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हिजाब को लेकर बवाल के बाद कर्नाटक का एक और बड़ा फैसला!

दिसंबर में मुख्यमंत्री अनाउंस कर सकते हैं!

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30 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 30 नवंबर 2022, 03:13 PM IST)
karnataka waqf board hijab college
उडुपी कॉलेज की छात्राएं. (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)
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हिजाब विवाद के चलते चर्चा में आए कर्नाटक के स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने का इंतजाम होने जा रहा है. खबर है कि राज्य में ऐसे स्कूल और कॉलेज खोले जाएंगे जहां अपनी मर्जी का लिबास पहनने की पूरी आजादी होगी. कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शफी सादी ने ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि इन स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने की पूरी आजादी होगी. ये बात भी सामने आई है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई दिसंबर महीने के अंत में इन शिक्षा संस्थानों को खोले जाने की आधिकारिक घोषणा कर सकते हैं.

इंडिया टुडे से जुड़े सगाय राज की रिपोर्ट के मुताबिक इन स्कूल-कॉलेजों के निर्माण में कुल 25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. ये शिक्षा संस्थान मंगलुरु, शिवमोग्गा, हासन, कोडागू, बीजापुर, हुबली और अन्य इलाकों में खोले जाएंगे. शफी सादी ने कहा कि इन शिक्षा संस्थानों में कोई स्वायत्त नियम नहीं होंगे. लेकिन वे बोर्ड या यूनिवर्सिटी के शिक्षा संबंधी नियमों का पालन करेंगे.

इस बारे में जानकारी देते हुए कर्नाटक वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ने कहा,

“5-6 महीने पहले इसकी घोषणा की गई थी. वक्फ बोर्ड में इसके लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित हैं. हमारे पास कई जमीनें भी हैं. ये खास तौर पर राज्य के जिलों में बने महिला कॉलेजों के लिए है.”

शफी सादी ने साफ किया कि इस फैसले का हिजाब विवाद से कोई लेना-देना नहीं है. उनके मुताबिक ये फैसला पहले ही ले लिया गया था. हर किसी को ऐसे कॉलेज में एडमिशन की अनुमति है. उन्होंने बताया कि ये जनरल स्कूल और कॉलेज में यूनिवर्सिटी के दिशा-निर्देशों पर चलेंगे.

कर्नाटक में स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहनने को लेकर काफी विवाद हुआ था. इसी साल की शुरुआत में उडुपी के एक कॉलेज में हिजाब पहनकर आईं छात्राओं को क्लास में नहीं घुसने दिया गया था. कहा गया कि हिजाब कॉलेज ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं है. मुस्लिम समुदाय की तरफ से इसका विरोध किया गया. देखते ही देखते ये राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया कि शिक्षा संस्थानों में हिजाब पहनना सही है या नहीं. मामला हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था.

हाई कोर्ट ने कॉलेजों में हिजाब पर बैन लगाने के राज्य सरकार के फैसले को सही बताया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर बंटा हुआ फैसला दिया था. शीर्ष अदालत की डिविजन बेंच में शामिल जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया एकमत नहीं हो पाए. जस्टिस धूलिया ने कहा कि हिजाब पहनना निजी पसंद का मामला है. वहीं, जस्टिस गुप्ता ने हिजाब पर बैन लगाने के राज्य सरकार के फैसले को सही माना. जस्टिस हेमंत गुप्ता ने इस मामले को 9 जजों की बेंच के पास भेजने की राय दी थी.

हिजाब विवाद पर फैसला सुनाने वाले सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की कहानी

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