अकेले जाकर क्या करोगी? अच्छा किसी दोस्त को साथ ले लो... कहां रुकोगी, कैसे मैनेजकरोगी? किसी लड़की का अकेले घूमना, जीएसटी से भी बड़ी गुत्थी है यहां. और अगर लड़कीने झोला उठा भी लिया तो यहां की 'पॉलिसी' उन्हें कहीं झोला रखने नहीं देंगी. कुछऐसा ही हुआ जब एक इंजीनियर नुपुर सारस्वत हैदराबाद घूमने आईं. Goibibo से ऑनलाइनबुकिंग कन्फर्म होने के बाद भी होटल ने नुपुर को रूम देने से इनकार कर दिया. इसकेबाद 23 साल की नुपुर ने फेसबुक-टि्वटर पर पूरी बात लिखी. और उनकी पोस्ट को खूब शेयरकिया गया. उन्होंने लिखा, 'मैं हैदराबाद के एक होटल के बाहर खड़ी हूं. ऑनलाइनबुकिंग कन्फर्म होने के बाद भी मुझे रूम नहीं दिया जा रहा. क्योंकि मैं अकेली लड़कीहूं. मेरे हाथ में भारी-भरकम बैग है और सफर से थक चुकी हूं. इन लोगों को लगता है किमैं होटल से ज्यादा सड़कों पर सुरक्षित रहूंंगी.' 'ये भेदभाव का मेरा पहला अनुभवहै. ये आपके साथ भी हो सकता है, किसी और शहर, किसी और होटल में. हो सकता है आप 11बजे होटल पहुंचो और आपको रूम देने से मना कर दिया जाए. इसलिए मैं ये पोस्ट लिख रहीहूं. Goibibo को सुनाओ. उन्हें बताओ कि अब लड़कियां अकेले घूमती हैं, हम 'अपनीसुरक्षा के लिए' घर के अंदर नहीं रहेंगे. वो हमारा जेंडर क्यों पूछते हैं?' नुपुरने #HyderabadSaga हैशटैग से पोस्ट लिखे. पोस्ट वायरल होने के बाद होटल ने अपनीवाहियात पॉलिसी का हवाला दिया. इसके मुताबिक सिंगल वुमन और अनमैरिड कपल को कमरेनहीं मिलते. इतने रायतों के बाद होटल वालों की 'गुड मॉर्निंग' हुई. होटल ने बयानदिया, 'हम अकेली महिला के खिलाफ नहीं हैं. लेकिन ये जगह अकेली महिला के लिए सहीनहीं है.' इसके बाद Goibibo की पीआर टीम ने नुपुर से माफी मांगी. सारस्वत के पैसेवापस करने का वादा किया और दूसरे होटल में रूम भी दिलाया. टीम ने अपनी पॉलिसी कीजांच करने की भी बात की. नुपुर ने अपने समर्थकों के लिए एक पोस्ट और लिखी. 'मैं इसझंझट में इसलिए हूं क्योंकि मैं सेटल होने को तैयार नहीं हूं. मैं अपनी सुरक्षा केलिए डर-डर के जीने को तैयार नहीं हूं. मैं घूमने के लिए एक आदमी को ढूंढने को तैयारनहीं हूं. मैं चौकीदार बनने को तैयार नहीं हूं.' हमारे यहां लड़कियों को पहले तोघूमने की जरूरत ही नहीं है. और अगर घूमना ही है तो साथ में एक 'पहरेदार' होनाचाहिए. अगर आप किसी टूरिस्ट स्पॉट पर अकेली खड़ी मिल जाएं, तो गार्ड पूछता है, 'आपकेजेंट्स कहां हैं?' ट्रेन में अपना सामान लादें, तो हर उम्र का पुरुष आपसे पूछता है,'हेल्प कर दूं.' कितनी कमाल की बात है न? और सबसे ज्यादा कमाल की बात तो ये है, किहोटल को खुद की सिक्योरिटी पर ही भरोसा नहीं है. कह रहे हैं लड़कियों के लिए जगह सेफनहीं है. तो भैया आपने होटल खोला ही क्यों है? या खोलते ही 'पुरुष ओनली' का साइनक्यों नहीं लगा लिया, जो पेशाबघर के बाहर लगा रहता है?--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:पब में काम करने वाली औरतों ने सड़क पर छेड़ने वालों को चप्पलों से पीटालल्लनटॉप लेकर आ रहा है, भारत के राष्ट्रपति चुनाव पर एक ब्रांड न्यू सीरीज:https://www.youtube.com/watch?v=FsDtg52l944&feature=youtu.be