पाकिस्तान आतंकवाद को शय देता है. इत्ता तो आप जानते ही हैं. लेकिन वो कहते हैं नकि जो औरों के लिए गड्ढा खोदते हैं वो खुद गड्ढे में गिर जाते हैं. ऐसे ही एकगड्ढे, आई मीन मुद्दे की बात करेंगे, जिसमें पाकिस्तान गिरता चला जा रहा है. नाम है- बलूचिस्तान. शॉर्ट नोट्स: साउथ वेस्ट एशिया का पाकिस्तानी प्रांत बलूचिस्तान.1947 में तीन रियासतों को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शामिल कर लिया गया.तत्कालीन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली ने 535 रियासतों को आजाद रहने कीछूट दी थी. लिहाजा कलात के किंग अहमद यार खान ने चुनी आजादी और पाक में विलय सेकिया इंकार, पर ऐसा हो न सका. यहीं से उठी आजादी की चिंगारी. शुरू से ही बलूच लोगआजादी की मांग कर रहे हैं. बलूचिस्तान समर्थकों का तर्क है कि पाकिस्तान ने सिर्फपंजाब और सिंध प्रांत में विकास किया. आजाद बलूचिस्तान की मांग और प्रदर्शनकारियोंके कुछ गुटों ने आतंक का रास्ता अपना लिया है. 'भारतीय प्रधानमंत्री खुले तौर परआतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं. रिसर्च एनालिसिस विंग क्वेटा के पास स्मांगली औरखलिद के मिलिट्री बेस पर हुए हमलों के लिए जिम्मेदार है.' - सरफराज बुगती,बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में. तारीख 8 जून 2015 बलूचिस्तान: 3,47,190 स्कॉयरकिलोमीटर में फैला पाकिस्तान के चार प्रांतों में से एक बलूचिस्तान. अफगानिस्तान,ईरान और पाकिस्तान के बॉर्डर से मिलती सरहदें. बलूच लोगों की वजह से यहां का नामपड़ा बलूचिस्तान. मकरान, खारन, लसबेला और 1955 में कलात चार रियासतों के मिलने सेबना बलूचिस्तान. कलात ने पाकिस्तान में शामिल होने के लिए कुछ शर्तें रखी थीं.डिफेंस, करेंसी, विदेश नीति और वित्तीय मामले संघीय सरकार संभाले लेकिन बाकी मामलोंमें फैसले बलूचिस्तान ही करेगा. तब शर्तें मानने का वादा किया गया. लेकिन बलूचराष्ट्रवादियों की मानें तो पाकिस्तान ने कभी भी बलूचिस्तान की बेहतरी के लिए कदमनहीं उठाए. कलात के किंग की आजाद रहने की इच्छा साल 1955 में तब पूरी तरह खारिज होगई, जब कलात बलूचिस्तान प्रांत यानी पाकिस्तान में शामिल हो गया. पाकिस्तान ने 1947के बाद से ही कलात को बलूचिस्तान में शामिल करने को लेकर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दीथी. दूसरी चिंगारी: नवाब नवरोज खान, आजाद बलूचिस्तान आंदोलन का प्रतीक. नवरोज खानने कलात की बलूचिस्तान की आजादी को लेकर हथियार उठाकर पाकिस्तान के खिलाफ गुरिल्लावॉर छेड़ दी. गिरफ्तार हुए. परिवार के पांच लोगों को फांसी दे दी गई. नवाब नवरोजखान की पाकिस्तान में कैद के दौरान मौत हो गई. वन यूनिट की मांग: साल 1963-69 केबीच अलगाववादी नेताओं की ओर से बलूचिस्तान के लिए नए संविधान की मांग की गई. शेरमुहम्मद बिजरानी खां जैसे नेताओं ने 'सुई गैस फील्ड' से होने वाली कमाई के बंटवारेको लेकर अपनी मांगें आक्रामक तरीके से उठाईं. लड़ाई तब खत्म हुई, जब साल 1970 मेंतत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान ने 'वन यूनिट पॉलिसी' को माना और बलूचनेताओं के साथ सीजफायर को लेकर सहमति बनी. 'वन यूनिट पॉलिसी' यानी जियोपॉलिटिकलप्रोग्राम, जिसके जरिए दो पॉलिसी होने की वजह से शासन करने में आने वाली दिक्कतोंको दूर करने की कोशिश की गई. पाक का मिलिट्री ऑपरेशन: 1973 में बलूचिस्तान मेंमिलिट्री ऑपरेशन शुरू. तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फीकार अली भुट्टो ने बलूचिस्तान कीसरकार को भंग कर दिया. बलूचिस्तानी नेता खैर बख्श मर्री ने पाकिस्तान सरकार केखिलाफ एकजुट होते हुए बलूचिस्तान पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट का गठन किया. कहा जाता हैकि सेना और बलूच लड़ाकों के इस हिंसा में पाकिस्तान के करीब 400 और लगभग 8 हजारबलूच नागरिक-लड़ाकों की मौत हो गई थी. अब भी जारी है आजादी की जंग: आजादी की मांगकरने वाले बलूच संगठनों ने 2003 में फिर से गुरिल्ला हमले का रास्ता चुना.बलूचिस्तान आंदोलन के ज्यादातक नेता पाकिस्तान से बाहर किसी दूसरे में रहकर आजादीकी मांग कर रहे हैं. बताया जाता है कि बलूचिस्तानी लड़ाके पहले सिर्फ सेना पर हमलाकरते थे लेकिन अब निशाने पर गैर बलूच लोग भी हैं. 2005 में बलूचिस्तानी नेताओं नवाबअकबर खां बुगती और मीर बालच मर्री ने पाकिस्तान सरकार के सामने 15 सूत्रीय एजेंडारखा. एजेंडे में बलूच प्रांत के लिए ज्यादा अधिकारों की मांग की गई. नवाब अकबर खांबुगती बलूचिस्तान के 13वें गवर्नर और पांचवें मुख्यमंत्री भी रह चुके थे. अगस्त2006 में बुगती को पाकिस्तानी सेना ने फायरिंग में मार गिराया. पाक सेना के करीब 60से ज्यादा अधिकारियों ने भी जान गंवाई. बुगती पर पाक के पूर्व राष्ट्रपति परवेजमुशर्रफ पर हमले का आरोप लगाया गया. अगस्त 2009 में मीर सुलेमान दाउद ने खुद कोआजाद बलूचिस्तान का शासक घोषित कर दिया. BLA: बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) बलोचअलगाववादियों का सबसे बड़ा संगठन है. साल 2000 से लेकर अब तक BLA पर पाकिस्तान परकई हमले किए. आजाद बलूचिस्तान की मांग करने वाले संगठनों के कुछ और नाम बलूचिस्तानरिपब्लिकन पार्टी, लश्कर-ए-बलूचिस्तान और बलूच लिबरेशन फ्रंट हैं. इनमें ऐसे भीसंगठन हैं जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के बलूच इलाकों को मिलाकर आजादबलूचिस्तान की मांग करते रहे हैं. प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज और कम आबादी वालाबलूचिस्तान बीते 70 सालों से आजादी और अधिकारों के लिए जूझ रहा है.