भाजपा के एमपी उदित राज. उठाइन अपना फोन, खोलिन ट्विटर और ट्वीट दिए. भारतवर्ष कोसंबोधित करते हुए कहिने लगे कि 'अइसा है, दिमाग अपने ठीक कल्लो! ओलंपिक में मेडलनहीं लाते हो और सरकार को कोसते हो. यूसेन बोल्ट को देखो. उसके कोच ने कहा कि बीफ़खाओ. वो खाने लगा. और देखो क्या मेडल लाता है. इसलिए हे भावी एथलीटों, बीफ खाओ मेडललाओ स्कीम के तहत अपना-अपना रजिस्ट्रेशन करवाओ. और सरकार को और हालातों को कोसनाबंद करो.' यहां ये बता दूं कि विचार उनके और शब्द मेरे हैं. डियर उदित राज, मुझेआपसे दो बातें कहनी हैं. दो क्या, तीन कहूंगा. पहली बात: अगर आप ओलंपिक में मेडललाने का ख्वाब बुनते हैं तो उसके लिए ये शर्त होती है कि सभी देशों के साथ आप केदेश के मोड़ा-मोड़ी को कम्पटीशन लगाना होगा. अब जब वो सब बढ़िया इक्विपमेंट और कोच औरखान-पान के साथ ट्रेनिंग करते हैं तो आप ये चाहते हैं कि यहां के एथलीट जितना बनसकता है, उतने से काम चला लें. वाह! खाली पार्टिसिपेशन सर्टिफ़िकेट की चाह रखते होक्या उदित जी? मतलब अगर कोई स्विमिंग का भावी चैंपियन तालाब-पोखरे में प्रैक्टिसकरने को मजबूर है तो आपको अन्दर ही अन्दर कुछ खाता सा महसूस नहीं होता है? दूसरीबात: यूसेन बोल्ट बीफ़ खाता है. आप कहते हो कि इससे उसने मेडल जीत लिया. गजब! आपकोये बता दूं कि दुनिया में यूरुग्वे का पर-कैपिटा बीफ़ कन्ज़म्प्शन सबसे ज़्यादा है.उसके बाद अर्जेंटीना का नम्बर आता है. लेकिन इन देशों से कभी कोई यूसेन बोल्ट नहींआया. क्यों? मैं बताऊं? क्योंकि यूसेन बोल्ट बीफ़ खाने से नहीं अपनी ट्रेनिंग औरकोचिंग के दम पर दुनिया का सबसे तेज़ इंसान बना है. और बीफ़ खाना उसकी ट्रेनिंग का एकहिस्सा मात्र है. यूसेन बोल्ट की डायट देखी जाए तो वो सुबह नाश्ते में अंडे कीसैंडविच, लंच में पास्ता के साथ कॉर्न बीफ़ खाते हैं. दिन भर आम, अनन्नास और सेबखाते रहते हैं. डिनर में भुना हुआ मुर्गा हौंकते हैं. इस हिसाब से उनके खान-पान मेंभी बीफ़ का हिस्सा काफ़ी कम है. तीसरी बात: आपकी बात मान भी ली जाए तो ज़रा लिखित मेंये ज़रूर बतला दीजियेगा कि बीफ़ खाने वालों को आप ही की पार्टी वाले सांस लेने लायकछोड़ देंगे. अगर आप इसके लिए राज़ी हो जायें तो कोई दिक्कत वाली बात रह नहीं जाएगी.क्या है कि आजकल सुर्ख़ियों में या तो डोनाल्ड ट्रम्प रहते हैं या गोरक्षक. अच्छा,जाते-जाते एक बात और. आपका फ़ोन कहीं आपका भांजा तो नहीं चला रहा था?--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ो:ओलंपिक में एथलीट को पानी नहीं, रुमाल छू को पचास लाख!जब ध्यानचंद की वजह से हिटलर मैदान छोड़कर भागा'ओलंपिक की तैयारी करनी है मोदी सर, पर प्लेग्राउंड नहीं है'