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दुनिया को टेंशन दे रहा ओमिक्रॉन का BA.5 वैरिएंट भारत के लिए कितना घातक है?

अमेरिका सहित कई देशों में BA.5 सब-वैरिएंट के कारण कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल आई है.

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15 जुलाई 2022 (अपडेटेड: 15 जुलाई 2022, 10:30 PM IST)
BA.5 sub-variant
कितना घातक है BA.5? (प्रतीकात्मक तस्वीर: इंडिया टुडे)
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कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के एक और सब-वैरिएंट BA.5 को लेकर चेताया जा रहा है. लोगों को दिलाया जा रहा है कि कोविड महामारी अभी खत्म नहीं हुई है. रिपोर्टों के मुताबिक फिलहाल कई देशों में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह ओमिक्रॉन का BA.5 सब-वैरिएंट है.

दुनिया भर के मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि BA.5 कोरोना संक्रमितों को ठीक होने के कुछ हफ्तों के बाद फिर से संक्रमित कर सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक जून के आखिर में आए कोरोना के मामलों में जिन सैंपल्स की जीनोम सिक्वेंसिंग की गई, उनमें से 52 फीसदी मामले BA.5 के निकले. अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक अमेरिका में पिछले हफ्ते 65 फीसदी मामले BA.5 के रहे. वहीं शोधकर्ताओं का कहना है कि ये अब तक का सबसे आसानी से फैलने वाला कोरोना वैरिएंट बता रहे.

BA.5: क्या ये कोई नया वैरिएंट है?

BA.5 नया नहीं है. सबसे पहले जनवरी महीने में इसकी पहचान की गई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन अप्रैल से इसे ट्रैक कर रहा है.

यह कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का सब-वैरिएंट है. कोविड टेस्टिंग में गिरावट के बावजूद कोरोना के मामलों में इस सब-वैरिएंट की ज्यादा मौजूदगी दर्ज की जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक BA.5 की पहचान सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में हुई थी. इसी के कारण यूके, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी हुई है.

ओमिक्रॉन के पिछले वैरिएंट BA.4 की तरह BA.5 भी टीकाकरण या पहले हुए संक्रमण से मिली इम्यून प्रोटेक्शन से बचने में माहिर है. BA.5 के स्पाइक प्रोटीन में तीन मुख्य म्यूटेशन हैं, जिसकी वजह से ये आसानी से हमारी कोशिकाओं में एंट्री कर सकते हैं और इम्यूनिटी से बच निकलते हैं.

कितना घातक है BA.5?

अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित शोधकर्ता संस्थान स्क्रिप्स रिसर्च में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर और कार्डियोलॉजिस्ट एरिक टोपोल ने BA.5 को अब तक देखे गए सभी कोरोना वायरसों का ‘सबसे बुरा वर्जन’ कहा है. CNN को दिए एक इंटरव्यू में एरिक टोपोल ने कहा कि हालांकि ये वैरिएंट इसकी चपेट में आने वाले लोगों को गंभीर रूप से बीमार करता नजर नहीं आ रहा. फिर भी टोपोल को लगता है कि इससे अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि ये राहत की बात है कि BA.5 आईसीयू में भर्ती और मौतें बढ़ाता नहीं दिख रहा, लेकिन निश्चित तौर पर ये चिंताजनक है.

अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी सीडीसी की डायरेक्टर रोशेल वालेंस्की के मुताबिक भले ही कोई व्यक्ति ओमिक्रॉन के BA.1 और BA.2 सब-वैरिएंट से संक्रमित हो चुका हो, फिर भी उसे BA.4 और BA.5 से संक्रमण का रिस्क है. ये ठीक है कि BA.5 किसी भी अन्य ओमिक्रॉन वैरिएंट की तुलना में मौतों और घातकता के लिहाज से अधिक खतरनाक नहीं दिख रहा, लेकिन इसकी वजह से एकदम से मामलों में आई उछाल से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है. 

भारत की बात करें तो इंडियन SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के मुताबिक भारत में BA.5 फिलहाल हावी नहीं है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ओमिक्रॉन के BA.2 सब-वैरिएंट के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं.

वीडियो- भारत में मिला कोरोना वायरस का नया वैरिएंट

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