शनि मंदिर शिंगणापुर में बैठे सनीचर महाराज पता नहीं क्या कराएंगे. उसमें घुसने केलिए महाराष्ट्र की औरतों ने आंदोलन छेड़ा हुआ है. उसी लाइन पर चल पड़ी हैं मुस्लिमऔरतें. हाजी अली की मजार में औरतों को जाने की मनाही है. उसके खिलाफ मुस्लिम औरतेंआंदोलन शुरू कर चुकी हैं.Source: ANIदरगाह के ट्रस्टीज ने वहां औरतों के जाने पर रोक लगा रखी है. कहते हैं पुरुष संत केकरीब औरतों का जाना बड़ा पाप है. इसके खिलाफ एक ग्रुप पहले से कानूनी लड़ाई लड़ रहाहै.इस्लामिक सटडीज की प्रोफेसर जीनत शौकत अली ने कहा कि ये रोक मजहब नहीं लगाता.मर्दों की सत्ता चाहने वालों ने लगाई है. मुझे इस्लाम की जानकारी है. इस्लाम मेंकहीं नहीं लिखा कि औरतें मजार पर नहीं जा सकतीं.कौन थे हाजी अलीहाजी अली की दरगाह बनी सन 1431 में. सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की याद में. बहुतबड़े बिजनेस मैन थे अली. हज पर जाने को हुए तो अपनी सब संपत्ति दान कर दी. वहां सेलौटते हुए पूरी दुनिया की यात्रा पर निकल लिए. लास्ट में मुंबई आकर सेटल हो गए.यहां जो उनके साथ हुआ उस पर बहुत किस्से कहानिया किवदंतियां तैरती हैं लोगों कीजबान पर. कहते हैं एक दिन उन्होंने एक औरत को देखा. हाथ में खाली कटोरा लिए खड़ी रोरही थी. पूछा क्या मसला है? क्यों रो रही होऔरत ने कहा मैं इस कटोरे में तेल लेकर घर जा रही थी. पता नहीं कैसे धक्का लगा औरकटोरा हाथ से छूट गया. सारा तेल जमीन पर पसर गया. अब ऐसे खाली कटोरा लेकर जाऊंगी तोशौहर पीट पीट बुरा हाल कर देगा. रोऊं न तो क्या करूं.अली ने कहा वो जगह दिखाओ जहां तेल बिखरा था. वहां अपनी उंगली रखी और सारा तेल निकलकर बाहर आ गया. औरत खुशी से नाच उठी. कटोरा भरा और घर की राह ली. लेकिन अली ने रातमें एक सपना देखा. कि उनकी हरकत से जमीन डिस्टर्ब हो गई है. कुदरत को धक्का लगा है.फिर अली बीमार पड़ गए.अपने चेले चपाटों को बुलाया और आदेश किया. मेरे लिए ताबूत तैयार करो और मेरी बॉडीको उसमें भर कर अरब सागर में तैरा दो. मक्का की तरफ तैरा दिया गए उनकी बॉडी भरेताबूत को. कमाल देखो कि ताबूत वापस लौट आया मुंबई और समुद्र के किनारे पर अटक रहा.जहां वह अटका था वहीं आज हाजी अली की मशहूर दरगाह है. जहां दुनिया भर से हर धर्म केलोग जियारत करने आते हैं.