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स्याना हिंसा के 5 दोषियों को उम्रकैद, SHO सुबोध सिंह हत्याकांड की पूरी कहानी

3 दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर में भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या कर दी थी.

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1 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 1 अगस्त 2025, 08:16 PM IST)
Bulandshahr Violence
3 दिसंबर, 2018 को इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या की गई थी. (फोटो- Aaj Tak)
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यूपी के चर्चित स्याना हिंसा मामले में कोर्ट ने 38 दोषियों को सजा सुनाई है. यह वही घटना है जिसमें इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की नृशंस हत्या की गई थी. आजतक के मुकुल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने हत्या के पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. साथ ही 33 अन्य दोषियों को 7 साल की सजा सुनाई है. 30 जुलाई को एडिश्नल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत ने इन सभी को दोषी करार दिया था. 

रिपोर्ट के मुताबिक प्रशांत नट, डेविड, जोनी, राहुल और लोकेंद्र मामा को इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या का दोषी पाया गया. उन्हें आज उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. वहीं, बाकी के 33 दोषियों को बवाल, जानलेवा हमला (धारा 307) और अन्य गंभीर धाराओं में सजा दी गई है.

हालांकि, स्थानीय बजरंग दल नेता योगेश राज और राष्ट्रीय राइफल्स के पूर्व जवान जीतेन्द्र मलिक उर्फ जीतू फौजी सहित दो प्रमुख आरोपियों को इस हत्याकांड में बरी कर दिया गया. इन्हें मामले में प्रमुख षड्यंत्रकारी के रूप में आरोपी बनाया गया था.

इंस्पेक्टर सुबोध हत्याकांड

3 दिसंबर, 2018 की सुबह महुआ और चिंगरावटी गांव के लोगों को जंगल में जानवरों का कंकाल दिखा. लोगों को शक हुआ कि शायद गाय मारी गई है. उन्होंने स्याना पुलिस चौकी को खबर की. पुलिस पहुंची तो वहां 50-60 से ज्यादा की भीड़ जमा थी. लोग नाराज हो रहे थे. पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी. मगर गांववाले चाहते थे कि एकदम मौके पर फैसला हो जाए. वो पुलिस से उसी समय कार्रवाई करने को कह रहे थे. इसी बात को लेकर गांववालों की पुलिस टीम से बहस हो गई.

इसके कुछ देर बाद, दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे एक भीड़ चिंगरावठी पुलिस चौकी पहुंची. जानवरों के जो हिस्से जंगल में मिले थे, लोग उन्हें ट्रैक्टर पर लादकर चौकी के सामने पहुंचे थे. उन्होंने चौकी का घेराव किया. स्याना के थाना प्रभारी सुबोध कुमार सिंह अपने साथ कुछ पुलिसवालों को लेकर वहां पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन देते हुए इस मामले में FIR भी दर्ज कर ली.

लेकिन भीड़ हिंसक हो गई. पुलिस ने हवा में फायरिंग करके भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. FIR दर्ज किए जाने के बाद भी भीड़ वहां से नहीं हटी. लोगों ने चौकी के सामने की सड़क को ब्लॉक कर दिया. ये हाइवे बुलंदशहर की तरफ जाता है. पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर वहां से हटाने की कोशिश की. मगर भीड़ अड़ी रही. 

उस समय बुलंदशहर में मुस्लिमों का एक तीन दिनों का कार्यक्रम 'इज्तेमा' हो रहा था. उसके खत्म होने के बाद उसमें शामिल हुए कई मुसलमान इस रास्ते से भी लौट रहे थे. पुलिसवालों को आशंका थी कि हो सकता है कि गुस्साई भीड़ मुस्लिमों से भिड़ जाए. ऐसा होता, तो सांप्रदायिक हिंसा हो सकती थी. यही सोचकर पुलिसवालों ने बार-बार भीड़ को समझाकर वहां से हटाने की कोशिश की. लाउडस्पीकर पर एलान करते रहे कि जानवरों के कंकाल मिलने के मामले में कार्रवाई की जाएगी. लेकिन भीड़ कुछ मानने को राजी ही नहीं थी.

इसी बीच भीड़ के कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. पुलिस ने हवा में फायरिंग करके तितर-बितर करने की कोशिश की तो भीड़ पहले से ज्यादा उग्र हो गई. भीड़ के पास लाठी-डंडा तो था ही, साथ में असलहा भी था. उन्होंने पुलिसवालों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. तमंचे दागे जाने लगे. वो लोग हिंसा की पूरी तैयारी करके आए थे. पुलिस की टीम ने पहले चौकी में घुसकर जान बचाने की कोशिश की. मगर भीड़ ने चौकी पर भी हमला कर दिया. भीड़ ने 'मारो-मारो' का शोर मचाते हुए चौकी में आग लगा दी.

रिपोर्ट्स के मुताबिक भीड़ की तरफ तकरीबन 400 के करीब लोग थे. चौकी में आग लगने के बाद पुलिस के लोग बाहर की तरफ भागे. भीड़ उन पर ईंट-पत्थर फेंक रही थी. भीड़ से चलाई गोली SHO सुबोध कुमार सिंह को लग चुकी थी. वो घायल हो गए थे. जान बचाने के लिए पास के खेतों की तरफ भागे. भीड़ उन्हें खदेड़ रही थी. ये सब देखकर पुलिस के ड्राइवर राम आश्रय गाड़ी लेकर खेतों की तरफ गए. ताकि SHO को गाड़ी में बिठाकर अस्पताल ले जा सके. 

SHO सुबोध बेहद जख्मी हालत में जमीन पर पड़े थे. राम आश्रय ने उन्हें गाड़ी में रखा. मगर 'मारो-मारो' का नारा लगाते हुए भीड़ ने उस गाड़ी पर भी हमला कर दिया. उन्होंने SHO को और पीटा. ठोस और धारदार हथियारों से उन पर वार किया गया. गोली भी मारी. और इस तरह भीड़ ने सुबोध कुमार सिंह की जान ले ली.

हत्यारे इतने बेखौफ थे कि वीडियो बनाकर अपलोड भी कर दिया गया. वारदात के कुछ ही देर बाद इस घटना से जुड़ा एक वीडियो वायरल हो गया. इसमें एक टाटा सूमो गाड़ी थी जिसमें ड्राइविंग सीट से SHO सुबोध कुमार सिंह का शव लटक रहा था. उनका धड़ सीट पर था. सिर नीचे जमीन पर टिका हुआ था. ये वीडियो भीड़ में शामिल लोगों ने ही बनाया था. जब ये वीडियो बनाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. हिंसा में सुमित नाम के एक और शख्स की मौत हुई थी.

वीडियो: बुलंदशहर में SHO सुबोध कुमार सिंह के मारे जाने की पूरी कहानी

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