीवों के सहारे पेट पालने वालों के लिए कुछ ठोसनहीं किया गया है. इस लिस्ट में सिर्फ संपेरे ही नहीं हैं. मदारी भी हैं. भालूनचाने वाले भी. लल्लन तुलसी की लाइन सुन चुका है. सबहिं नचावत राम गुसाईं. मगरडेमोक्रेसी का डांस करने वालों को इन लोगों पर भी हर हाल में ध्यान देना चाहिए.