25 अक्टूबर 2015. वानखेड़े स्टेडियम. इंडिया वर्सेज़ साउथ अफ़्रीका. वन-डे मैच. साउथअफ़्रीका बैटिंग कर रही थी. बैटिंग क्या कर रही थी, असल मायनों में खेल रही थी.इंडिया की बॉलिंग के साथ. फ़ाफ़ डु प्लेसी और डिविलियर्स इंडिया के बॉलर्स को पीट रहेथे. डु प्लेसी 100 रन बना चुके थे और क्रैम्पस से जूझ रहे थे. डिविलियर्स ये बतारहे थे कि लम्बी फेंकी हुई गेंदों को विकेट्स के पीछे कैसे मारा जा सकता है औरक्यूं उन्हें मिस्टर 360 डिग्री कहा जाता है. डु प्लेसी ने अक्षर पटेल को 3 छक्केमारे. इस पूरे दौरान डु प्लेसी क्रैम्पस से जूझ रहे थे. वो शॉट मारते और वहीं गिरपड़ते. उनके पैर की मांसपेशियां जवाब दे रही थीं. लेकिन उनका बल्ला जवाब पर जवाब दिएजा रहा था. तीसरा छक्का मारते ही डु प्लेसी वहीं लोट गए. अब उनसे खड़ा भी नहीं हुआजा रहा था. इस वक़्त उन्हें भयानक दर्द हो रहा था. दूसरे छोर पर खड़े डिविलियर्स नेतुरंत पवेलियन की ओर इशारा किया और फिज़ियो को आने को कहा. लेकिन तब तक विकेटकीपिंगकर रहे धोनी ने मामला अपने हाथ में लिया और तुरंत डु प्लेसी के पास पहुंचे. उन्हेंस्ट्रेचिंग कराने लगे. उनके पैर की मांसपेशियों को रिलैक्स करने के लिए ये सबसेकारगर उपाय था. धोनी वही कर रहे थे. स्टेडियम में तालियां बजाई जा रही थीं. इसलिएनहीं क्यूंकि मैच मुंबई में खेला जा रहा था. ये नज़ारा दुनिया के किसी भी कोने मेंदेखने को मिलता, दर्शकों का यही रीऐक्शन होता. बाद में फिज़ियो आए और धोनी ने उन्हेंअपना काम करने दिया.***30 दिसंबर 2017. इंदौर. दिल्ली वर्सेज़ विदर्भ. रणजी ट्रॉफी फाइनल. विदर्भ की टीमबैटिंग कर रही थी. रजनीश गुरबानी दिल्ली की पहली इनिंग्स में विदर्भ की तरफ सेहैट्रिक ले चुके थे. विदर्भ की टीम जीत के करीब थी. खेजरोलिया बॉलिंग पर थे. लेफ्टआर्म मीडियम फ़ास्ट. एक छोटी गेंद जो देह की लाइन में फेंकी गई थी जाकर बल्लेबाजसिद्धेश नेरल को लगी. सिद्धेश ने अभी-अभी छक्का मारा था. खेजरोलिया ने अगली गेंदपटक दी. गेंद जाकर नेरल की पसलियों में लगी. नेरल ने बल्ला फेंका और वहीं लोट गए.उन्हें बहुत दर्द हो रहा था. दूसरे छोर पर खड़े वाडकर ने तुरंत पवेलियन की और इशाराकिया और फिज़ियो को बुलाया.लेकिन इस बीच किसी भी दिल्ली के खिलाड़ी ने इतनी भी ज़हमत नहीं उठाई कि वो जाकर नेरलका हाल-चाल ले सके. चोट खाए हुए नेरल के दस कदम के घेरे में कम से कम 5 खिलाड़ीमौजूद थे लेकिन किसी ने भी उसकी सुध लेने की नहीं सोची. इस पूरे दौरान नेरल ज़मीनअपर पड़े कराह रहे थे. यहां तक कि गेंद फेंकने वाले खेजरोलिया ने भी अपने फॉलोथ्रूके बाद पैर वापस खींच लिए. मानो कुछ हुआ ही न हो.A post shared by mahi7781 🔵 (@bleed.dhonism) on Dec 31, 2017 at 12:03am PSTदिल्ली के खिलाड़ियों को थोड़ा शऊर सीख लेना चाहिए. यकीनन इन सभी में कोई भी ऐसाक्रिकेटर नहीं होगा जो पिछले कम से कम दस सालों से क्रिकेट न खेल रहा हो. कोई भीऐसा खिलाड़ी नहीं होगा जिसे खेलने के दौरान चोट न लगी हो. और अगर न भी लगी हो तो कमसे कम इंसानियत तो थोड़ी बहुत जिंदा ही होगी. एक भी खिलाड़ी झांकने तक नहीं आया.दिल्ली की टीम को शर्म से मर जाना चाहिए.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें:वो 5 हंसोड़ जो साल 2017 में उभरे और खूब नाम कमायादेखिये साल 2017 में धोनी के मारे सभी छक्के, मात्र 50 सेकंड मेंवीडियो : टीम इंडिया की इनडोर नेट प्रैक्टिस