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'हिंदी नहीं है राष्ट्रीय भाषा...'- अश्विन ने दिया था बयान, अब BJP नेता अन्नामलाई का समर्थन मिला है

R Ashwin ने एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए ये बयान दिया था. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर भाषा को लेकर बहस छिड़ गई थी. अब BJP नेता K. Annamalai ने भी आश्विन का समर्थन करते हुए हिंदी को ‘संपर्क भाषा’ बताया है.

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11 जनवरी 2025 (अपडेटेड: 11 जनवरी 2025, 10:17 AM IST)
K. Annamalai supported Ravichandran Ashwin statement Hindi is not our national language
तमिलनाडु के BJP अध्यक्ष के अन्नामलाई ने आश्विन का किया समर्थन (फोटो: आजतक)
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तमिलनाडु के BJP अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) ने भी पूर्व भारतीय किक्रेटर रविचंद्रन आश्विन (R. Ashwin Hindi Row) के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है’. बता दें कि आर. आश्विन ने एक कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित करते हुए ये बयान दिया था. जिसके बाद से सोशल मीडिया पर भाषा को लेकर बहस छिड़ गई थी. अब BJP नेता के. अन्नामलाई ने भी आश्विन का समर्थन करते हुए हिंदी को ‘संपर्क भाषा’ बताया है.

‘राष्ट्रीय नहीं, आधिकारिक भाषा है हिंदी’

आर. अश्विन ने हाल ही में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बीच में ही संन्यास लिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में चेन्नई के एक प्राइवेट कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हिंदी के बारे में उन्होंने टिप्पणी की थी. इस कार्यक्रम में उन्होंने करियर के अलावा और कई मुद्दों पर बात की. इस दौरान उन्होंने स्टूडेंट्स से हिंदी, अंग्रेजी या तमिल भाषा में प्रश्न पूछने के लिए कहा था. लेकिन जब उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में कोई प्रश्न पूछना चाहता है तो लोगों की प्रतिक्रिया एकदम शांत दिखी. इसके बाद उन्होंने कहा,

“हिंदी हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है. यह एक आधिकारिक भाषा है.”

 

आश्विन के इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर भाषा को लेकर चर्चा शुरू हो गई. कई लोगों ने उनका समर्थन किया तो कुछ ने कहा कि आश्विन को ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए.

अन्नामलाई और DMK ने किया समर्थन

अब उनके इस बयान को लेकर BJP अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने समर्थन जाहिर किया है. अश्विन की टिप्पणियों को दोहराते हुए अन्नामलाई ने कहा,

“यह हमारी राष्ट्रीय भाषा नहीं है. ऐसा केवल मेरे प्रिय मित्र अश्विन को ही नहीं कहना है... यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है. यह एक संपर्क भाषा थी, यह सुविधा की भाषा है.”

बता दें कि इससे पहले DMK ने भी आर. आश्विन के बयान का समर्थन किया था. DMK नेता टीकेएस एलंगोवन ने कहा था,

“जब कई राज्य अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं तो हिंदी राजभाषा कैसे हो सकती है.”

ये भी पढ़ें: हिंदी को भारत में राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों नहीं मिला?

‘भाषा को लेकर बहस ठीक नहीं’

हालांकि, इसके बाद BJP ने अनुरोध किया था कि भाषा को लेकर बहस ठीक नहीं है. BJP नेता उमा आनंदन ने कहा था-

“DMK की ओर से इसकी सराहना करना आश्चर्य की बात नहीं होगी. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अश्विन राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं या तमिलनाडु के क्रिकेटर हैं.”

लेकिन अब तमिलनाडु के BJP अध्यक्ष ने ही आर. आश्विन के बयान का समर्थन किया है. आश्विन के बयान को लेकर खासकर तमिलनाडु में चर्चा ज्यादा तेज है. जहां हमेशा से ही भाषा का प्रश्न ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. तमिलनाडु में हिंदी का विरोध 1930 और 1940 के दशक से ही चल रहा है, जब स्कूलों और सरकारी स्कूलों में इसे अनिवार्य भाषा के रूप में लागू करने का कड़ा विरोध किया गया था.

वीडियो: तमिलनाडु में हिंदी सीखना कितना आसान? निर्मला सीतारमण के बयान का विरोध

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