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और सबको मालूम चल गया बम बनाने का आसान तरीका

इस्लामिक स्टेट ने इंडिया में ऑनलाइन कर दिया ये मैनुअल. इसमें बम बनाने की पूरी टेक्नीक दी गयी है. लोग इसे ही पढ़कर बम बना रहे हैं.

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केतन बुकरैत
25 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 25 अप्रैल 2016, 06:01 AM IST)
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इस्लामिक स्टेट नाम के आतंकी संगठन ने एक और बवाली काम किया है. अबकी बार उसने इंडिया में मौजूद अपने साथियों के लिए एक डॉक्यूमेंट इन्टरनेट पर अपलोड कर दिया. डॉक्यूमेंट का नाम था - बम बनाने का आसान तरीका. डॉक्यूमेंट में क्या था, ये तो उसके नाम ही से ज़ाहिर है. मामला सेक्योरिटी एजेंसीज़ के ज्ञान में आ चुका है. 12 पेज लम्बे इस डॉक्यूमेंट को कई ऐसे लोगों को भेजा गया जो इस्लामिक स्टेट आतंकी माने जाते हैं. इस डॉक्यूमेंट को कैसे डाउनलोड करना है, इस बात के निर्देश उन्हें किक जैसे मेसेजिंग प्लेटफॉर्म से भेजे गये. इस मामले के बारे में एनआईए को तब मालूम चला जब वो देश भर में इस्लामिक स्टेट से जुड़े अरेस्ट हुए लोगों के बारे में जांच कर रही थी. एनआईए 28 दिसंबर 2014 को बैंगलोर में हुए बम ब्लास्ट की जांच कर रही थी. उनमें अरेस्ट हुए सिमी के पूर्व ऐक्टिविस्ट आलमज़ेब अफ्रीदी ने इस बात को बताया की कैसे उसने उन सभी डाक्यूमेंट्स के दम पर बम बनाया था. अफ्रीदी ने बताया कि उसे इस डॉक्यूमेंट का लिंक किक मेसेंजर पर मिलने वाले एक अनजान शख्स ने भेजा था. डाक्यूमेंट्स में बम को पटाखों, माचिस की तीलियों की मदद से बनाना सिखाया जाता है. उसके साथ ही दो छोटे बल्ब इस्तेमाल किये जाते हैं. इसमें से एक बल्ब का फ़िलामेंट खुला हुआ होता है. ये बल्ब डेटोनेटर का काम करते हैं. बम के कंटेनर के लिए कुकर से लेकर मोटी, चौड़ी स्टील की पाइपों तक का इस्तेमाल किया जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक़ अफ़रीदी ने माचिस की तीलियों की टिप को छील कर उनमें से विस्फ़ोटक तैयार किया और उसे चीनी के साथ मिक्स किया. ये सब कुछ उस डॉक्यूमेंट में मौजूद था. 28 दिसंबर को हुए धमाके में एक औरत की मौत हो गयी थी. बम बनाने के इंस्ट्रक्शन देने वाला डॉक्यूमेंट एनआईए के हाथ लग गया है. यही डॉक्यूमेंट मोहम्मद नफीस खान के पास भी मिला था. 22 साल का नफीस हैदराबाद में जनवरी में पकड़ा गया था. नफीस पर जनूद-उल-खलीफा-ए-हिन्द नाम के ग्रुप का मेम्बर होने का आरोप था. ये ग्रुप इस्लामिक स्टेट का कट्टर सपोर्टर है. साथ ही उत्तराखंड में अरेस्ट किये गए चार संदिग्ध इस्लामिक स्टेट सपोर्टर्स को गिरफ़्तार किया गया था. उन चारों के पास से भी यही डॉक्यूमेंट मिले थे. उनके पास से भारी मात्र में माचिस की तीलियां बरामद हुई थीं. दो दर्जन से ऊपर पकड़े गए आतंकियों में एक लिंक कॉमन है. एक ऐसा इंसान जो कई ऑनलाइन रूप रखता है. उसका नाम शफी अरमार हो सकता है. 29 साल का शफ़ी भटकल का रहने वाला बताया जाता है. उसका बड़ा भाई सुल्तान अरमार 39 साल की उम्र में 2014 में सीरिया में मारा गया था.

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