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'गांधी के पोते का ओल्ड एज होम में रहना बड़ी बात नहीं है'

दिल्ली के ओल्ड एज होम में रह रहे हैं कनुभाई गांधी. दिल्ली सरकार मदद के लिए आगे आई. पढ़िए कनुभाई समेत गांधी परिवार के लोगों ने इस बारे में क्या कहा:

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15 मई 2016 (अपडेटेड: 14 मई 2016, 04:13 AM IST)
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सादगी प्रिय महात्मा गांधी. अपने परिवार से ज्यादा देश और समाज की परवाह करने वाले गांधी. सालों-साल आश्रम में रहे. देश, समाज की सेवा की. महात्मा गांधी का आश्रम में रहना कभी चर्चा का विषय नहीं रहा. लेकिन अब 2016 में गांधी जी के पोते कनुभाई रामदास गांधी का दिल्ली के एक वृद्धाश्रम में रहना चर्चा में है. खबर है कि कनुभाई रामदास गांधी अपनी वाइफ शिवा लक्ष्मी के साथ दिल्ली में बदरपुर के पास एक ओल्ड एज होम 'गुरु विश्राम वृद्ध आश्रम' में रह रहे हैं. दिल्ली सरकार कनुभाई की मदद के लिए आगे आई है. दिल्ली एससी-एसटी वेल्फेयर एंड वूमेन चाइल्ड वेल्फेयर मिनिस्टर संदीप कुमार ने ओल्ड एज होम का दौरा किया. संदीप कुमार ने कहा, 'कनुभाई से मिलना दिल को छू लेने वाला पल है. मैंने उनसे कहा कि दिल्ली सरकार आपकी हर तरह से मदद करने के लिए तैयार है.' बता दें कि कनुभाई बीती 8 मई को गुजरात छोड़कर दिल्ली रहने पहुंचे हैं. हालांकि उन्होंने इसके पीछे की वजह खुलकर नहीं बताई. लेकिन अलग-अलग चैनलों को दिए इंटरव्यू में कनुभाई ने कई बातें कहीं.
कनुभाई ने कहा, 'गुजरात के लोग गांधी विरोधी हो गए हैं. वजह बाद में बताऊंगा. गांधी की फैमिली सम्मान के लायक नहीं है. बापू ने हमेशा अपने परिवार को नीचे रखा. अब फैमिली के लोग ऊपर रहना चाहते हैं.' टाइम्स नाऊ को दिए इंटरव्यू में कनुभाई ने कहा, 'मेरी गलती है कि मैं भीख मांगने से शर्माता हूं. पीएम नरेंद्र मोदी वर्धा के सेवाग्राम आए थे. मोदी ने मुझसे कहा था कि आप चाहें तो मेरे पास आ सकते हैं. आपके लिए कुछ करूंगा. लेकिन मैं नहीं गया. मुझे हाथ फैलाना पसंद नहीं है.'
40 साल बाद अमेरिका से इंडिया लौटे कनुभाई कनुभाई अपनी जिंदगी के 40 साल अमेरिका में गुजार चुके हैं. कनुभाई अमेरिका में नासा के लिए काम करते थे. कनुभाई ने कहा, 'मैं सपने में नासा के दिनों को याद करता हूं. मैं याद करता हूं कि मैंने कैसे काम किया था. लेकिन आज ये सब याद करके अचानक उठकर रो पड़ता हूं कि मैं आज यह कैसे हो गया हूं. मैं अपनी वाइफ की हालत देखता हूं तो रो पड़ता हूं. मैं चाहता हूं कि लोग मेरी ऐसे मदद करें कि मेरी मजबूती का इस्तेमाल हो सके.'
कनुभाई की वाइफ शिवा लक्ष्मी गांधी ने कहा, 'जिस देश की कल्पना कर हम इंडिया आए थे. मुल्क ऐसा नहीं है. लोगों में त्याग की भावना खत्म हो चुकी है.'
'कनुभाई अपनी हालत के लिए खुद जिम्मेदार' महात्मा गांधी के पड़पोते हैं तुषार गांधी. उनसे जब इस बारे में पूछा गया तो वो कुछ उखड़े-उखड़े नजर आए. बोले, 'कनुभाई अपनी हालत के लिए खुद जिम्मेदार हैं. गांधी स्मृति से जुड़ी कई ऑर्गेनाइजेशन ने बीते चार सालों से दोनों पति पत्नी की खातिरदारी की है. लेकिन वो इसके शुक्रगुजार नहीं हैं. गांधी आश्रम उन्हें आरामदायक जिंदगी देने को तैयार है. गांधी परिवार के लोग भी ये बात मानते हैं कि सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है कि गांधी परिवार के किसी मेंबर की खातिरदारी करे. सैकड़ों लोग ओल्ड एज होम में रहते हैं. ऐसे में अगर गांधी परिवार का कोई मेंबर ओल्ड एज होम में रहता है तो कौन सी बड़ी बात हो गई. ' दिल्ली के इस ओल्ड एज होम के फाउंडर जीपी भगत ने कहा, 'कनुभाई ने किसी खास मदद की डिमांड नहीं की. उन्होंने दिल्ली सरकार से आए मंत्री का फोन नंबर लिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर फोन करेंगे. कनुभाई को लोगों से मिलना अच्छा लगता है.'

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