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ट्रैवल हिस्ट्री नहीं होने के बाद भी डॉक्टर के ओमिक्रॉन से संक्रमित होने पर डॉक्टर्स क्या बोले?

बेंगलुरु में 46 साल के एक डॉक्टर कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए हैं.

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3 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 3 दिसंबर 2021, 03:27 PM IST)
Covid India
(प्रतीकात्मक तस्वीर: एपी)
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कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 46 साल के एक डॉक्टर कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि इस डॉक्टर की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है. डॉक्टर से जुड़े 5 और लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि ये पांचों ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित हैं या नहीं. बिना ट्रैवल हिस्ट्री के डॉक्टर के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित पाए जाने से सरकार की चिंता बढ़ गई है. ये भी सवाल उठ रहे हैं कि बिना ट्रैवल हिस्ट्री के डॉक्टर कैसे संक्रमित हो गए. वायरल लोड ज़्यादा, लेकिन लक्षण कम डॉक्टर दक्षिण बेंगलुरु के सरकारी अस्पताल में काम करते हैं. इसी अस्पताल के एक सीनियर मेडिकल अधिकारी ने अंग्रेज़ी अख़बार द टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि डॉक्टर का वायरल लोड काफ़ी ज़्यादा था. इस वजह से जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजा गया था. अधिकारी ने कहा,
"हमारे डॉक्टर के नमूने का CT स्कोर 13 था. इस वजह से हमने इस सैंपल को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजा. हमने ओमिक्रॉन प्रभावित देशों में से किसी भी मरीज का इलाज नहीं किया है."
हालांकि वायरल लोड ज्यादा होने के बावजूद डॉक्टर में ज़्यादा लक्षण नहीं थे. उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है. वे भारत के दूसरे ओमिक्रॉन मरीज हैं.
Omicron Bengaluru Doctor
ओमिक्रॉन से पीड़ित डॉक्टर के घर के बाहर स्वास्थ्य विभाग के नोटिस की फ़ोटो. ( पीटीआई)
टीके के बाद भी हुए वायरस के शिकार कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए गए डॉक्टर को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है. बेंगलुरु के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी गौरव गुप्ता ने इंडिया टुडे को बताया कि पीड़ित डॉक्टर के 13 प्राथमिक संपर्कों और 205 अन्य संपर्कों का कोरोना टेस्ट किया गया है. इन लोगों में से 3 लोग पॉज़िटिव पाए गए हैं. इसके अलावा पीड़ित डॉक्टर की पत्नी, उनकी 13 वर्षीय बेटी भी पॉज़िटिव पाई गई हैं.
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने इंडिया टुडे से कहा,
“एक मामले में 5 लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. हालांकि, ये पुष्टि करने के लिए कि क्या ये लोग ओमिक्रॉन से संक्रमित हैं उसके लिए जीनोम सीक्वेंसिंग के रिज़ल्ट्स का इंतज़ार करना पड़ेगा.”
वहीं, जिस अस्पताल में डॉक्टर कार्यरत है वहां के एक डॉक्टर ने अंग्रेज़ी अख़बार डेक्कन हेराल्ड को बताया कि अस्पताल के सभी 250 कर्मचारियों की एंटीबॉडी टेस्ट कराया गया. इस टेस्ट में पीड़ित डॉक्टर की एंटीबॉडी कम पाई गई थी. इस वजह से शायद ये डॉक्टर ओमिक्रॉन का शिकार हुए हों. एक सम्मेलन के बाद दिखे थे लक्षण टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने बेंगलुरु के स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के हवाले से कहा कि ओमिक्रॉन पीड़ित डॉक्टर के मामले में संक्रमण का स्रोत अस्पताल नहीं है. बल्कि 20 नवंबर को बेंगलुरु के एक होटल में एक चिकित्सा सम्मेलन हुआ था. इसके बाद पीड़ित डॉक्टर में कुछ लक्षण नज़र आने लगे थे. अधिकारी ने कहा,
“चिकित्सा सम्मेलन में भाग लेने वाले अस्पताल के चार डॉक्टरों का कोविड टेस्ट पॉज़िटिव आया था. इन लोगों में से तीन डेल्टा वेरियंट से और एक ओमिक्रॉन से संक्रमित पाए गए हैं ."
डॉक्टर्स क्या कह रहे हैं? कर्नाटक कोविड टास्क फोर्स की जीनोम सीक्वेंसिंग निगरानी समिति के सदस्य डॉ. विशाल राव ने NDTV को बताया कि शायद डॉक्टर किसी विदेशी यात्री के संपर्क में आए हों. उन्होंने कहा,
"जिस तरह से वायरस फैल रहा है, ऐसा संभव है कि उनका किसी विदेशी यात्री के साथ किसी प्रकार का संपर्क हुआ हो."
हालांकि, हमने AIIMS के इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर संजीव से बात की. उन्होंने ने भी डॉ. विशाल की बात को सही बताया. लेकिन उन्होंने कुछ और कारण बताए. उनका कहना है,
इस मामले में कई संभावनाएं हैं. जिस तरह से वायरस अपना रूप बदल रहा है ऐसा संभव है कि दक्षिण अफ़्रीका और दुनिया के कई देशों की तरह, भारत में इस वायरस का म्यूटेशन हुआ हो. लेकिन इसकी पुष्टि तब ही हो सकती है जब दक्षिण अफ़्रीका और अन्य देशों में हुए जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणामों को भारत में हुए परिणामों से मैच करके देखा जाए. उससे पहले कुछ भी कह पाना मुश्किल है."
वो आगे बताते हैं कि ऐसा भी संभव है कि कई लोग इस ओमिक्रॉन वेरिएंट से ग्रसित हों, लेकिन उनमें विशेष लक्षण न हों. उन्होंने कहा,
ये भी संभव है कि कई लोग पहले से ही इस ओमिक्रॉन वेरिएंट से ग्रसित हों. लेकिन उनके लक्षण ज़्यादा प्रभावी न हों. ऐसे ही किसी व्यक्ति के संपर्क में आने से डॉक्टर संक्रमित हुए हों, जैसा कि पहली लहर के दौरान हुआ था. कई कम लक्षण वाले लोगों से हज़ारों लोग संक्रमित हुए थे."
डॉ. संजीव ये भी कहते हैं कि जब तक एक बड़ी आबादी इस वेरिएंट का शिकार नहीं होती और दुनिया भर से कुछ आंकड़े और शोध की जानकारी नहीं मिल जाती, इस वेरिएंट पर कुछ भी कह पाना जल्दबाज़ी होगी.

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