2020 के ट्वीट को एक साल पुराना बताकर अटर्नी जनरल ने कंटेम्प्ट केस की मंज़ूरी नहीं दी!
RTI एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने शेफाली वैद्य के खिलाफ़ शिकायत की थी.
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केके वेणुगोपाल और उनका पत्र
शैफाली वैद्य. फ़्रीलांस लेखक और कॉलमनिस्ट हैं. इनके कुछ ट्वीट्स को न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ बताकर अदालत की अवमानना का मुक़दमा चलाने की मांग की गई थी. इसके लिए RTI एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को चिट्ठी लिखकर केस चलाने की सहमति मांगी थी. वेणुगोपाल ने इजाजत देने से इनकार कर दिया. इसकी वजह भी बताई. इसके बाद गोखले ने अटॉर्नी जनरल पर ही सवाल उठा दिए.
नियम है कि किसी के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कार्यवाही शुरू करने से पहले अटॉर्नी जनरल की मंजूरी जरूरी होती है. इसीलिए शैफाली के मामले में गोखले की ओर से ये इजाजत मांगी गई थी. वेणुगोपाल ने मंजूरी देने से इनकार करते हुए कहा,
साकेत गोखले के अनुरोध पर वेणुगोपाल ने ये पत्र लिखा था.
शैफाली के खिलाफ केस चलाए जाने पर असहमति वाला अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल का पत्र 27 नवंबर को जारी किया गया था. बुधवार 2 दिसंबर को साकेत गोखले ने ट्वीट करके वेणुगोपाल पर सवाल उठाए. गोखले ने आरोप लगाया कि वेणुगोपाल नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करने वालों के खिलाफ़ ही अवमानना का मुक़दमा चलाने की अनुमति दे रहे हैं, उनसे सहानुभूति रखने वालों के खिलाफ नहीं.
संभवत: गोखले का इशारा स्टैंडअप कमीडियन कुणाल कामरा के खिलाफ कंटेम्प्ट का केस चलाने की मंजूरी की ओर था. गोखले के मुताबिक, शैफाली ने अपने ट्वीट्स में निचली अदालतों के अलावा सुप्रीम कोर्ट के एक जज के बारे में भी टिप्पणियां की थीं. उन्होंने आरोप लगाया कि शैफाली के दो महीने पुराने ट्वीट को वेणुगोपाल साल भर पुराना बता रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट को इस पर गौर करना चाहिए.

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