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कर्नाटक: सरकारी टीचर ने केंद्रीय मंत्री से खाद की कमी का मुद्दा उठाया, सस्पेंड हो गया!

वहीं केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा ने दावा किया है कि इलाके में खाद की कोई कमी नहीं है.

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27 जून 2022 (अपडेटेड: 28 जून 2022, 12:07 PM IST)
Karnatak teacher
फर्टिलाइज़र के छिड़काव की सांकेतिक तस्वीर और केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा. (फोटो- इंडिया टुडे और सोशल मीडिया)
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कर्नाटक में एक सरकारी टीचर को नौकरी से निकाले जाने का मामला तूल पकड़ा हुआ है. उन्हें नौकरी से इसलिए निकाला गया क्योंकि हाल ही उनका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो केमिकल और फर्टिलाइज़र मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री से उर्वर्कों की कमी को लेकर सवाल पूछ रहे थे.

मामला बीदर का है. सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले कुशल पाटिल को शिक्षा विभाग ने बीती 17 जून को निलंबित कर दिया. बताया जा रहा है कि कुशल और केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा के बीच फोन पर हुई बातचीत वायरल होने के बाद उन्हें निलंबित किया गया. दी इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि कुशल ने जानबूझकर फोन पर बातचीत को रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया. शिक्षा विभाग के मुताबिक कुशल ने अपने काम की अवहेलना की है और उनका रवैया गैर जिम्मेदाराना रहा है.

शिक्षा विभाग के सस्पेंशन लेटर में दीपक पाटिल लांबोरी नाम के एक शख्स के शिकायत का जिक्र किया गया है. दीपक की शिकायत थी कि कुशल पाटिल ने जानबूझकर 15 जून की आधी रात केंद्रीय मंत्री खुबा से फोन पर फर्टिलाइज़र की कमी को लेकर बहस की. दीपक ने शिकायत में कहा है कि कुशल ने ऐसा केंद्रीय मंत्री को बदनाम करने की मंशा से किया.

खबरों के मुताबिक फोन पर केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा ने कुशल पाटिल से कहा कि अगर इलाके में उर्वरक की कमी है तो लोकल अफसर या विधायक से बात करें. इसी दौरान बातचीत तीखी हो गई और कुशल ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि इस बार गांव में वोट मांगने के लिए आने की हिम्मत करके दिखाना.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कुशल ने कहा कि अगर किसानों के साथ कुछ गलत हो रहा है तो उनका फर्ज है जनप्रतिनिधियों से सवाल करना. उन्होंने अखबार से कहा,

हमारा परिवार खेती पर निर्भर है. केंद्र सरकार और खुबा दावा कर रहे हैं कि उर्वरकों की कोई कमी नहीं है. लेकिन, जमीनी हकीकत ये है कि स्थानीय बाजार में खाद उपलब्ध नहीं है. हम डीएपी का बैग लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

खबर के मुताबिक कुशल पाटिल के पास 88 एकड़ जमीन है. और वो स्कूल में पढ़ाने के साथ साथ खेती भी कराते हैं.

इस मामले में केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा का भी जवाब आया है. उनका कहना है कि क्षेत्र में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है. खुबा ने आरोप लगाया कि पाटिल ने उन्हें एक ही दिन में कई बार फोन किया. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक एक अनजान नंबर से उनके फोन पर तीन मिस्ड कॉल आने के बाद उन्होंने खुद कॉलबैक किया. खुबा ने बताया,

मैंने 13 जून को कलबुर्गी में और 14 जून को बीदर में जिला समीक्षा बैठक में भाग लिया. तब किसी ने ये मुद्दा नहीं उठाया. 12 जून को प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति के सदस्य मेरे कार्यालय आए. उन्होंने भी कोई मुद्दा नहीं उठाया क्योंकि उर्वरक आपूर्ति में कोई समस्या नहीं थी.

वैसे बता दें कि कुशल पाटिल बीदर के हैं और केंद्रीय मंत्री भगवंत खुबा बीदर से ही सांसद हैं.
 

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