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मोदी सरकार चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बिल लाई, CJI शामिल नहीं

केंद्र ने उस कमेटी में CJI को शामिल नहीं किया है, जिसकी सलाह या सिफारिश पर चुनाव आयुक्तों का चयन किया जाएगा.

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10 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 10 अगस्त 2023, 05:56 PM IST)
New bill on election body appointments, no Chief Justice in selection panel
बिल में चुनाव आयुक्तों की सेवा की शर्तों और कार्यकाल को बढ़ाने का अधिकार होगा. (फोटो- PTI)
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केंद्र सरकार ने गुरुवार, 10 अगस्त को राज्यसभा में एक नया बिल पेश किया. ये बिल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) के चयन से जुड़ा है. बिल के मुताबिक प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति CEC और EC की नियुक्ति की सिफारिश करेगी. इस कमेटी में प्रधानमंत्री के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे. बिल को लेकर चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को समिति में शामिल नहीं किया गया है. 

इसे सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है. इसमें कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की सदस्यता वाली कमेटी की सिफारिश पर की जानी चाहिए.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इसी साल मार्च महीने में जस्टिस केएम जोसेफ के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने ये फैसला सुनाया था. बेंच ने आदेश दिया था कि प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की सदस्यता वाली कमेटी की सिफारिश पर CEC-EC का सिलेक्शन किया जाएगा. कोर्ट ने कहा था कि इस कमेटी की सलाह पर राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करेंगे. ये भी कहा था कि ये व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक कि संसद चुनाव आयुक्तों के चयन के संबंध में कोई कानून नहीं बनाता.

अब केंद्र CEC और EC की चयन प्रक्रिया से जुड़ा कानून बनाने के लिए विधेयक लेकर आया है. उसके बिल में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाई जाने वाली कमेटी में CJI को शामिल किए जाने की बात का जिक्र नहीं है. तीसरे सदस्य के रूप में किसी कैबिनेट मंत्री को शामिल किया जाएगा जिसे प्रधानमंत्री नॉमिनेट करेंगे. 

सुप्रीम कोर्ट ने CJI को शामिल करने की बात कही थी

रिपोर्ट के मुताबिक बिल को लेकर एक सरकारी सूत्र ने बताया कि अदालत अपने फैसले से एक अंतरिम व्यवस्था बनाने जा रही थी. जबकि बिल के जरिए सरकार एक स्थायी व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है. सरकार की तरफ से भी साफ किया गया है कि ये बिल कोर्ट के फैसले को दरकिनार या संशोधित करने के लिए नहीं लाया जा रहा है, बल्कि एक स्थायी व्यवस्था बनाने के लिए इसे लाया जा रहा है.

केजरीवाल ने नियंत्रण करने का आरोप लगाया

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस बिल पर अभी से कई सवाल उठने लगे हैं. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मानते हैं. जो फैसला पसंद नहीं आता, उसके खिलाफ संसद में कानून लाया जाता है. सीएम केजरीवाल ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी को पलटकर मोदी ने ऐसी कमेटी बनाने की तैयारी कर ली है जो उनके कंट्रोल में होगी और चुनाव निष्पक्ष नहीं होगा.

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