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टिफिन में खाना खाकर पूरा यूपी जीतने की तैयारी में BJP, ऐसा क्या करेगी मोदी की पार्टी?

उधर सपा बूथ लेवल पर पार्टी को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर कई बैठकें करने वाली है

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2 जून 2023 (अपडेटेड: 2 जून 2023, 10:50 PM IST)
BJP and Samajwadi Party starts its campaign for general elections
बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने चुनाव की तैयारी शुरू की
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अगले साल अप्रैल-मई के महीने में लोकसभा के चुनाव होने हैं. यानी देश के सबसे बड़े चुनाव में अब एक साल से कम का समय बचा है. ऐसे में 80 लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में राजनैतिक दल चुनाव प्रचार की तैयारियों में उतर गए हैं. एक तरफ बीजेपी ने मोदी सरकार की 9 साल की उपलब्धियों के आधार पर 10वें साल में लोगों तक पहुंचने की रणनीति बनाई है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी बूथ लेवल पर संगठन मज़बूत करने के लिए ज़िला स्तर पर बैठकें करने जा रही है. बीजेपी की रणनीति में 'टिफिन पर चर्चा' भी शामिल है. ये अभियान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आगरा से शुरू करेंगे जहां कार्यकर्ता अपने-अपने घरों से टिफिन में लंच लेकर आएंगे और सामूहिक भोज के दौरान तैयारियों पर चर्चा होगी.

समाजवादी पार्टी लखीमपुर से 5 जून को अपना अभियान शुरू कर रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन होगा. इस प्रशिक्षण शिविर में बूथ मैनेजमेंट, वोटर लिस्ट और बूथ कमेटियों पर चर्चा की जाएगी. उसके बाद 9 जून को 2 दिन का आयोजन सीतापुर में भी होगा और इसी तरह पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाकर बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने का काम करेगी. 

ज़िला स्तर के कार्यक्रमों के अलावा सपा के बड़े नेताओं की भी बैठकें होंगी, जहां सभी 80 सीटों पर नेता बात कर समीकरणों पर चर्चा करेंगे. विधानसभा चुनाव के बाद आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हारने के बाद से ही सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी सक्रियता बढ़ाई है. ज़िलों में जाना, कार्यकर्ताओं से मिलना और साथ ही सोशल मीडिया के ज़रिए मुद्दे उठाने का सिलसिला बढ़ा है.

बीजेपी का टिफिन प्लान

टिफिन सहभोज के जरिये एक तरह से लोगों तक पहुंचने का प्लान तैयार होगा, जिससे बीजेपी वो कर सके, जो अबतक न हो सका. यानी यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने का लक्ष्य. इस लक्ष्य को लेकर चल रही बीजेपी ने एक और एक बड़ा प्लान तैयार किया है. जून में पार्टी सभी लोकसभा सीटों पर बड़ी जनसभाएं करेगी. पार्टी की कोशिश है कुछ सभाओं में पीएम मोदी को आमंत्रित किया जाए. साथ ही लोकसभा क्षेत्र में प्रबुद्ध सम्मेलन, सोशल मीडिया वॉलेंटियर सम्मेलन, व्यापारी सम्मेलन और प्रभारी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीएम मोदी के 9 साल के कार्यकाल की उपलब्धियां लोगों तक पहुंचाने की कोशिश होगी.

इसके अलावा बीजेपी वरिष्ठ कार्यकर्ता सम्मेलन और लाभार्थी सम्मेलन आयोजित करने वाली है. इसमें केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभर्थियों को बुलाकर उन्हें तरह-तरह की योजनाओं के बारे में बताया जाएगा. बीजेपी की योजना में ‘सम्पर्क से समर्थन’ अभियान भी चलाया जाएगा जिसके तहत हर लोकसभा सीट में 250 प्रतिष्ठित परिवारों से सम्पर्क साधा जाएगा. इन परिवारों में पद्म पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ी, लेखक, डॉक्टर, शहीदों के परिवार आदिस लोग शामिल होंगे. पीएम मोदी 24 जून को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर वर्चुअल कार्यक्रम में भाषण देंगे. साथ ही 21 जून को योग दिवस के मौके पर भी जनता से संवाद करने की पार्टी कोशिश करेगी.

केंद्र में मोदी सरकार बनने में सबसे बड़ा योगदान यूपी का रहा है. 2014 में बीजेपी गठबंधन को 73 सीटें और 2019 के लोकसभा चुनाव में 64 सीटें हासिल हुई थीं. वहीं समाजवादी पार्टी 2014 और 2019 में सिर्फ 5 सीटें ही जीत पाई. 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा ने बीएसपी से गठबंधन किया, लेकिन इसका फ़ायदा सपा से ज़्यादा बीएसपी को हुआ जिसने 10 सीटें जीत लीं. कांग्रेस को 2014 में अमेठी और रायबरेली में जीत मिली थी लेकिन 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए. 

इस बार बीजेपी ने सभी सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है तो समाजवादी पार्टी बिना किसी बड़े दल से गठबंधन किए अपने दम पर ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतने की कोशिश कर रही है. देखना होगा क्या सपा का बूथ मैनेजमेंट अगले साल काम करेगा या बीजेपी के टिफिन पर चर्चा जैसे कार्यक्रम से पार्टी एक ऐसा रिकॉर्ड बना लेगी, जिसे तोड़ना नामुमकिन होगा.

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